क्या है CAA और NRC, दोनों में क्या अंतर है, यहाँ पर मिलेगा सही जवाब, देखें-

नागरिकता कानून (Citizenship Amendment Act) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) को लेकर पूरे देश में जगह जगह विरोध प्रदर्शन चल रहा है. अफवाहों में न पड़ें पहले समझ लें की आख़िर क्या कहते हैं ये दोनों कानून.

what is the difference between citizenship amendment act and national register of citizens
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नागरिकता कानून क्या है-

भारत का ‘नागरिकता कानून 1955’ के अनुसार किसी भी व्यक्ति को भारत की नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल भारत में रहना अनिवार्य था. अब इसमें संसोधन करके नया कानून बना दिया गया है. इस नए कानून में समय सीमा घटा दी गई है. अब भारत की नागरिकता लेने के लिए कम से कम 6 साल भारत में रहना अनिवार्य है.

मतलब कि 31 दिसम्बर 2014 के पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जा सकती है.

किन शरणार्थियों को मिलेगी नागरिकता-

इस नए नागरिकता कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिन्दू, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को ही भारत की नागरिकता प्रदान की जा सकेगी. इस नए कानून की विशेष बात ये है कि इस अधिनियम में मुसलमान शरणार्थियों को नागरिकता नहीं प्रदान की जा सकेगी.

जानिए NRC के बारे में-

एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस से पता चलता है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं. जिस व्यक्ति का सिटिजनशिप रजिस्टर में नाम नहीं होता उसे अवैध नागरिक माना जाता है.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 20 नवंबर को सदन में जानकारी देते हुए बताया था कि उनकी सरकार दो अलग-अलग नागरिकता संबंधित पहलुओं को लागू करने जा रही है, पहला सीएए (CAA) और दूसरा पूरे देश में एनआरसी (NRC)

अभी सिर्फ असम में NRC लागू है. मगर सरकार अवैध लोगों की पहचान करने के लिए पूरे देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करना चाहती है. NRC में सभी धर्मों और संप्रदायों के लोगों को शामिल किया जाएगा. इसमें अवैध तरह से रह रहे विदेशियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजा जायेगा. जिनमें ज़्यादातर मुसलमान हैं. अमित शाह ने सदन में बताया था कि एनआरसी के जरिए 19 जुलाई 1948 के बाद भारत में प्रवेश करने वाले अवैध निवासियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

तो अब आप जान जाये होंगे कि ये दोनों कानून अलग अलग हैं. CAA में पड़ोसी देशों से आये शरणार्थियों को नागरिकता दी जा रही है. इसमें भारत में रह रहे की भी धर्म के लोगों से कोई मतलब नहीं है. उनको डरने की कोई जरुरत नहीं है.

वहीं NRC में भारत में अवैध तरीके से रह रहे लोगों की पहचान करके उनको उनके देश भेजना है. इसमें भी भारत में रहने वालों को कोई दिक्कत नहीं होगी. थोड़ी दिक्कत होगी उनको जो आज़ादी के बाद भारत आये हैं और अवैध तरह से रह रहे हैं. जिसमें सबसे ज्यादा बांग्लादेशी हैं. हालाँकि अभी NRC देश में लागू नहीं हुई है.

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