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वेंटिलेटर क्या होता है, क्यों होती है इसकी ज़रूरत, ये कैसे काम करता है ?

कोरोना वायरस की दूसरी लहर इतनी खतरनाक है कि इससे सबका बच पाना मुश्किल हो गया है. और कोरोना के दूसरे स्ट्रेन में लोगों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है. क्या आप जानते हैं वेंटिलेटर बेड की क्यों जरुरत होती है ये कैसे काम करता है ? तो आइये जानते हैं –

वेंटिलेटर का क्या काम होता है ?

कोरोना का दूसरा स्ट्रेन सीधा फेफड़ों पर अटैक कर रहा है और लोगों को साँस लेने में दिक्क्त हो रही है. और लोगों को ऑक्सीजन की जरुरत पड़ रही है. वेंटिलेटर एक ऐसी मशीन है जो किसी मरीज़ की सांस लेने में मदद करती है. ये फेफड़ों में ऑक्सीजन डालती है और कार्बन डाईऑक्साइड निकालती है. ये उस वक़्त इस्तेमाल की जाती है जब मरीज़ के फेफड़े काम करना बहुत कम कर देते हैं.

श्वास नली में डाली जाती है ट्यूब

इसके लिए मुंह, नाक या गले के पास एक छोटे से कट के माध्यम से एक ट्यूब श्वास नली में डाली जाती है, इसे मैकेनिकल वेंटिलेशन कहा जाता है, ये लाइफ सपोर्ट सिस्टम भी कहलाता है. कोरोना की इस दूसरी लहर में वेंटिलेटर की बहुत जरूरत हो रही है. इस समय देश के सभी हॉस्पिटल फुल हो चुके हैं. हर तरफ जैसे अफरा तफरी का माहौल है. कोविड-19 के इलाज में तकरीबन 5 फ़ीसदी मरीज़ों को ही क्रिटिकल केयर की ज़रूरत पड़ती है.

क्यों होती है साँस लेने में दिक्क्त ?

दरअसल ये वायरस आपके मुंह से होते हुए सांस की नली में प्रवेश करता है और फिर आपके फेफड़ों तक पहुंचता है तो आपके फेफड़ों में छोटे-छोटे एयरसैक बना देता है. कोरोना के बनाए छोटे-छोटे एयरसैक में पानी जमने लगता है. इस कारण सांस लेने में तकलीफ़ होती है और आप लंबी सांस नहीं ले पाते. इस स्टेज में मरीज़ को वेंटिलेटर की ज़रूरत पड़ती है.

कैसे काम करता है वेंटिलेटर

आपने देखा होगा वेंटिलेटर एक ट्यूब के सहारे रोगी से जुड़ा होता है, ये ट्यूब रोगी के मुंह, नाक या गले में श्वास नली में रखी जाती है तो इसे इंट्यूबेशन कहा जाता है. श्वास ट्यूब को रोगी के नाक या मुंह के माध्यम से ही विंडपाइप या श्वास नली में डाल दिया जाता है, उसके बाद ट्यूब रोगी के गले में आगे खिसकाई जाती है, जिसे एंडोट्राचेल या इटी ट्यूब कहते हैं.

वेंटिलेटर पर ज्यादा रहना भी हानिकारक

अगर किसी व्यक्ति को ज्यादा दिन तक वेंटिलेटर पर रखा जाता है तो इससे उसे सबसे गंभीर और सामान्य जोखिमों में निमोनिया हो सकता है. रोगी के वायुमार्ग में रखी श्वास ट्यूब के माध्यम से बैक्टीरिया उसके फेफड़ों में प्रवेश कर सकते हैं. इसलिए ऐसे रोगी में वेंटिलेटर से जुड़ा निमोनिया या वेंटिलेटर-एसोसिएटेड निमोनिया नामक बीमारी विकसित हो सकती है.

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