वर्ल्ड कैंसर डे: “मैं हूं और मैं रहूंगा”, कैंसर से हर साल मरते हैं 96 लाख लोग

विश्व कैंसर दिवस हर साल 4 फरवरी को आयोजित किया जाता है, ताकि दुनिया भर में कैंसर को लेकर जागरुकता फैलाई जा सके. इस साल का थीम ‘I am and I will’ है. मतलब “मैं हूं और मैं रहूंगा”

world cancer day 2020 symptoms and treatment
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कैंसर के प्रति जागरुकता और इस बीमारी से बचाव के उद्देश्य से दुनियाभर के सारे देश विश्व कैंसर दिवस मनाते हैं. इस मौके पर आपको बता दें कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के मामले में भारत तीसरे नंबर है. चीन और अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा मामले यहीं देखने को मिलते हैं.

सभी जानलेवा बीमारियों में कैंसर सबसे ख़तरनाक होता है क्योंकि कई बार इसके लक्षणों का पता ही नहीं चलता और जब इस बिमारी के होने का खुलासा होता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है और कैंसर पूरे शरीर में फैल चुका होता है. जिससे कई लोगों को सही इलाज नहीं मिल पाता और उनकी मौत हो जाती है.

दुनिया में सबसे ज्यादा मौतें फेफड़े के कैंसर से होती हैं. भारत में भी फेफड़े का कैंसर एक ऐसा कैंसर है जो पुरुषों को सबसे ज्यादा होता है और कई बार आखिरी स्टेज में इसके लक्षणों की पहचान हो पाती है.

दुनिया भर में करीब 96 लाख लोगों की मौत कैंसर की वजह से होती है. इनमें 70 फीसदी मौतें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं. भारत में हर साल एक लाख से अधिक नए कैंसर के मामले सामने आते हैं. उनमें से ज्यादातर लोगों की मौत बीमारी की अनदेखी के कारण होती है.

फेफड़े के कैंसर के कई कारण है जिनमें सिगरेट और तंबाकू का सेवन सबसे आम है. सिगरेट के धुएं में चार हजार से ज्यादा रसायन होते हैं जिसकी वजह से फेफड़े के कैंसर का जोखिम बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. शोधों में यह बात सामने आई है कि अगर कोई व्यक्ति एक दिन में एक पैकेट सिगरेट पीता है तो उसे फेफड़े के कैंसर का जोखिम 20 से 25 फीसदी बढ़ जाता है.

बॉलीवुड की कई हस्तियां हैं, जिन्होंने कैंसर से जंग लड़ी हैं और जीती भी है. इनमें बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे , मनीषा कोइराला और लीसा रे के नाम प्रमुखता से आते हैं. कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो तेजी से महिलाओं को अपनी चपेट में ले रही है. महिलाओं में स्तन कैंसर का जोखिम सबसे ज्यादा बढ़ रहा है. स्तन कैंसर के प्रति जागरुकता न होने की वजह से भी ये बीमारी दिन प्रतिदिन फैलती जा रही है.

ब्लड कैंसर को ल्यूकेमिया कैंसर भी कहते हैं. ये बच्चों में होने वाला सबसे आम कैंसर है. आमतौर पर ये कैंसर दो से चार साल की उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में लेता है. ल्यूकेमिया बोनमैरो यानी अस्थिमज्जा का कैंसर है. ल्यूकेमिया कैंसर के लक्षण हैं, हड्डी और जोड़ों में दर्द थकान, कमजोरी, रक्तस्राव, लंबे समय तक बुखार और वजन कम होना इसके प्रमुख लक्षण हैं.

विश्व कैंसर दिवस की स्थापना अंतरराष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ (UICC) ने की थी. ये एक अग्रणीय वैश्विक एनजीओ है. जिसकी स्थापना साल 1933 में हुई थी.

लोगों को जागरुक करने के लिए इस दिन पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं कि कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को अलग से उपचारित न किया जाए, उन्हें समाज में एक आम इंसान की तरह जीने का अधिकार होना चाहिए.

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