पैगम्बर मोहम्मद के पास उड़ने वाले घोड़े क्यों थे ? नूपुर शर्मा के मजाक की सच्ची कहानी

PRAGYA KA PANNA
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पैगम्मबर मोहम्मद की जिन बातों को लेकर बीजेपी की प्रवक्ता रहीं नूपुर शर्मा ने मजाक उड़ाया था..हम उन बातों के पीछे की सच्चाई जानने की एक सीरीज कर रहे हैं..उसी सीरिज के तीसरे वीडियों में आज बात होगी नूपुर शर्मा के मजाक में जिक्र किए गए सफेद घोड़ों (Why did the Prophet Muhammad have Flying horses) की..

पैगम्बर मोहम्मद और सफेद घोड़ों की क्या कहानी है..क्या वो वाकई सफेद घोड़े (Why did the Prophet Muhammad have Flying horses) ही थे..सफेद घोड़ों का इस्तेमाल क्या था..सफेद घोड़े या घोड़ों जैसी चीज क्या थे..घोड़े ज्यादा संख्या में थे..या एक था..या घोड़ा सिर्फ कहने के लिए थे..वाकई में वो कोई शक्ति थी..आज पैगम्बर मोहम्मद की सीरीज में सरल भाषा में इन्हीं पर बात करेंगे..

दोस्तों बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने जिन सफेद घोड़ों का जिक्र मजाकिया लहजे में किया था..दरअसल उसको इस्लाम के मानने वाले बुर्राख कहते हैं..इस्लाम धर्म में बुर्राख को घोड़े से छोटा..और खच्चर से बड़ा..एक ऐसा जीव बताया गया है जो चमत्कारी था..जो बिजली की रफ्तार से उड़ (Why did the Prophet Muhammad have Flying horses) सकता था..जिस पर बैठकर मोहम्मद साहब ने इसरा और मेराज की यात्राएं की थीं..इसरा और मेराज मोहम्मद साहब की दो यात्राएं हैं..

लोगों ने इसे आम तौर पर मेराज नाम से ही याद कर लिया है..इसरा कहते हैं रात के एक भाग को..इसरा की कहानी ये है कि बुर्राख पर बैठकर मोहम्मद साहब (Why did the Prophet Muhammad have Flying horses) ने मक्का की मस्जिद और फिलिस्तीन की मस्जिदे अक्सा तक की 40 दिन की यात्रा मात्र रात के एक हिस्से में ही कर ली थी..यात्रा के इस पार्ट को इस्लाम में इसरा कहा गया..

यात्रा के दूसरे भाग को मेराज कहा गया..मेराज का मतलब होता है चढ़ना..आप सीढ़ी भी बोल सकते हैं..यात्रा का दूसरा पार्ट वहां से शुरू होता है..जब मोहम्मद साहब मस्जिदे अक्सा (Why did the Prophet Muhammad have Flying horses) यानी फिलस्तीन में थे..और उनको वहीं से 7 आसमानों की तरफ ले जाया गया था..आसमानी यात्रा के इस दूसरे भाग को इस्लाम में मेराज कहा जाता है..हदीसों में और सूरा नज्म में इसका वर्णन मिलता है…

इसरा और मेराज की ये घटनाएं इस्लाम धर्म में चमत्कार मानी गई हैं..चालीस दिन की यात्रा रात के एक थोड़े भाग में कर लेना किसी इंसान के वश की बात नहीं..उसी तरह रात के उसी भाग में आसमानों की सैर कर लेना भी एक अनहोनी सी घटना है..लेकिन कहते हैं जो इंसान की सोच से परे होता है..भगवान के लिए ईश्वर के लिए अल्लाह के लिए वो चुटकी का खेल (Why did the Prophet Muhammad have Flying horses) होता है..इस तरह की घटनाओं को इस्लाम में मोजज़ा अर्थात् चमत्कार कहा जाता है..

दोस्तों हर धर्म में ईश्वर में दैवीय शक्तियां बताई गई हैं..जैसे मुल्लिम धर्म में बुर्राख की कहानी है..वैसे ही हिंदू धर्म में गणेश जी की सवारी मूशक..शेरों वाली माता की सवारी..शेर है..रावण के पास मन की गति से चलने वाला पुष्पक (Why did the Prophet Muhammad have Flying horses) विमान था..ईसा मसीह के बारे में कहा जाता है कि वो छूकर दीन दुखियों को ठीक कर देते थे..हमारे हिंदू धर्म में शिव सबसे सुपीरियर ईष्ट हैं..देवाधिदेव हैं..महादेव हैं..यानी देवी देवताओं में सबसे बड़े हैं..तो हर धर्म में ईश्वर की अलग अलग शक्तियां बताई हैं..

हर धर्म अपने अपने रिचवल्स के हिसाब से अपनी मान्यताओं के हिसाब से अपने पूर्वजों..वेदे पुराणों..धर्म शास्त्रों के मुताबिक मान्यताओं का पालन करते हैं..तो अगर इस्लामी शास्त्रों में पैगम्मबर मोहम्मद के बुर्राख (Why did the Prophet Muhammad have Flying horses) का जिक्र है..उड़ने वाले घोड़े जैसी किसी शक्ति का जिक्र है..तो मजाक उड़ाने जैसी कोई बात नहीं होनी चाहिए..गॉड के पास सुपर वापर रहा होगा तभी इंसान ने उन्हें भगवान माना होगा..इंसानी जाति चमत्कार को ही नमस्कार करती है..

इन वीडियोज के पीछे मेरी मंशा मेरी कोशिश यही है..कि मेरे हिंदू समाज के लोग और मुस्लिम समाज के लोग एक दूसरे के देवताओं के बारे में कमेंटबाजी ना करें..जानकारी करें..चमत्कार लगे तो नमस्कार करें ना लगे तो कोई बात नहीं..सबके धर्मों का आदर करें..तो पैगम्बर मोहम्मद साहब (Why did the Prophet Muhammad have Flying horses) की सारीज का ये आखिरी विडियो है तो पैगम्बर मोहम्मद के बारे में बहुत शॉर्ट में कुछ और चीजें मेरी टीम ने रिसर्च करके निकाली हैं..वो भी जान लीजिए..

दोस्तों पैगंबर मोहम्मद का जन्म अरब के रेगिस्तान के शहर मक्का में 570 ईस्वी में हुआ था. पैगंबर साहब के जन्म से पहले ही उनके पिता का निधन हो चुका था. जब वो 6 वर्ष के थे तो उनकी मां की भी मृत्यु हो गई थी. मां के निधन के बाद पैगंबर मोहम्मद अपने चाचा अबू तालिब और दादा अबू मुतालिब के साथ रहने लगे. इनके पिता का नाम हजरत अब्दुल्लाह और माता का नाम हजरत बीबी आमिना था.

पैगंबर मोहम्मद की पत्नी हजरत (Why did the Prophet Muhammad have Flying horses) आयशा के मुताबिक, पैगंबर मोहम्मद घर के कामों में भी मदद करते थे. घर के काम करने के बाद वो प्रार्थना के लिए बाहर जाते थे. कहा जाता है कि वो बकरियों का दूध भी दुहते थे और अपने कपड़े भी खुद धुलते थे. पैगंबर मोहम्मद मूर्ति पूजा या किसी भी चित्र की पूजा के खिलाफ थे. यही वजह है कि उनकी कहीं भी तस्वीर या मूर्ति नहीं मिलती है. इस्लाम में मूर्ति पूजन की मनाही है.

पैगंबर मोहम्मद इस्लाम के सबसे महान नबी और आखिरी पैगंबर हैं. कुरान के मुताबिक, एक रात जब वो पर्वत की एक गुफा में ध्यान कर रहे थे तो फरिश्ते जिब्राइल आए और उन्हें कुरान की शिक्षा दी. जिब्राइल के अल्लाह के नाम का जिक्र करते ही मोहम्मद ने संदेश पढ़ना शुरू कर दिया. अल्लाह का संदेश मानकर पैगंबर मोहम्मद (Why did the Prophet Muhammad have Flying horses) जिंदगी भर इसे दोहराते रहे. उनके शब्दों को याद कर लिया गया और संग्रहित कर लिया गया.

पैगंबर मोहम्मद का विश्वास था कि अल्लाह ने उन्हें अपना संदेशवाहक चुना है इसलिए वो दूसरों को भी अल्लाह का संदेश देने लगे..मोहम्मद साहब की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि मक्का में प्रभावशाली लोगों को खतरा महसूस होने लग गया. 622ईसवीमें मोहम्मद साहब (Why did the Prophet Muhammad have Flying horses) को अपने अनुयायियों के साथ मक्का से मदीना कूच करना पड़ा. उनके इस सफर को हिजरत कहा गया. इसी साल इस्लामिक कैलेंडर हिजरी की भी शुरुआत हुई.

मदीना के लोग आपसी लड़ाइयों से परेशान थे और मोहम्मद साहब (Why did the Prophet Muhammad have Flying horses) के संदेशों ने उन्हें वहां बहुत लोकप्रिय बना दिया.कुछ ही सालों में पैगंबर मोहम्मद के बड़ी संख्या में अनुयायी हो चुके थे और तब उन्होंने मक्का लौटकर विजय हासिल की. मक्का में स्थित काबा को इस्लाम का पवित्र स्थल घोषित किया.632 ईसवीमें हजरत मुहम्मद साहब का देहांत हो गया पर उनकी मृत्यु तक लगभग पूरा अरब इस्लाम कबूल कर चुका था..तो ये थी पैगम्बर मोहम्मद साहब से जुड़ी कुछ बातें..वक्त की मांग थी कि इन बातों को समाज के सामने आसान भाषा में रखा जाए..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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