हार के बाद से अखिलेश ने ‘एक फोन तक नहीं किया’, लेकिन बड़े होने के नाते मैंने किया: मायावती

मायावती ने जोनल कोऑर्डिनेटरों और सांसदों के साथ रविवार को मीटिंग की थी. जिसमें उन्होंने अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा. मायावती ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से सरे नाते तोड़ दिए हैं.

mayawati said Akhilesh yadav did not make a call after loksabha election

सबसे पहले माया ने कहा कि अखिलेश ने मुझे ज्यादा मुसलमानों को टिकट देने से मना किया था, अखिलेश ने मुझसे कहा था कि इससे ध्रुवीकरण होगा. लेकिन मैंने उनकी बात नहीं मानी. इसके बाद दूसरा आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि गठबंधन के चुनाव हारने के बाद अखिलेश ने मुझे एक बार भी फोन नहीं किया. जबकि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने उनसे फोन करने को भी कहा, लेकिन उन्होंने जरुरी नहीं समझा.

लेकिन बड़े होने के नाते मैंने उन्हें फोन किया और उनके परिवार के सदस्यों की हार पर सहानुभूति जताई. फिर जब दिल्ली में मैंने मीटिंग करके अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया तो भी अखिलेश ने मुझे फोन न करके सतीश चंद्र मिश्र को फ़ोन किया था. सपा ने प्रमोशन में आरक्षण का विरोध किया था इसलिए दलितों, पिछड़ों ने उसे वोट नहीं दिया. सपा शासन में दलितों पर जो अत्याचार हुआ था वही इनकी हार का कारण बना. कई जगह सपा नेताओं ने बसपा उम्मीदवारों को हराने का काम किया था. और बीजेपी को वोट ट्रांसफर कराये.

इसके पहले भी मायावती शिवपाल सिंह यादव और अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोल चुकी हैं. उन्होंने कहा था कि शिवपाल यादव ने बीजेपी को यादव वोट ट्रांसफर कराए हैं और सपा इसे रोक नहीं पाई. शिवपाल बीजेपी से मिले हुए हैं. माया यहाँ ही नहीं रुकीं उन्होंने ये तक कह दिया कि अखिलेश यादव अपनी पत्नी डिंपल यादव को भी चुनाव नहीं जिता पाए. गठबंधन का कोई फायदा नहीं हुआ. वोट ट्रांसफर का फार्मूला सफल नहीं रहा है.

उसी के बाद ही मायावती ने गठबंधन खत्म करने का स्पष्ट संकेत करते हुए उत्तर प्रदेश की सभी 12 विधानसभा सीटों का उपचुनाव अकेले लड़ने का एलान भी कर दिया था. अब मायावती उसी को जीतने में लग गईं हैं. मायावती ने अखिलेश में सामने गठबंधन बनाये रखने के लिए शर्त भी रखी थी कि अगर हमें लगेगा की अखिलेश अपने राजनीतिक कार्यों और अपने लोगों को मिशनरी बनाने में कामयाब हो जाते हैं तो हमलोग मिलकर जरूर आगे एक साथ फिर से चुनाव लड़ेंगे.