धनतेरस क्यों मनाते हैं ? घर के आंगन में दिया जलाने का महत्व, इस दिन क्या खरीदें-

दीपावली के दो दिन पहले धनतेरस मनाया जाता है. जिसमें लोग खूब सामान खरीदते हैं. पर धनतेरस क्यों मनाते हैं ये पता है आपको ? कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है.

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बर्तन खरीदने की परम्परा-

भगवान धन्वन्तरि का जब जन्म हुआ था तो उनके हाथो में अमृत से भरा एक कलश था. इसलिए इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा शुरू हो गई. इसके साथ ही धन्वन्तरि देवताओं के चिकित्सक भी हैं और धन्वन्तरि चिकित्सा के देवता माने जाते हैं इसलिए चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्व पूर्ण होता है.

धनतेरस के दिन क्यों जलाते हैं दिया ?

धनतेरस के दिन लोग अपने घर के बाहर और घर के आंगन में दिया जलाते हैं. लेकिन ज्यादातर लोगों को इसके बारे में पता नहीं होगा की दिया जलाया किस लिए जाता है. आपको बता दें की धनतेरस के दिन दिया जताने की परंपरा बरसों पुरानी है. धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज की भी पूजा की जाती है. और इसके पीछे एक सत्य घटना है.

किसी समय में एक राजा हुआ करते थे जिनका नाम हेम था. कई तपस्या करने के बाद उन्हें दैव कृपा से पुत्र की प्राप्ति हुई. जिसके बाद राजा हेम में ज्योंतिषियों से अपने बालक की कुण्डली बनवाई तो ज्योंतिषियों ने राजा को बताया कि आपके बालक का विवाह जिस दिन भी होगा उसके ठीक चार दिन के बाद उसकी मौत हो जाएगी. इसको कोई बदल नहीं सकता. राजा इस बात को सुनते ही बहुत दुखी हो गया. राजा ने अपने बेटे राजकुमार को एक ऐसी जगह पर भेज दिया जहां किसी स्त्री की परछाई भी न पड़े. पर विधी के विधान को कोई नहीं बदल सकता. दैवयोग से एक दिन एक राजकुमारी जंगल से गुजर रही थी. तभी राजा हेम के बेटे की नज़र उस राजकुमारी पर पड़ गई. दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो गये और उन्होंने गन्धर्व विवाह कर लिया.

जैसे ही विवाह हुआ उसके बाद विधि का विधान सामने आया. विवाह के ठीक चार दिन बाद यमदूत उस राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचे. जब यमदूत राजकुमार के प्राण ले जाने लगे तो उसकी पत्नी ये सब देख कर रोने लगी. राजकुमारी के विलाप को सुनकर यमदूतों का हृदय भी पिघल गया परंतु विधि के अनुसार उन्हें अपना कार्य करना पड़ा. यमराज के पास पहुँच कर एक दूत ने यम देवता से पूछ लिया की हे यमराज क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मनुष्य की अकाल मृत्यु न हो ? जिसका उत्तर देते हुए यम देवता बोले हे दूत अकाल मृत्यु तो कर्म की गति है इससे मुक्ति का सिर्फ एक ही उपाय है. मैं तुम्हें बता रहा हूं सुनो. कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी रात यानी धनतेरस के दिन जो मनुष्य मेरे नाम से पूजन करके दीप माला दक्षिण दिशा की ओर भेट करेगा उसकी अकाल मृत्यु नहीं होगी.

भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा-

भगवान धन्वन्तरि और यमराज के साथ ही धनतेरस के दिन धन के देवता भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है. मान्यता है कि धनतेरस के दिन क्षीर सागर के मंथन के दौरान ही मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर प्रकट हुए थे. इसीलिए धनतेरस के दिन सोने-चांदी और बरतन खरीदना शुभ माना जाता है.

धनतेरस के दिन क्या खरीदें ?

1. धनतेरस के दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है. धन्‍वंतरि देवता को पीतल भी बहुत प्रिय थी, आप चाहे तो पीतल के बर्तन खरीद सकते हैं.
2. भगवान कुबेर को चांदी बहुत पसंद है. धनतेरस के दिन चांदी के बर्तन या जेवर या फिर सिक्का खरीद सकते हैं.
3. माता लक्ष्मी को कौड़ियां, यंत्र और धनिया बहुत प्रिय है. इसीलिए धनतेरस के दिन कौड़ियां खरीदें और दिवाली के दिन इनकी पूजा करके अपनी तिजोरी में रखें.
4. इस दिन झाड़ू खरीदना भी शुभ माना जाता है.
5. इस दिन दिवाली के दिन पूजी जाने वाली लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, खील-बताशे और मिट्टी के दीपक खरीदना अच्छा माना जाता है.
6. इस दिन आप अपनी जरुरत के सामान जैसे फ्रिज, फर्नीचर, वॉशिंग मशीन और मिक्सर आदि भी खरीद सकते हैं.

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