मंदिर निर्माण से पहले जमीन के 200 फ़ीट नीचे रखा जायेगा टाइम कैप्सूल, जानें इसका मकसद

अयोध्या में राम मंदिर बनाने का 28 साल का सपना अब पूरा होने वाला है. श्रीराम तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बैठक में शिलान्यास, निर्माण और मंदिर के स्वरूप को लेकर निर्णय ले चुका है और प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी अपनी मुहर लगा दी है.

What is Time Capsule and reason behind pressing deep inside
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के करीब 9 माह बाद 5 अगस्त से अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा. राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भूमि पूजन के लिए 3 और 5 अगस्‍त की तारीख भेजी थीं. पीएमओ ने 5 अगस्त को चुना है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने पांच अगस्त को पीएम नरेंद्र मोदी के अयोध्या में श्रीराम मंदिर के लिए भूमि पूजन का कार्यक्रम तय किया है. पीएम मोदी 5 अगस्त को दोपहर सवा 12 बजे भूमि पूजन करेंगे.

प्रस्तावित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के ठीक गर्भगृह में मोदी के पूजन का आसन होगा. प्रार्थना मंडप में केंद्रीय मंत्रीगण, मुख्यमंत्रीगण, राज्यपाल, संघ प्रमुख समेत तमाम दिग्गज हाथ जोड़ कर खड़े रहेंगे. गर्भगृह के चारों तरफ गूढ़ मंडप से संत-धर्माचार्य और वैदिक आचार्य मंत्रोच्चार करेंगे. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भूमिपूजन का ये ब्लूप्रिंट अयोध्या दौरे पर शनिवार को आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तय किया है.

200 फीट गहराई में रखा जाएगा टाइम कैप्सूल.

वहीं अयोध्या में राम मंदिर का इतिहास हजारों साल तक रहे, इसके लिए मंदिर के गर्भगृह की 200 फीट गहराई में टाइम कैप्सूल रखा जाएगा. इसमें मंदिर की पूरी डिटेल होगी. ताकि भविष्य में जन्मभूमि और राम मंदिर का इतिहास देखा जा सके और कोई विवाद नहीं हो. ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने बताया कि लंबी कानूनी लड़ाई व संघर्ष के बाद अयोध्या में राम मंदिर का सपना साकार होने जा रहा है इसलिए ये जरूरी है कि इसके इतिहास को भी संरक्षित किया जाए जिससे कि आने वाले समय में लोगों को श्रीराम जन्मभूमि की सही जानकारी मिल सके.

क्या है टाइम कैप्सूल ?

टाइम कैप्सूल एक कंटेनर की तरह होता है जिसे विशेष प्रकार के तांबे (कॉपर) से बनाया जा रहा है और इसकी लंबाई करीब तीन फुट होगी. इस कॉपर की विशेषता है कि ये सालों साल खराब नही होता है और सैकड़ों हजारों साल बाद भी इसे जब जमीन से निकाला जाएगा तो इसमें मौजूद सभी दस्तावेज पूरी तरह से सुरक्षित होंगे.

राम मंदिर के मॉडल में भी बदलाव किया गया है. अब राम मंदिर दो नहीं बल्कि तीन मंजिला होगा. इसकी लंबाई 268 फीट और चौड़ाई 140 फीट होगी. इसकी ऊंचाई 161 फीट हो गई है. तीन मंजिला बनने वाले मंदिर में 318 खंभे होंगे. हर तल पर 106 खंभे बनाए जाएंगे. खंभों की ऊंचाई 14 फीट 6 इंच होगी. हर खंभे में 16 मूर्तियां तराशी जाएंगी.

ये मंदिर अपने आप में ही ख़ास होगा क्युकी 100 से 120 एकड़ भूमि पर पांच गुंबदों वाला तीन मंजिला मंदिर दुनिया में कहीं नहीं है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीएम मोदी 5 अगस्त को सुबह 11 बजे से दोपहर 3:10 बजे तक अयोध्या में रहेंगे. भूमिपूजन के कार्यक्रम सुबह 8 बजे शुरू हो जाएंगे. भूमि पूजन काशी के पुजारी कराएंगे. इसके बाद प्रधानमंत्री मंदिर की आधारशिला रखेंगे.

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में राम मंदिर का डिजाइन तैयार करने के लिए तय किए गए चंद्रकांत सोमपुरा के दोनों पुत्र निखिल व आशीष भी बैठक में मौजूद थे. इनकी ओर से राम मंदिर के डिजाइन में बदलाव का प्रस्तावित मानचित्र भी ट्रस्ट के अध्यक्ष को सौंपा गया था. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा था कि चंद्रकांत सोमपुरा की टीम ही राममंदिर का निर्माण करेगी. सोमनाथ मंदिर को भी इन्हीं लोगों ने बनाया है. मंदिर निर्माण में पैसे कि कमी नहीं होगी. इसके लिए 10 करोड़ परिवार दान देंगे.

वहीं महंत दिनेंद्र दास ने ये भी बताया था कि परिसर में स्थित पौराणिक जर्जर मंदिर जिनमें 28 वर्षों से पूजा बंद है, उनको गिराने पर सहमति बन गई है. मतलब की श्री रामजन्मभूमि परिसर में स्थित करीब 12 प्राचीन जर्जर मंदिरों को अब गिराया जाएगा. लेकिन इनमें विराजमान गर्भगृह को मंदिर परिसर में ही किसी स्थान पर स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना पहले की भांति प्रारंभ की जाएगी.

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