भारत में किसी भी राजनीतिक पार्टी या उम्मीदवार द्वारा मतदाताओं को अपने खर्चे पर पोलिंग बूथ तक लाना सीधे तौर पर चुनावी भ्रष्ट आचरण (corrupt practice) माना जाता है। यह नियम मुख्यतः जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत लागू होता है।
कौन-से नियम लागू होते हैं:
1. धारा 123(5) – “Corrupt Practice”
इस धारा के तहत:
- यदि कोई उम्मीदवार या उसकी पार्टी मतदाताओं को मुफ्त में वाहन उपलब्ध कराती है
- या पैसे देकर उन्हें वोट डालने के लिए लाती-ले जाती है
तो इसे भ्रष्ट आचरण माना जाता है।
👉 इसका मतलब:
पार्टी अगर अपने पैसे से बस, कार, ऑटो आदि लगाकर वोटरों को बूथ तक लाती है, तो यह कानून का उल्लंघन है।
2. धारा 133 – “Illegal Hiring of Vehicles”
- बिना अनुमति के वाहनों को मतदाताओं को लाने-ले जाने के लिए किराए पर लेना अपराध है।
- इसमें जुर्माना या सजा दोनों हो सकते हैं।
3. चुनाव आयोग की गाइडलाइन (ECI Instructions)
भारत निर्वाचन आयोग स्पष्ट निर्देश देता है कि:
- कोई भी पार्टी या उम्मीदवार मतदाताओं के लिए ट्रांसपोर्ट सुविधा नहीं दे सकता
- केवल विकलांग (PWD) या बहुत वृद्ध मतदाताओं के लिए, वह भी चुनाव आयोग की अनुमति से, सीमित सुविधा दी जा सकती है
🚫 क्यों है यह प्रतिबंध?
- ताकि वोटर पर प्रलोभन या दबाव न पड़े
- चुनाव फ्री और फेयर (स्वतंत्र और निष्पक्ष) बने रहें
⚠️ सजा क्या हो सकती है?
- चुनाव परिणाम तक रद्द हो सकता है
- उम्मीदवार को अयोग्य घोषित किया जा सकता है
- जुर्माना या जेल भी हो सकती है
