क्या है ‘मिशन कर्मयोगी योजना’, कैसे मिलेगा इसका लाभ, क्या है इस मिशन का लक्ष्य, पढ़ें-

दुनिया के सबसे बड़े सिविल सेवा सुधार को सरकार ने हरी झंडी दे दी है. इस बारे में पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि ‘मिशन कर्मयोगी’ से सरकारी ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट प्रैक्टिस में मौलिक सुधार होगा.

world largest civil service reform in india mission karmayogi
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राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास के कार्यक्रम को ‘मिशन कर्मयोगी’ नाम दिया गया है. इन सुधारों से सिविल सेवा कर्मचारियों को अपनी क्षमता के सतत विकास का मौका मिलेगा और सरकार को बदली जरूरत के मुताबिक जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी मिल सकेंगे. ये बेहत ही महत्वपूर्ण सुधार है. 21वीं सदी का सरकार के मानव संसाधन के सुधार का ये बहुत बड़ा कदम कहलाया जाएगा. लोगों की अपेक्षाओं पर खरे उतरने वाले अधिकारी तैयार करना इसका मूल मकसद है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना के उद्देश्यों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ये सिविल सेवा से जुड़े अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे के पैमाने और स्थिति का उपयोग करेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण मंच (आईजीओटी) मानव संसाधन प्रबंधन और निरंतर सीखने में मदद करेगा.

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में ‘प्रधानमंत्री मानव संसाधन परिषद’ होगी जो पूरे मिशन के क्रियान्वयन की निगरानी करेगी. प्रधानमंत्री के अलावा कुछ केंद्रीय मंत्री, कुछ मुख्यमंत्री और देश-विदेश के विशेषज्ञ इस परिषद के सदस्य होंगे. प्रधानमंत्री मानव संसाधन परिषद’ की सहायता के लिए एक ‘क्षमता विकास आयोग’ का गठन किया जाएगा. ये आयोग कर्मचारियों की क्षमता विकास के लिए सालाना योजना बनाने का काम करेगा. विभिन्न विभागों के अलग-अलग चल रहे ट्रेनिंग सेंटरों की निगरानी भी इसी आयोग के पास होगी.

देश के दो करोड़ से अधिक सिविल सेवा कर्मियों को ऑनलाइन ट्रेनिंग की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विशेष एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण प्लेटफार्म को तैयार किया जाएगा. ‘आइगॉट-कर्मयोगी’ के नाम से इस प्लेटफार्म पर देश-दुनिया की बेहतरीन प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध होगी. कर्मचारी इस प्लेटफार्म पर अपनी इच्छानुसार प्रशिक्षण सामग्री चुनकर अपनी क्षमता का विकास कर सकते हैं.

इस कार्यक्रम को लोक सेवकों के लिए क्षमता विकास के लिए आधारशिला रखने हेतु बनाया गया है ताकि वे भारतीय संस्कृति और संवेदनाओं से सराबोर रहें और विश्व भर की श्रेष्ठ पद्धतियों से सीखते हुए अपनी जड़ों से जुड़े रहें. इस पूरे प्लेटफार्म को चलाने का काम एक कंपनी करेगी जिसे ‘विशेष प्रयोजन व्हीकल’ (एसपीवी) कहा गया है. गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में काम करने वाली एसपीवी कौशल विकास का प्रशिक्षण देने के लिए 432 रुपये सालाना की मामूली फीस भी लेगी. विभिन्न विभाग खुद ही अपने कर्मचारियों के कौशल विकास के लिए फीस दे सकते हैं. वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच पांच साल में इस मिशन के तहत केंद्र के 46 लाख कर्मचारियों को कवर करने के लिए 510 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

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