कोरोना होने पर कब कौन सा टेस्ट कराना चाहिए और क्यों ? पढ़िये पूरा विश्लेषण-

देश में कोरोना वायरस का संकट अभी भी बरकरार है. हालांकि कई राज्यों में अब नए मरीजों में कमी देखी जा रही है लेकिन लापरवाही बिलकुल भी नहीं चलेगी. क्योंकि ये आपके लिए बड़ा खतरा बन सकता है. इसलिए आज हम आपको कोरोना के समय कौन कौन की जाँच और कब करानी चाहिए इस बारे में पूरी जानकारी देंगे. तो आइये समझते हैं.

कोरोना होने पर कई टेस्ट कराने जरुरी है

कोरोना के वक्त समय पर ध्यान ना देने की वजह से भी मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है. ऐसे में कोरोना होने के 14 दिन तक कई बातों का ध्यान रखना चाहिए और उसमें समय समय पर बॉडी के कई टेस्ट करवाना भी शामिल है. जिसमें सीबीसी, सीआरपी, सीटी स्कैन, RT-PCR, एंटीजन टेस्ट जैसे कई टेस्ट शामिल हैं.

पहले दिन कौन सा टेस्ट कराना चाहिए ?

अगर आपकी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आई है तो पहले दिन कुछ ब्लड टेस्ट जरूरी है, जो इनफ्लोमेट्री मार्कर है. ये मार्कर बीमारी का स्टेटस बताता है. जिसमें सीआरपी है, जिसे सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट कहा जाता है. ये एक ब्लड टेस्ट है. इस टेस्ट के जरिए बीमारी की गंभीरता का पता लगाया जा सकता है और उसका इलाज हो जाता है. इसके जरिए एक्यूट इन्फ्लमेशन का पता लगता है. कोरोना महामारी में ऊतकों को क्षति आदि का पता भी इससे लगता है.

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लिवर में सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP) प्रोड्यूस होता है

कोरोना के समय बीच-बीच में CRP टेस्ट करवाने से पता चलता रहता है कि आपको इंफेक्शन तो नहीं है और डॉक्टर इन रिपोर्ट्स के आधार पर बीमारी की गंभीरता का अंदाजा लगा लेते हैं. दरअसल जब भी कोई बाहरी वायरस या इन्फेक्शन हमला करता है तो शरीर में कई रासायनिक प्रक्रियाएं शुरू हो जाती हैं. इनमें से एक है इनफ्लेमेशन या सूजन. इस दौरान लिवर में सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP) प्रोड्यूस होता है.

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CRP बढ़ा तो इन्फेक्शन भी बढ़ेगा

इसको पता करने के लिए खून का सैम्पल लेकर CRP लेवल मापा जाता है. कुछ ही मिनटों में रिजल्ट आ जाता है. CRP का लेवल जितना बढ़ा हुआ होगा, उतना ही इन्फेक्शन भी बढ़ा हुआ होगा. तब डॉक्टर दवाओं की मदद से इसे काबू में करने की कोशिश करते हैं. मरीज में अगर किसी भी तरह का कोई गंभीर लक्षण है तो भी उसका CRP टेस्ट कराया जा सकता है. समय पर ये टेस्ट कराने से इन्फेक्शन को माइल्ड और मॉडरेट से गंभीर होने से रोकने में मदद मिलती है.

CRP के अलावा ये जाँच भी जरुरी

वहीं CRP के अलावा एलडीएच टेस्ट या डी-डाइमर टेस्ट कराना चाहिए, ये ब्लड क्लॉट बताता है. इसके अलावा सीबीसी, केएफटी और एलएफटी रूटीन टेस्ट भी करवा लेना चाहिए. डॉक्टरों का कहना है कि 48 से 72 घंटे के दौरान इन सभी जांच को दोबारा कराना चाहिए, ताकि ये पता चल सके के इन दो दिनों में क्या बदलाव हुए हैं.

यंग और हेल्दी लोगों को ब्लड टेस्ट की जरुरत नहीं

एम्स के डॉक्टर राजीव रंजन बताते हैं कि यंग और हेल्दी लोगों जिन्हें ज्यादा लक्षण नहीं दिख रहे हैं उन्हें ब्लड टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है. लेकिन जो बुजुर्ग लोग हैं और पहले से बीमार रहते हैं, उन्हें कोविड पॉजिटिव होने के बाद कुछ जांच जरूर करानी चाहिए. जिसमें सीबीसी कराएं, इस टेस्ट में प्लेटलेट्स और डब्ल्यूबीसी का पता चलता है. इसके अलावा बुजुर्ग लोग केएफटी और एएफटी जैसी जांच भी करा लें, इस जाँच में लिवर और किडनी फंक्शन का पता चल जाता है.

सातवें दिन सीटी स्कैन कराना जरुरी है

फिर कोरोना संक्रमण के सातवें दिन सीटी स्कैन कराना चाहिए. ये खासकर उन्हें कराना चाहिए जिन्हें फीवर हो या खांसी नहीं जा रही हो. सीटी स्कैन से ये पता चलता है कि मरीज को निमोनिया तो नहीं हो रहा है. अगर सीटी स्कैन में बहुत हल्का निमोनिया मिलता है तो इसका इलाज घर पर रहते हुए भी किया जा सकता है. इसके साथ ही घर पर रहते हुए इस बात का भी ध्यान रखे कि आपको डिहाइड्रेशन नहीं हो, सेचुरेशन कम न हो. अगर ऐसा कुछ होता है तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें.

कुछ ऐसे भी टेस्ट हैं जो जरुरी हैं जैसे कि-

CRP – यह ब्लड टेस्ट है जो बीमारी का स्टेटस बताता है. D-dimer – इस टेस्ट से ब्लड क्लॉट का पता चलता है. CBC, KFT, LFT – इस समय ये रूटीन टेस्ट भी जरूरी हैं. Chest CT – इस टेस्ट से निमोनिया का पहले से पता चल जाता है.

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4-5 दिन में एक बार जरूर करा लें सीआरपी CRP टेस्ट

कई डॉक्टर्स का मानना है कि कोरोना होने के 4-5 दिन बाद एक बार सीआरपी करवा लेना अच्छा होता है, जिससे इससे पड़ने वाले प्रभाव के बारे में पता चल जाता है. CRP का सामान्य कंसंट्रेशन स्तर 30-50 मिग्रा/ डेसीलीटर है. लेकिन जब इसका स्तर बढ़ जाता है तो खतरा बढ़ने लगता है. किसी व्यक्ति का ऑक्सीजन सैचुरेशन नॉर्मल है और CRP लेवल 70 यूनिट से अधिक है तो ये ऐसी स्थिति में ले जा सकता है, जहां शरीर के डिफेंस सिस्टम के प्रोटीन ही शरीर को नुकसान पहुंचाने लगते हैं.

CRP का लेवल बढ़ना खतरनाक है

डॉक्टरों की माने तो अगर मरीज में सी-रिएक्टिव प्रोटीन 70 यूनिट से ज्यादा है तो उसे स्टेरॉयड्स देने की जरूरत पड़ती है. अगर CRP इससे भी बढ़ जाता है तो मैकेनिकल वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है या मरीज की मौत भी हो सकती है. इसलिए इस टेस्ट से फायदा ये होता है कि आपको समय पर ही कोई दिक्कत का पता चल जाता है और दिक्कत बढ़ने से पहले ही उसका इलाज हो जाता है.

आरटीपीसीआर टेस्ट क्या होता है ? what is RT-PCR Test

दरअसल कई राज्यों ने आरटीपीसीआर टेस्ट रिपोर्ट का निगेटिव सर्टिफिकेट देख कर दूसरे राज्य से आने वालों को प्रवेश की अनुमति दे रखी है. हम आपको बताएंगे कि आरटी पीसीआर टेस्ट क्या है और इसके रेट क्या हैं?

आरटी पीसीआर टेस्ट यानी रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमर्स चेन रिएक्शन टेस्ट. इस टेस्ट से व्यक्ति के शरीर में वायरस का पता लगाया जाता है. इसमें वायरस के आरएनए की जांच की जाती है. जांच के दौरान ज्यादातर सैंपल नाक और गले से म्यूकोजा के अंदर वाली परत से स्वैब लिया जाता है. आरटी पीसीआर टेस्ट आपके शरीर में वायरस की मौजूदगी का पता लगाने में सक्षम है. इसलिए कुछ लोगों में कोरोना वायरस के लक्षण सामने न आने के बावजूद भी ये टेस्ट पॉजिटिव आता है.

एंटीजन टेस्ट क्या है ?

एंटीबाडी टेस्ट और एंटीजन टेस्ट दो प्रकार के टेस्ट हैं, जिनसे कोरोना वायरस टेस्ट किया जाता है. एंटीबाडी टेस्ट में यह पता लगाया जाता है कि व्यक्ति के शरीर में रोग प्रतिरोधी क्षमता किस चरण में है. इस टेस्ट को एंटीबाडी टेस्ट कहा जाता है. जबकि एंटीजन टेस्ट से ये पता चलता है कि व्यक्ति वायरस से संक्रमित है या नहीं है. इस टेस्ट का ये भी फायदा है कि इसमें तुरंत परिणाम मिल जाते हैं.

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