किसानों (Kisaan) मुझे क्षमा कर दो आंदोलन के आगे टूट गया अहंकार..

PRAGYA KA PANNA
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दुनिया भर में भारत की भद्द पिटवाने के बाद..नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों (Kisaan) पर जबरन थोप दिए गए तीन किसान कानून माफी के साथ वापस ले लिए हैं..दुनिया के सामने अपने ही देश के किसानों को आतंकवादी कहने के बाद..अपने ही देश के किसानों को खालिस्तानी कहने के बाद..अपने ही किसानों को मवाली कहने के बाद हमारे देश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किसान कानून वापस ले लिया है..

क्या किसी देश का प्रधानमंत्री अपने ही देश के किसानों (Kisaan) को चिढ़ाता है क्या..अपने ही देश के किसानों के रास्ते में कीलें तार वगैरह गड़वाता है क्या..जो नरेंद्र मोदी खुद क्षमा याचना कर रहे हैं.. जिन किसानों के लिए देवताओं वाले शब्द इस्तेमाल कर रहे हैं..इन्हीं किसानों को यही हमारे ही क्षमा याचक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी..मंच से खुद..इन्हीं किसानों को चिढ़ाते हुए उनको आंदोलनजीवी कहते थे..

आंदोलन जीवी वाली प्रधानमंत्री भाषा तब की है जब इनको चुनावों का डर नहीं था..आज चुनावों में हार का डर है..नरेंद्र मोदी किसानों को आंदोलन जीवी कहते थे..इनके नीचे की पूरी फौज..मवाली कहती थी..आतंकी कहती थी..खालिस्तानी कहती थी..अब अचानक ज्ञान प्राप्त हुआ की नहीं ये लोग आंदोलन जीवी नहीं हैं..धरने पर बैठे लोग किसान (Kisaan) ही हैं..आज मेरे दिव्य चक्षू खुल गए हैं..इसलिए हे किसानों चुनाव सिर पर हैं..मैं अपने किसानों से माफी मांगता हूं मुझे माफ कर दीजिए.

दोस्तों जितने दांव खेलने थे..सरकार ने सारे दांव खेल लिए..किसानों (Kisaan) में फूट डाली..कीलें गड़वा लीं..लाठी चलवा ली..गिरफ्तारी करवा ली..लाल किला कांड हो गया..टूल किट कांड हो गया..साम दाम दंड भेद सब कर लिया. आखिर में जब चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए किसानों ने कमर कस ली उसके बाद याद आई माफी..मैं माफी मांगता हूं..मुझे माफ कर दो..जो नरेंद्र मोदी पिछले एक साल से किसानों से एक फोन कॉल की दूरी पर थे..लेकिन बिचार किसानों का फोन नंबर भूल गए थे..वो नरेंद्र मोदी..कैमरा चालू करवाकर देश के सामने खड़े होकर मांगते देखे गए..

दुनिया के सबसे लंबे आंदोलन में किसानों (Kisaan) ने बीजेपी सरकार को झुका दिया है..बीजेपी सरकार को झुकाने में जितना योगदान किसानों का है उससे ज्यादा चुनावों का है..चुनावों के लिए बीजेपी कुछ भी कर सकती है..बंगाल में आपने देखा होगा..देश को कोरोना के मुंह में झोंक सकती है..तो किसानों से माफी मांगना बहुत छोटी बात है..यूपी पंजाब.उत्तराखंड..गोवा जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं..बीजेपी नेताओं को गांवों में घुसने नहीं दिया जा रहा था..हार सामने खड़ी दिखाई दे रही थी..बस माफी की सिर्फ इतनी सी वजह है..वर्ना बीजेपी के लिए किसान आज भी वही आतंकी हैं..जो पहले थे..खालिस्तानी हैं..मवाली हैं..भारतीय नेतागिरी में वोट के लिए गधे को भी बाप बनाना पड़ता है साहब..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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