सावधान: कोरोना काल में दोगुना हुआ ‘स्क्रीन टाइम’, हो सकती हैं कई बीमारियां, इस तरह रोकें-

कोरोना से हमारे जीवन की कई चीजें बदल गई हैं. साल 2020 से अब तक देखा जाए तो लगभग सभी लोग डिजिटल हो गए हैं. कोई भी काम हो सब घर बैठे ही करने लगे हैं. वैसे ये अच्छी बात है इससे समय की बचत होती है लेकिन अब इसका हमारी सेहत पर बेहद बुरा असर पड़ने लगा है.

Screen time doubled in Corona virus

हमारी हर जरूरत के लिए बस world wide web

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आज हमारी हर जरूरत के लिए world wide web ही जरिया बन चुका है. अमेरिका में हुई एक स्टडी के अनुसार ग्लोबल लेवल पर गैजेट का यूज टाइम 90% तक बढ़ गया है. मतलब स्मार्टफोन का इस्तेमाल जहां पहले प्रति व्यक्ति औसतन 3 घंटे होता था, वो 5 घंटे तक पहुंच गया है. ब्रॉडबैंड या वाईफाई से जुड़े रहने के दौरान पहले एक व्यक्ति औसतन 2.5 घंटे स्क्रीन इस्तेमाल करता था, अब ये आंकड़ा 4.5 घंटे तक जा पहुंचा है.

स्क्रीन टाइम बढ़ने का कारण

टेक्सास यूनिवर्सिटी में साइकोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. जॉन डी केरी बताते हैं कि सोशल मीडिया या डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल को एक दिन के लिए भी रोका नहीं जा सकता ये बहुत मुश्किल है. सोशल मीडिया एक दूसरे के साथ जुड़े रहने, सूचना साझा करने, मनोरंजन मुहैया कराने में मदद करता है. इसके फायदे और नुकसान दोनों हैं. हालांकि सोशल मीडिया या डिजिटल डिवाइस पर बहुत ज्यादा समय बिताना भी नशे की लत की तरह है. उससे हम प्रभावित होते हैं और इसका नकारात्मक प्रभाव हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है.

स्क्रीन टाइम कम करने के लिए क्या करें ?

सबसे बड़ा कारण ये है कि आजकल लोगों को मैसेज या चैट पर बात करना ज्यादा आसान लगता है. और चैट करते हैं तो 2 मिनट की बात भी 10 से 15 मिनट तक चलती है. कॉल करने में वही बात 2 मिनट में ही हो जाती है. इससे आपका स्क्रीन टाइम कम हो सकता है और आपके स्वास्थ्य पर ज्यादा प्रभाव भी नहीं पड़ेगा.

सोते समय फोन अपने पास बिलकुल भी न रखे. अपने वीक ऑफ को बिना किसी डिवाइस के इंजॉय करिये. अपने फोन पर वहीं ऐप रखें जो काम के हों. इसके अलावा फिजूल की ऐप को डिलीट कर दें. स्क्रीन टाइम बढ़ाने वाली ऐप को डिलीट कर दें. काम के वक्त तो सभी लैपटॉप, कंप्यूटर या मोबाइल यूज करते हैं, इसके अलावा आप कब-कब और कितने टाइम गैजेट यूज करेंगे, इसे प्लान कर लें.

बेड पर लेट कर लोग गैजेट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं ये बीमारी का सबसे बड़ा कारण है. इसके चलते लोगों की स्लीपिंग हैबिट भी डैमेज हो रही है. और गैजेट यूज टाइम में भी इजाफा हो रहा है. जबकि डॉक्टर्स की मानें तो फिट रहने के लिए कम से कम 6 घंटे की नींद बहुत जरुरी है. इसलिए बेडरूम से टीवी या कंप्यूटर को हटा कर हम काफी हद तक स्क्रीन टाइम को कम कर सकते हैं.

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि गैजेट इस्तेमाल करना इतना खतरनाक नहीं है, जितना उसके चलते फिजिकल एक्टिविटी को मिस करना है. अगर स्क्रीन टाइम कम नहीं करते हैं और फिजिकल एक्टिविटी को नहीं बढ़ाते हैं तो इससे आपको डिजिटल विजन सिंड्रोम की समस्या हो सकती है. इसकी वजह से आंख कमजोर होने लगती है और मानसिक और शारीरिक समस्याएं भी होने लगती हैं.

ज्यादा स्क्रीन टाइम लोगों को समाज, दोस्त और परिवार से अलग कर देता है. जितना ज्यादा आप लोगों से दूर रहेंगे, उतना ज्यादा अकेलापन और डिप्रेशन का शिकार होने का रिस्क बढ़ जाता है.