रोक सकते हैं कोरोना की तीसरी लहर, अगर जनता और सरकार उठाए ये कदम, पढ़ें –

देश में अभी कोरोना वायरस की दूसरी लहर से हाहाकार मचा हुआ है और तीसरी लहर के आने की आशंका भी तेज हो गई है. जिससे पूरा देश सोच में पड़ गया है. महामारी से जुड़े विशेषज्ञों ने इससे बचने के उपाए बताये हैं.

तीसरी लहर से बचने के उपाए

तीसरी लहर ने बचने के लिए विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अभी से ही जनता और सरकार अपनी-अपनी भूमिका सही तरीके से निभा ले जाएं तो शायद तीसरी लहर आने से पहले ही रुक जाएगी. देश में तीसरी लहर जैसी स्थिति पैदा न हो, इसके लिए जरूरी है कि आम लोग कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करे. सरकार को भी चाहिए कि अगले एक साल तक देश में होने वाले सभी बड़े आयोजनों पर पूरी तरह से रोक लगा दें. रैली और धार्मिक आयोजन ही नहीं, बड़ी-बड़ी पार्टी और शादी समारोह पर भी पूरी तरह से रोक लगा देनी चाहिए.

लोगों की ढिलाई का नतीजा दूसरी लहर

अगर जनता और सरकार ने ऐसे ही कड़े कदम उठाएं तो हो सकता है कि तीसरी लहर हर जगह न आए या हो सकता हो कि कहीं भी न आए. ऐसा करने से संक्रमण की रफ्तार तो धीमी होगी ही साथ ही इस दौरान बड़ी संख्या में वैक्सीन लगा कर लोगों को सुरक्षित किया जा सकता है. इस साल के शुरुआत में लोगों ने काफी ढिलाई बरतनी शुरू कर दी थीं, जिसका नतीजा कोरोना की दूसरी लहर के रूप में सामने है. अगर हम सब कोविड नियमों का सख्ती से पालन करें और बड़ी आबादी को वैक्सीनेट कर लें तो तीसरी लहर कम घातक होगी.

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भारत में दूसरी लहर वैरिएंट बी.1.617 से

वैसे तो एक्सपर्ट का कहना है कि तीसरी लहर पूरे भारत में आना मुश्किल है लेकिन अगर वायरस कोई नया वैरिएंट बना ले तो ही तीसरी लहर आ सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन का मानना है कि कोरोना के वैरिएंट बी.1.617 का भारत में महामारी की मौजूदा स्थिति में बड़ा हाथ है. इसे इंडियन वैरिएंट के नाम से भी जाना जा रहा है.

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ये अच्छी खबर है की देश में अब कोरोना की दूसरी लहर कम पड़ रही है. सोमवार को देश में 3 लाख 29 हजार 379 नए संक्रमितों की पहचान हुई, और 3.55 लाख संक्रमित ठीक हो गए हैं. ऐसा माना जा रहा है कि 15 जून तक दूसरी लहर पर बड़ी राहत मिल सकती है.

वैक्सीन और जांच कारगर

WHO का कहना है कि देश में सबसे पहले अक्टूबर में पाया गया ये वैरिएंट B-1617 ज्यादा संक्रामक लग रहा है और यह आसानी से फैल सकता है. इस वैरिएंट पर एंटीबॉडीज का कम असर हो रहा है. लेकिन इस वैरिएंट में वैक्सीन के प्रति ज्यादा प्रतिरोधक क्षमता नहीं है. मौजूदा वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन और जांच कारगर है. इसलिए लोगों को इसमें बदलाव की जरूरत नहीं है, सभी को आगे आकर वैक्सीन लगवानी चाहिए. और सभी गाइडलाइंस का पालन करना चाहिए.

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