मल्लाह की बेटी फूलनदेवी (Bandit Queen) की सच्ची कहानी…..

मल्लाह की बेटी जब अपनी इज्जत से खिलवाड़ करने वालों से बदला लेने के लिए बंदूक उठाती है तो फूलन देवी बन जाती है..हुआ ये कि डकैत बन चुकी 16 साल की फूलनदेवी (Bandit Queen) बदले की आग में जल रही थी..उसके शरीर को नोचने वाले भेड़ियों को मौत की नींद सुलाने के लिए उनसे बंदूक उठा ली..अपमान का बदला लेने के लिए 22 ठाकुरों की एक लाइन में खड़ा करके गोलियों से भूनकर सजा दी..इस देश का दुर्भाग्य है कि जब 16 साल की फूल सी फूलनदेवी (Bandit Queen) की दर्जनों दरिोंदों ने रेप किया तब देश के भीतर किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा..लेकिन जब फूलनदेवी ने 22 ठाकुरों की एक साथ खड़ा करके गोलियों से भून दिया तो..उत्तर प्रदेश की राजनीतिक चूलें हिल गईं..मुलायम सिंह यादव कैसे फूलनदेव के गॉड फादर बने..और कैसे फूलनदेवी को एक ठाकुर ने ही उनके दिल्ली वाले घर पर मार दिया..बैंडिट क्ववीन फूलन देवी की पूरी कहानी सुनाएंगे..चलिए कहानी को शुरू से शुरू करते हैं..

फूलन देवी जिसे आप डाकू के तौर पर जानते हैं..जिसे आप बीहड़ की बागी के तौर पर जानते हैं..जिसके नाम से लोगों की पतलून ढीली हो जाती थी..जिसकी गोली का निशाना कभी खाली नहीं गया..क्या आपने कभी 16 साल की बिहड़ की रानी फूलनदेवी की फूल सी जिदगी के उस आंगन में झांकने की कोशिश की है..जहां फूलनदेवी पर इस दुनिया का सबसे बड़ा अन्याय हुआ..आधा दर्जन अपरकास्ट लोगों ने 16 साल की फूलन देवी के आधी रात तक बारी बारी बलात्कार किया…

फूलन देवी का जन्म 10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश में जालौन के घूरा पुरवा में हुआ..उस जमाने में बच्चियां बोझ होती थी..मात्र दस साल की उम्र में फूलन की शादी उसकी उम्र में बड़े आधेड़ पियक्कड़ आदमी से कर दी गई..पति ने छोड़ दिया..गांव के अपरकास्ट फूलन पर नजर गड़ाने लगे..शादी शुदा लड़की मायके में रहे तो कुलक्षिणी मानी जाती थी..हर नजर उसे नोच खाने के लिए तैयार बैठी रहती थी..16 साल की उम्र में ठाकुरों ने उसका अपहरण कर लिया…उस काली रात में फूल सी बच्ची के साथ दर्जनों दरिंदों ने एक एक करके आधी रात बलात्कार किया..

अबला फूलन पत्थर हो गई थी. ये सब सहन कर गई..लेकिन हर घड़ी हर वक्त वो बदले की आग में जलने लगी…इसी बीच उसका संपर्क डाकुओं से हुआ..फूलन डाकुओं के गैंग में शामिल हो गई..छोटी सी उम्र में ही फूलन का निशाना अचूक हो गया था..फूलन के हाथ से कोई शिकार छूटना नहीं था..उसने खुद को इतना मजबूत बनाया कि अपनी इज्जत के साथ सौदा करने वालों को देखते ही भस्म कर सकती थी..फूलन के सीने में सुलग रही बदले की आग अंगारा बन चुकी थी..और फिर वो दिन आ ही गया..जगह थी जालौन का बहमई गांव जहां ठाकुरों ने उसकी इज्जत रौंदी थी..फूलन गांव पहुंची..जिन जिन लोगों ने उसकी इज्जत पर हाथ डाला था..उनको और उनके घर वालों को मौत की नींद सुला दी.. 22 ठाकुरों को एक साथ एक लाइन में खड़ा करके गोली मार दी..

देश में 80 का दशक था…भले ही उसने ठाकुरों को मारकर कानून अपने हाथ में लिया था..लेकिन इंदिर गांधी के बाद वो अकेली ऐसी महिला था..जो भारत के भीतर आयरन लेडी थी..ये वो दशक था जब फूलन देवी किसी फिल्मी सितारे से कम नहीं थी..लोग फूलन देवी (Bandit Queen) की मिसाल देते थे..क्योंकि ऐसा नहीं था कि फूलन देवी सिर्फ डाकू थी..फूलन वो लड़की थी जिसे लोग नीच जाति का समझते थे..मल्लाह की बेटी कहकर उसका अपमान करते थे..लेकिन फूलन देवी का दिल गरीबों के लिए धड़कता था..फूलन देवी के हालातों ने उसे कठोर बना दिया था..

अपने अपमान का बदला लेने के बाद फूलन देवी ने हथीयार डालने का मन बना लिया और उसने मध्य प्रदेश की सरकार के सामने आत्म समर्पण कर दिया..जब फूलन देवी ने आत्म समर्पण किया तो उसकी एक झलक देखने के लिए हजारों लोगों का मेला लगा था..फूलन देवी (Bandit Queen) के माथे पर लाल रंग का बंधा कपड़ा बंधा था..हाथों में बंदूक थी..वो मंच पर चढ़ी और बंदूक को अपने माथे से लगाकर उसे मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के पैरों में रख दी…इसके बाद फूलन देवी ने डाकू की जिंदगी को अलविदा कह दिया..

बीहड़ को बाय बाय कहने के बाद..1996 में मुलायम सिंह ने पिछड़ों की बेटी फूलन को समाजवादी पार्टी से टिकट दिया..जब फूलन देवी को समाजवादी पार्टी से टिकट मिला तो लोगों ने काफी बवाल किया कहा ये भी जाने लगा कि अब डाकुओं को संसद तक पहुंचाने का रास्ता दिखाया जाने लगा है…लेकिन मुलायम सिंह ने किसी कि नहीं सुनी और फूलन देवी को टिकट दिया और फूलन देवी ने चुनाव लड़ा और मिर्जापुर से सांसद बन गयीं..इस जीत के बाद फूलन देवी को एक नई पहचान मिल गयी..

सन् 1994 में शेखर कपूर ने फूलन देवी के जीवन पर एक फिल्म बनाई जिसे काफी पसंद किया गया..फ़िल्म में फूलन देवी (Bandit Queen) को एक ऐसी बहादुर महिला के रूप में पेश किया गया जिसने समाज की ग़लत प्रथाओं के ख़िलाफ़ संघर्ष किया…और कैसे अपने ऊपर किए हुए अत्यचार का बदला लिया…कभी हार नहीं मानी

फूलनदेवी ने 1983 में आत्मसमर्पण किया था..1994 तक जेल में रहीं..1996 में मुलायम सिंह यादव ने फूलन को संसद पहुंचा दिया..फूलनदेवी सांसद थी..लिहाजा दिल्ली में में ही सांसदों को मिलने वाले आवास पर ही रहती थी..दिल्ली में फूलन देवी के करीब रहने वाले एक ठाकुर नेता शेर सिंह राणा ने फूलन देवी से विश्वासघात करके फूलन देवी की हत्या कर दी…तो दोस्तों ये थी उस फूलन की कहानी जिसने अपने मान सम्मान के लिए बंदूक उठाई..जिसका रास्ता भले गलत था लेकिन उसने दिखा दिया कि कोमल है कमजोर नहीं…शक्ति का नाम ही नारी है..

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