हमास कौन है ? जिसनें इज़रायल की नींद उड़ा दी, इसका मकसद क्या है ?

इज़राइल और हमास के बीच कई दिनों से युद्ध चल रहा है. इसमें कई मासूम मारे जा चुके हैं. बड़ी बड़ी बिल्डिंग तहस नहस कर दी गईं. लेकिन क्या आप जानते हैं की इज़राइल की नींदें उड़ाने वाला हमास आखिर है क्या ? इसका क्या उद्देश्य है ? तो आइये जानते हैं.

इस्लामी चरमपंथी संगठन है हमास

हमास फ़िलिस्तीन क्षेत्र का सबसे प्रमुख इस्लामी चरमपंथी संगठन है. इस संगठन का गठन 1987 के जनआंदोलन के दौरान मिस्र और फ़िलिस्तीन के मुसलमानों ने मिलकर किया था जिसका उद्धेश्य था कि फ़िलिस्तीन क्षेत्र में इज़राइल प्रशासन को हटा कर वहां इस्लामिक शासन की स्थापना करना. उसके बाद से ही हमास फ़िलिस्तीन क्षेत्रों से इज़राइल सेना को हटाने के लिए संघर्ष कर रहा है.

हमास का क्या है लक्ष्य

हमास इज़राइल को मान्यता नहीं देता और पूरे फ़लस्तीनी क्षेत्र में इस्लामी राष्ट्र की स्थापना करना चाहता है. हमास का पूरा नाम है, हरकत अल-मुक़ावमा अल-इस्लामिया है. हमास का लक्ष्य था वेस्ट बैंक, गाज़ा और पूर्वी जेरुसलम को इज़रायली कब्ज़े से मुक्त करवाना. इस विरोध की पहली वजह बनी गाज़ा चेकपोस्ट पर हुई एक घटना. यहां फ़िलिस्तीनियों का एक ग्रुप प्रदर्शन कर रहा था. तभी इज़रायली सैनिकों ने उनपर गोली चला दी. इसमें चार फ़िलिस्तीनी मारे गए. इसके बाद पूरे फ़िलिस्तीन में प्रदर्शन शुरू हो गया.

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1993 में हुआ ओस्लो अग्रीमेंट

दोनों के बीच इस विवाद को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय देशों ने भी काफी प्रयास किये. कई बातचीत भी हुईं इसके बाद 1993 दोनों के बीच ओस्लो अग्रीमेंट हुआ. इसमें दो बड़ी चीजें थीं- पहला की फ़िलिस्तीनी नेतृत्व की ओर से इज़रायल को मान्यता दे दी गई. और दूसरा, गाज़ा और वेस्ट बैंक में स्व-शासन के लिए फिलिस्तीनियों की अंतरिम सरकार पर समझौता.

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हमास ने किया पहला सुसाइड अटैक

हमास पहले से ही इस समझौते का विरोध कर रहा था. और ओस्लो समझौते पर हस्ताक्षर होने के पांच महीने पहले अप्रैल 1993 में ही हमास ने इज़रायल के खिलाफ़ अपना पहला सुसाइड अटैक कर दिया. इस अटैक के बाद से हमास फ़िलिस्तीनी रेज़िस्टेंस का सबसे बड़ा चेहरा बन गया. फिर 1994 में ओस्लो अकॉर्ड्स के मुताबिक, गाज़ा और वेस्ट बैंक के एडमिनिस्ट्रेशन के लिए PA, यानी ‘फिलिस्तीनियन अथॉरिटी’ का गठन हुआ.

ईरान से होने लगी फंडिंग

मगर हमास ने इज़राइल पर अपने आत्मघाती हमले जारी रखे. कभी बस में, कभी कार में, कभी बाज़ारों में, हमास ने कई सुसाइड अटैक्स किए. जिसके बाद 1997 में अमेरिका ने हमास को आतंकवादी संगठन का दर्जा दिया. इज़रायल ने भी हमास को एलिमिनेट करने की बहुत कोशिश की. लेकिन हमास का प्रभाव कम नहीं कर पाया और हमास की ताकत बढ़ती गई. उसे ईरान जैसे इज़रायल विरोधी देशों से फंडिंग मिलने लगी.

गाज़ा पर हुआ हमास का दबदबा

अप्रैल 2001 में हमास ने इज़रायल पर पहला रॉकेट अटैक किया. इज़रायल ने भी हिंसा में कमी नहीं रखी. दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे की नागरिक आबादी को जमकर निशाना बनाया. 2006 में PA की सीटों के लिए चुनाव हुए. इसमें हमास को बहुमत मिल गया. इस जीत के बाद वेस्ट बैंक और गाज़ा, दोनों के अडमिनिस्ट्रेशन में अब हमास का दबदबा हो गया.

फ़ताह किसी कीमत पर वेस्ट बैंक का कंट्रोल नहीं खोना चाहता था. उसने हमास को कई बार साइड लगाने की कोशिश की. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और इसका नतीज़ा हुआ बंटवारा. वेस्ट बैंक पर PA का कंट्रोल हो गया और गाज़ा का डी-फैक्टो रूलर हमास का हो गया. इस फूट का इज़रायल ने ख़ूब फ़ायदा उठाया है. उसने शांति वार्ता करने से इनकार कर दिया. कहा, जब तक हमास से गाज़ा की कमान नहीं छीनी जाती, तब तक बातचीत संभव नहीं.

हमास को ख़त्म करने का हो रहा प्रयास

हमास को पूरी फ़िलिस्तीनी आबादी का प्रतिनिधि कहलाने के लिए उसे वेस्ट बैंक का भी कंट्रोल चाहिए था. लेकिन उसे ये कंट्रोल मिल नहीं पा रहा है. यहां PA और इज़रायल, दोनों साथ मिलकर उसे कुचलने में लगे रहते हैं. हमास ने ईरान से कई रॉकेट ली हैं जिसमें 16 किमी की रेंज के साथ छोटी दूरी स्वनिर्मित कासम रॉकेट शामिल हैं, इसमें ग्रेड-प्रकार के रॉकेट (2009 तक 21 किमी) और लम्बी दूरी के (40 किमी) बेरोकटोक रॉकेट का उपयोग कर रहा है. हमास की इन रॉकेटों ने इज़राइल के प्रमुख शहरों जैसे बीयर शेवा और एशदोड तक पहुँच कर हानि पहुंचाई है. और कुछ ऐसे हैं जो तेल अवीव और हाइफा जैसे शहरों को मार चुके हैं.

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