लोग चाहे मर जाएं लेकिन इमेज पर आंच ना आए : संपादकीय

लोगों की जान से ज्यादा हिंदुस्तान की सरकार को अपनी इमेज प्यारी है..इमेज पर आंच ना आए..इंसानों की चिताएं कीड़े मकोड़ों की तरह जलती हैं तो जल जाएं..हिंदुस्तान में दो लाख से ज्यादा लोगों की फोटो पर हार लटक गया है..और दूसरी तरफ सरकार की तारीफ में मंत्रियों का चित्रहार चल रहा है.. गंगा में लाशें तैर रही हैं..कब्र तक नसीब नहीं हुई..श्मसानों में चिताओं का कुंभ सजा है..वैक्सीन का अकाल पड़ गया है..ऑक्सीजन की कमी से लोग मर गए लेकिन सरकार को अपनी इमेज की चिंता है..वेटीलेटर नहीं दे पाए..अपनों को छोड़ वैक्सीन विदेशों में बांट आए…..सरकार को लगता है जानें नहीं बचा पाए तो क्या..इमेज बच जाए तो सरकार फिर आएगी इंसान का क्या है…मर जाएगा तो पुनर्जन्म पाएंगा..

     क्या गलत छापा है विदेशी मीडिया ने..यही ना कि भारत की बीजेपी सरकार कोरोना महामारी को रोकने में पूरी तरह से फेल साबित रही..जब कोरोना की रोकथाम करनी थी तब खुद प्रधानमंत्री रैली कर रहे थे..कुंभ का मेला सजा था..इसमें कुछ गलत छापा है क्या..भारत की बीजेपी सरकार ने इमेज बचाने के लिए कौन सा रद्दी और बिल्कुल बचकाना तरीका अपना है..

आप जानेंगे तो हसेंगे..बचपन में आपने डॉक्टर डॉक्टर खेलते समय भी ऐसा बेवकूफाना काम नहीं किया होगा..अभी आगे बताऊंगी हमारी महान सरकार ने अपनी इज्जत बचाने के लिए कितनी बेईज्जती कराई है.. लेकिन पहले ये जान लीजिए की विदेशी मीडिया ने छापा क्या है.. द गार्डियन ने लिखा.. ‘डोनाल्ड ट्रम्प की तरह मोदी ने भी महामारी बढ़ने के बावजूद चुनावी रैलियों में हिस्सा लेना नहीं छोड़ा. भारत में पांच राज्यों में चुनाव हुए और मोदी बिना मास्क के रैलियां करते रहे.’ ऑस्ट्रेलिया के अखबार द ऑस्ट्रेलियन ने लिखा ‘मोदी की वजह से भारत कयामत की स्थिति में पहुंच गया है’ कुछ ऐसा ही ‘गल्फ न्यूज़’, ‘टाइम मैगजीन’ और ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने भी लिखा..

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           देखिए मै अपने देश की मीडिया को दोष नहीं दूंगी..क्योंकि जब चैनल या अखबर सरकारों की कृपा से बंद हो जाते हैं तो सच का ज्ञान देने वाले लोग उनके परिवार चलाने नहीं आते..तो भारत की मीडिया के बारे में छोड़ दीजिए..सरकार का ध्यान कहां पर है आप वो देखिए..रेमडिसीवर ऑक्सीजन और वेटीलेटर सब गया भाड़ में..भारत की बीजेपी सरकार के तमाम मंत्री अचानक एक ट्विट करने लगे.. सबने लगभग कॉपीपेस्ट वाला आइटम चेपते हुए लिखा कि मोदी जी महान हैं..वो बहुत काम कर रहे हैं..विपक्ष के बहकावे में ना आएं..और एक अखबार की स्टोरी का लिंक भी साथ में चेप दिया..

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    अखबार का नाम था द डेली गार्डियन..यानी गार्डियन अखबार का डुब्लीकेट..ड्ब्लीकेट का मतलब है..जैसे हमारे राजाजीपुर में गुप्ताजी चांट वाले हैं..उनके बगल में एक और ने दुकान खोली और लिखा असली गुप्ता जी चांट वाले..फिर उनके बगल में एक और ने ठेला लगाया लिखा नक्कालों से सावधान गुप्ता जी चांट वाले की पुरानी दुकान..अब असली गुप्ताजी की दुकान कौन सी है..ये राजाजीपुरम का रहने वाला भी पता नहीं लगा पाता..

सरकार ने जिस अखबार के लिंक को शेयर किया वो एक लोकल उत्तरप्रदेश से रजिस्टर्ड अखबार है…उसका नाम द डेली गार्जियन..सरकार लोगों में ये भ्रम फैलाना चाहती है कि अब विदेशी अखबार भी मोदी जी की तारीफ करने लगे हैं..अब सब कुछ ठीक है..भले ही गंगा की रेत में लाशें दबाई जा रही हों.. नदियों में बहाई जा रही हों..

      मैं प्रज्ञा मिश्रा इन मंत्रियों से कहना चाहती हूं..जिसका भाई..जिसकी मां..जिसकी बहन..जिसका बाप..जिसकी बेटी एंबुलेंस में..घर में..सड़क पर..अस्पताल के दरवाजे पर तड़प तड़प कर मरे हैं ना उनकी हाय लगेगी तुम लोगों को..अपनी नाकामियां छिपाने के लिए नकली विदेशी अखबार का पेज शेयर करने में तुम लोगों ने जितनी मेहनत की है उतने समय में अगर किसी की मदद की होती देश के बारे में सोचा होता है तो नकली अखबारों में पैसे देकर नकली खबरें ने छपवानी पड़तीं..असली अखबार ही आपकी जयजयकार करते..

  मेरे देश भारत वर्ष की संस्कृति और सरकार की संस्कृति दोनों जमीन आसमान की तरह बिल्कुल अगर हैं…देश की संस्कृति कहती है भले अपने घर में रोटी ना हो लेकिन पड़ोसी को भूखा नहीं सोने पाए और सरकार की संस्कृति ये है कि भले लाखों मर जाएं लेकिन इमेज गड़बड़ न होने पाए..सच दब नहीं सकता बनावटी उसूलों से..खुशबू आ नहीं सकती कागज के फूलों से… वो 18-18 काम कर रहे हैं..और उनके इतना काम करने के बाद भी दो दो लाख लोग मर गए..तो मंत्री महोदय आप उनको कहिएगा कि आप थोड़ा आराम कर लीजिए..शायद लोग बच जाएं.. चलती हूं राम राम दुआ सलाम..जय हिंद..

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DISCLAMER- लेख में प्रस्तुत तथ्य/विचार लेखक के अपने हैं. किसी तथ्य के लिए ULTA CHASMA UC उत्तरदायी नहीं है. लेखक एक रिपोर्टर हैं. लेख में अपने समाजिक अनुभव से सीखे गए व्यहवार और लोक भाषा का इस्तेमाल किया है. लेखक का मक्सद किसी व्यक्ति समाज धर्म या सरकार की धवि को धूमिल करना नहीं है. लेख के माध्यम से समाज में सुधार और पारदर्शिता लाना है.

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