शीतकालीन सत्र: कुएं में न जाकर भी जनता का दिल जीत सकते हैं, ये BJD और NCP से सीखना चाहिए: PM मोदी

संसद का शीतकालीन सत्र आज सोमवार से शुरू हो गया है. सबसे पहले लोकसभा और राज्यसभा में सुषमा स्वराज और अरुण जेटली समेत दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि दी गई. उसके बाद तर्क वितर्क शुरू हुआ.

winter session of parliament start today pm modi address rajya sabha
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राज्यसभा के 250वें सत्र के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा के सदस्यों को संबोधित करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और बीजू जनता दल की तारीफ की और कहा कि एनसीपी और बीजेडी दो दल ऐसे हैं जिन्होंने खुद में ये अनुशासन तय किया है कि विरोध के वेल में नहीं जाएंगे. ऐसा करने से न तो हमारी राजनीति में कमी आई और न ही एनसीपी की. हमें और तमाम पार्टियों को बीजेडी और एनसीपी से सीखना चाहिए कि कुएं में न जाकर भी जनता का दिल जीता जा सकता है.

पीएम मोदी ने आगे कहा- चर्चा चल रही थी कि सदन एक हो या दो हो. लेकिन, संविधान निर्माताओं ने जो व्यवस्था दी है..वो बेहद उपयुक्त है. निचला सदन जमीन से जुड़ा हुआ है, तो ऊंचा सदन दूर तक देख सकता है. निचले सदन में भारत की जमीनी स्थिति का प्रतिबिम्ब होता है, तो यहां पर दूरदृष्टि का पता चलता है. इस सदन ने कई ऐतिहासिक पल देखे हैं. इतिहास बनाया भी है. जरूरत पड़ने पर इतिहास को मोड़ने का भी काम किया है.

उन्होंने कहा- राज्य सभा के 250वें सत्र के दौरान मैं यहां उपस्थित सभी सांसदों को बधाई देता हूं. 250 सत्रों की ये जो यात्रा चली है, उसमें जिन-जिन सांसदों ने योगदान दिया है वो सभी अभिनंदन के अधिकारी हैं. मैं उनका आदरपूर्वक स्मरण करता हूं. ये सदन भारत की विकास यात्रा का प्रतिबिंब है. स्‍थायित्‍व और विविधता इस सदन का प्रतीक है. लोकसभा भंग होती है लेकिन राज्यसभा कभी भंग नहीं होती है.

भारत की अनेकता में एकता का जो सूत्र है, उसकी सबसे बड़ी ताकत सदन में नजर आती है. हर किसी के लिए चुनावी अखाड़ा पार करना इतना आसान नहीं होता है, लेकिन देश में उन लोगों की उपयोगिता कभी कम नहीं होती है. उनका अनुभव और सामर्थ्य कम नहीं होता है. उनका लाभ देश के राजनीतिक जीवन, नीतिनिर्धारण में मिलता है.

वहीं लोकसभा में कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि 108 दिनों से फारुख अब्‍दुल्‍ला जी को हिरासत में रखा गया है. ये जुल्‍म हो रहा है. हम चाहते हैं कि उन्‍हें संसद में बुलाया जाए. ये उनका संवैधानिक अधिकार है. हम उम्मीद करते हैं कि प्रधानमंत्री और सत्तासीन भाजपा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को चर्चा के लिए आगे बढ़ाएंगे. संसद चर्चा, वाद-विवाद और बातचीत के लिए ही बनी है. ये सरकार पर निर्भर करता है कि वे सदन को सुचारू रूप से चलाएं, ताकि विपक्षी पार्टियां अपने विचार और राय सही ढंग से रख सकें.

शिवसेना सांसदों ने महाराष्ट्र में बेमौसम हुई बारिश को प्राकृतिक आपदा घोषित करने की मांग की और संसद भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया. इसके साथ ही भारी बारिश के कारण फसलों को हुए नुकसान पर लोकसभा में कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस भी दिया है.

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