क्यों डूब गया देश का चौथा सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक, जानें- कब शुरू हुई थी तबाही, अब आगे क्या होगा ?

इतनी तेजी से ग्रोथ करने वाला यस बैंक आज इतने गहरे संकट में फंस गया है ये बहुत बड़ी बात है. पूरा देश एक बार फिर से अपने जमा पैसों के लिए परेशान हो गया है. इतना ही नहीं हरियाणा सरकार के भी लगभग 2500 करोड़ रुपये फंस गए हैं.

yes bank crisis these reasons
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भारतीय रिजर्व बैंक ने यस बैंक के नकदी संकट को देखते हुए 3 अप्रैल तक सिर्फ 50 हजार रुपये निकालने की छूट दी है. हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक ने ये भी कहा है कि इमरजेंसी में ग्राहक 5 लाख रुपये तक की निकासी कर सकते हैं. सरकार ने भी यस बैंक के सभी ग्राहकों को भरोसा दिलाया है कि उनका पैसा डुबने नहीं दिया जाएगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि वो खुद आरबीआई के संपर्क में हैं.

वहीं देशभर में यस बैंक की शाखाओं के बाहर शुक्रवार और शनिवार को खाताधारकों की लम्बी लम्बी लाइन लगी रही. बैंक से अपने रुपये निकालने के लिए परेशान खाताधारक लाइन में लगे रहे. दूसरी परेशानी ये है की नेट बैंकिंग और एटीएम से भी पैसे नहीं निकल रहे और दूसरे बैंक के एटीएम से भी यस बैंक के कार्ड पर नकदी नहीं निकल सकी. तो वहीं ज्यादातर शाखाओं पर दोपहर बाद कैश भी खत्म हो गया.

एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने प्रेस क्रॉन्फेंस में कहा कि यस बैंक को बचाने की रणनीति सोमवार तक तैयार कर ली जाएगी. एसबीआई को आरबीआई की तरफ से यस बैंक के लिए ड्राफ्ट स्कीम मिल गई है और बैंक की लीगल टीम इस पर काम कर रही है. योजना के तहत एसबीआई 2450 करोड़ रुपए में यस बैंक के 245 करोड़ शेयर खरीद सकता है. इस निवेश पर अंतिम फैसला एसबीआई का बोर्ड करेगा.

रजनीश ने बताया कि यस बैंक को संकट से निकलने के लिए कम से कम 20,000 करोड़ रुपए की जरूरत है. कुछ दिनों में खाताधारकों की मुश्किल दूर हो जाएगी. बैंक की कोशिश है कि निवेश योजना को आरबीआई द्वारा दी गई समय सीमा से पहले ही पास करा लिया जाए.

उधर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने शनिवार को कहा कि वो यस बैंक में 2450 करोड़ रुपये का निवेश कर 245 करोड़ शेयर खरीदेगा, जिनमें से प्रत्येक की कीमत 10 रुपये होगी. यही शेयर बाद में पुनर्निर्मित बैंक में उसकी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी में बदल जाएंगे. एसबीआई ने साफ़ कहा है कि वो अपनी हिस्सेदारी 26 फीसदी से कम नहीं करेगा.

बैंक की इस दुर्दशा के पीछे बैड लोन की बड़ी भूमिका है. बैंक ने एलएंडएफएस, जेट एयरवेज, कॉक्स एंड किंग्स, सीजी पावर, दीवान हाउसिंग और कैफे कॉफी डे जैसी कई ऐसी कंपनियों को लोन दिए, जिनका वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड साफ नहीं था. इन सभी कंपनियों का एनपीए रिकॉर्ड लेवल तक पहुंच गया.

क्या आपको पता है ये वही बैंक है जिसने 2005 में 300 करोड़ रुपये के आईपीओ के साथ शेयर मार्केट में धमाल मचा दिया था. लेकिन अब ऐसा क्या हुआ की इस बैंक के इतने बुरे दिन आ गए हैं. आइये जानते हैं-

इसका सबसे बड़ा कारण था लोन देना. पिछले करीब 1 साल से बैंक लगातार घाटे में जा रहा था. क्युकी बैंक धड़ल्ले से लोन बांटने में लगा था. लेकिन यहाँ पर बैंक जो दोनों हांथों से लोन बांट रहा था उसी तेज़ी से पैसा वापस भी लाना था लेकिन ऐसा हुआ नहीं और बैंक हर दिन कमजोर होता गया. इसी वजह से आरबीआई ने बैंक के पूर्व सीईओ राणा कपूर को भी अक्टूबर 2018 में पद से हटाने का आदेश दिया था.

बड़ी बात तो ये है कि बैंक ने लोन उन लोगों को भी दे दिया जो लौटाने के काबिल ही नहीं थे. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार बैंक ने रिश्तों के आधार पर लोन बांटे थे. यस बैंक ने हमेशा ऐसे कर्जदारों को लोन दिया जिनसे पैसे की वापसी हो पाना बहुत ही मुश्किल था. लेकिन बैंक ने अपनी नीतियों को दरकिनार कर हमेशा ग्राहक के साथ आपसी रिश्ता सुधारने के लिए लोन बांटे.

यस बैंक के ग्राहकों की लिस्ट में रीटेल से ज्यादा कॉरपोरेट ग्राहक हैं. यस बैंक ने जिन कंपनियों को लोन दिया, उनमें अधिकतर कंपनियां घाटे में हैं. कई कंपनियां दिवालिया होने की कगार पर हैं, लिहाजा अब इन सबसे लोन वापस मिलने की गुंजाइश कम है. जब ये कंपनियां डूबने लगीं तो यस बैंक की हालत भी पतली होने लगी. इसके बाद QIBs के जरिए फंड जुटाने के लक्ष्य तक बैंक नहीं पहुंच पाया। अगस्त 2019 में मूडीज ने यस बैंक की रेटिंग घटा दी. आज हालत ये हो गई है कि जहाँ अगस्त 2018 में बैंक के शेयर का प्राइस करीब 400 रुपये था, वो अब नकदी की कमी के चलते फिलहाल 18 रुपये रुपये के आसपास है.

बतादें कि यस बैंक देश के चौथे सबसे बड़े निजी बैंक में गिना जाता था. इसकी मौजूदगी पूरे देश में है. इसका हेडक्वॉर्टर मुंबई में है. बैंक का नेटवर्क काफी बड़ा है. देशभर में इसके 1000 से ज्यादा ब्रांच हैं और 1800 ATMs हैं, यस बैंक के महिला स्पेशल ब्रांच भी हैं, जो ‘यस ग्रेस ब्रांच’ के नाम से चलाए जाते हैं. इसके अलावा, देश में 30 से ज्यादा ‘यस एसएमई ब्रांच’ भी हैं, जो SMEs को स्पेशलाइज्ड सर्विसेज मुहैया करते हैं.

इस बीच प्रवर्तन निदेशालय ने बैंक के संस्थापक और इस संकट के सामने आने से पहले बोर्ड एग्जिट कर चुके बैंक के पूर्व सीईओ राणा कपूर पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसने लगा है. कपूर के खिलाफ शुक्रवार को लुक आउट नोटिस जारी किया गया था. देर रात उनके कई ठिकानों पर ईडी की टीम ने छापेमारी की कार्रवाई को भी अंजाम दिया था. इसके बाद शनिवार को राणा कपूर मुंबई में ईडी दफ्तर पहुंचे हैं. राणा कपूर से ईडी की टीम बीते 12 घंटे से लगातार पूछताछ कर रही है.

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