गंगाजल से कैसे बनता है फांसी का फंदा ? कहाँ बनता है, कैसे बनता है, कौन बनाता है ? पढ़ें पूरी जानकारी

क्या आप जानते हैं कि फांसी देने वाली रस्सी कहाँ कैसे और कौन बनाता है ? ये कोई आम रस्सी नहीं होती है. इसको बड़े ही अनोखे तरह से तैयार किया जाता है. आइये जानते हैं कुछ ख़ास बात-

why only buxar central jail rope
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कहाँ बनता है फांसी का फंदा ?

पूरे देश में एक ही ऐसी जगह है जहाँ ये फांसी का फंदा तैयार किया जाता है और वो है बिहार के बक्सर का सेन्ट्रल जेल. इस जेल में फांसी देने वाली रस्सी को ब्रिटिशकाल से ही बनाया जा रहा है. इस जेल में अंग्रेजी शासनकाल में एक मशीन बनाई गई थी. उसी मशीन की मदद से फांसी का फंदा तैयार किया जाता है. जिससे कैदियों को फांसी दी जाती है. ऐसा कहा जाता है कि बक्सर जेल में बनी रस्सी से जब भी फांसी दी गई तो वो कभी फेल नहीं हुई. इसे मनीला रोप या मनीला रस्सी भी कहते हैं, इससे मजबूत कोई रस्सी नहीं होती. इसीलिए पुलों को बनाने, भारी बोझों को ढोने और भारी वजन को लटकाने आदि में इसी का इस्तेमाल किया जाता है.

कौन सा धागा होता है इस्तेमाल ?

एक फांसी का फंदा बनाने में लगभग दो से तीन दिनों का वक्त लगता है. और सबसे बड़ी बात कि ये फंदे जेल के कैदी ही बनाते हैं. इसको बनाने में खासी मेहनत भी लगती है. इस कार्य में लगभग 5-6 लोग तो लग ही जाते हैं. आम तौर पर कोई भी कपड़ा बनता है तो हर एक सूत धागे का अपना एक नंबर होता है. उसी तरह फांसी का फंदा बनाने के लिए जे-34 धागे का इस्तेमाल किया जाता है. एक फांसी के फंदे में 72 धागे होते हैं. वो इसलिए भी ताकि एक-दो धागे टूट भी गए तो कोई फर्क नहीं पड़ता है. जे-34 कॉटन यार्न खासतौर पर भटिंडा पंजाब से मंगाया जाता था लेकिन अब इसे गया या पटना से ही प्राइवेट एजेसियां सप्लाई करती हैं.

कैसे होती है तैयार-

इस फंदे को एक मशीन के जरिये तैयार किया जाता है. जिसमें एक फ्रेम होता है. उसमें 154 की रील चढ़ाई जाती हैं. इसमें एक थ्रेड डबल धागों का बना हुआ होता है. 154 की एक लट होती है जिसमें धागों की संख्या 308 होती है. इस तरह की 6 लटें होती हैं. इन 6 लटों को मिलाकर कुल 1800 धागे होते हैं. फिर इन लटों को चाक के जरिए घुमाया जाता है. और मशीन से दूर खड़े कुछ कैदी इसे लोहे की रॉड पर लगे पीतल के एक बुश में फंसा देते हैं. इन लटों को कसते हुए शुरुआत में 56 फीट की लंबाई ली जाती है. और कसते कसते इसकी लम्बाई 16 फीट तक ले आते हैं. इसी तरह से रस्सी तैयार हो जाती है.

फंदा बनाने के बाद क्या किया जाता है-

अब जानते हैं कि फांसी का फंदा बनाने के बाद क्या करते हैं. तो फांसी का फंदा तैयार होने के बाद इसमें वैक्स लगाई जाती है. क्रैम नाम का एक पाउडर भी होता है, जिसे फिसलन के लिए लगाया जाता है. वहीं फांसी दिए जाने से एक-दो दिन पहले इसपर पके हुए केले भी रगड़ते हैं जिससे फंदा नरम हो जाए.

गंगा जल का क्या है महत्व-

बड़ी बात ये है कि बक्सर सेन्ट्रल जेल गंगा नदी के किनारे होने का भी एक बड़ा महत्व है. जो फांसी का फंदा बनाने में ज्यादा कारगर साबित होता है. दरअसल फंदा बनाने के दौरान नमी की बहुत जरूरत होती है, जिससे रस्सी मुलायम और मजबूत होती है. गंगा के पानी को बॉयलर में गर्म करके नमी पहुंचाई जाती है, जहां धागे बनाये जाते हैं.

हर जगह जाती है बक्सर जेल की रस्सी

बतादें कि अबतक देश में जहां भी फांसी हुई है, वहां फांसी का फंदा बनाने के लिए बक्सर जेल से ही रस्सी गई है. फिर चाहे वो अजमल कसाब को पुणे जेल में दी गई फांसी हो या फिर 2004 में कोलकाता में धनजंय चटर्जी को दी गई फांसी हो. अफजल गुरु को भी फांसी बक्सर जेल की ही रस्सी से दी गई थी.

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