जिन चीतों की फोटो मोदी ने खींची थी वो मरने की हालत में कैसे आ गाए ?

नामीबिया से पीएम मोदी जो चीता लेकर आए थे, अब लम्बी बीमारी के बाद उस चीते की मौत हो गई है !

एक साल से अन्दर चीते की मौत
बीते साल अपने 74 जन्मदिन पर पीएम मोदी ने देश को तोहफे में नामीबिया से लाए गाए 8 चीते दिए थे…पीएम मोदी ( PM Modi ) खुद कैमरा पकड़ कर इन चीतों की तवीरे खीच कर रहे हैं, फोटो खीचते हुए मोदी की भी खूब फोटोग्राफी हुई थी । दोस्तों जब इन चीतों को मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा जा रहा था तो टीवी पर इसकी नॉन स्टॉप कवरेज दिखाई जा रही थी, पीएम मोदी ( PM Modi ) ने इसे एतिहासिक दिन बतया था, लेकिन एक साल से अन्दर ही उस चीतों में से एक मादा चीते की मौत हो गई ! अब न तो कोई लाइव कवरेज हो रही है और न ही पीएम मोदी कैमरा के साथ वहा पहुचे हैं !

मादा चीता कई दिनों से बीमार थी

नामीबिया से लाई गई साशा नाम की मादा चीता कई दिनों से बीमार थी. इस चीता की किडनी खराब हो गई थी…कूनो नेशनल पार्क के प्रशासन का कहना है कि मॉनिटरिंग टीम ने जब कुछ दिन पहले साशा को देखा था तो वो काफी सुस्त थी … जांच हुई तो पता चला कि उसे इलाज की जरूरत है जिसके बाद उसे क्वारंटीन बाड़े में रक्खा गया . उसके ब्लड सैंपल की जांच से पता चला कि उसके किडनी में इन्फेक्शन है. लेकिन इलाज के दौरान ही साशा की मौत हो गई !

मोदी ने शुरू किया था ‘Project Cheetah’

दोस्तों दक्षिण अफ्रीका और भारत ने अफ्रीकी देश से चीतों को लाने के लिए बीते साल एक समझौते पर साइन किया था. इसके बाद चीतों को मध्य प्रदेश के कुनो में बसाया गया था… दोस्तों दुनिया के ज्यादातर चीते दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और बोत्सवाना में हैं. वही चीतों की सबसे ज्यादा आबादी नामीबिया में है ।

लेकिन भारत में आखिरी चीता उन्नीस सौ अड़तालीस में छत्तीसगढ़ के कोरैया जिले के जंगल में मारा हुआ मिला था ! तबसे ये चीते विलुप्त हो गए थे ! लेकिन चौहत्तर साल बाद भारत में चीतों को वापस लाने के लिए ‘Project Cheetah’शुरू किया …इसे दुनिया के सबसे बड़े वाइल्ड लाइफ ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट में से एक कहा जा रहा था, जब चीते लाए गए तो इसका खूब ढिंढोरा पीटा गया !

चीतों के लिए बनाए थे चीता मित्र

सरकार ने कुल 90 गांवों के 457 लोगों को चीता मित्र बनाया! चीता मित्र यानि वो लीग जो इन चीतों का ध्यान रक्खेंगे । पीएम मोदी ( PM Modi ) खुद इन चीता मित्रों से मिलने गए, उन्हें काम समझाया था …! लेकिन एक साल भी नहीं बीता और चीते की मौत हो गई । जब चीते लाए गए थे तब क्रेडिट तो खूब लिया गया था लेकिन उसकी मौत पर ज़िम्मेदारी लेने को कोई भी तैयार नाही है । प्रशासन का कहना है कि भारत लाए जाने से पहले से इस चीते को किडनी की बीमारी थी ! अब सवाल ये है बीमार को लाए ही क्यों ? दोस्तों जब आम आदमी सब्जी खरीदता है तब भी देख परख कर खरीदता है , तो इतने बड़े प्रिजेक्ट चीता से पहले क्या इन जानवरों का कोई मेडिकल टेस्ट तक नहीं करवाया गया था ? अगर ऐसा है तब तो यह सरासर देश के धन और संसाधन की बर्बादी मानि जाएगी ।