प्रोटेम स्पीकर क्या होता है ? ये क्या बला है पढिए..

what is protem speaker

प्रोटेम स्पीकर ही महाराष्ट्र में फ्लोर टेस्ट करवाएंगे लेकिन आपने स्पीकर सुना होगा. प्रोटेम स्पीकर क्या चीज है. क्यों स्पीकर के आगे प्रोटेम लगा दिया गया है. ये आदमी कहां से आएगा. कौन होगा. कौन स्पीकर लाएगा तो आगे हम आपको पूरी पोस्ट में यही बताने वाले हैं.

What Is Protem Speaker

प्रोटेम स्पीकर क्या होता है ?
प्रोटेम स्पीकर की जरूरत क्यों पड़ती है ?
प्रोटेम स्पीकर का क्या काम है ?
प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति कौन करता है ?

नई नवेली सरकार को जब विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से गुजरना पड़ता है. (ये हमेशा नहीं होता) जब वो ये दिखाता है कि हमारे पास सबसे ज्यादा विधायक हैं और इसलिए हम सरकार बनाएंगे. विधायक हैं तो ठीक है लेकिन जब विपक्ष उंगली कर देता है. जब विपक्ष कहता है साहब ये आदमी झूठ बोल रहा है इसके पास विधायक हैं ही नहीं. तब वोटिंग होती है फ्लोर पर टेस्ट होता है.

विधायक तय मात्रा में निकल आए तो ठीक है सरकार बनेगी वर्ना..गए 12के भाव..और दूसरे पक्ष को फ्लोर पर अपना रौला दिखाने के लिए बोला जाता है कि आओ भइया तुम्हारे पास कितने विधायक हैं बताओ वोटिंग होती है जिसके पक्ष में तय मात्रा में वोट आते हैं वो सरकार बनाता है.

कल महाराष्ट्र विधानसभा में क्या क्या होगा वो देखिए..

बुधवार के दिन महाराष्ट्र विधानसभा में 5 अहम काम होंगे

पहला काम : प्रोटेम स्पीकर का चुनाव होगा

दूसरा काम : प्रोटेम स्पीकर को राज्यपाल शपथ दिलाएंगे

तीसरा काम : प्रोटेम स्पीकर नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाएंगे

चौथा काम : फ्लोर टेस्ट के लिए सदन में वोटिंग कराई जाएगी

पांचवां काम : वोटिंग के परिणामों का ऐलान करेंगे प्रोटेम स्पीकर

प्रोटेम स्पीकर कौन होता है ?

प्रोटेम स्पीकर में प्रोटेम (Pro-tem) शब्द लैटिन भाषा का है इसका मतलब होता है ‘कुछ समय के लिए. ‘विधानसभा में प्रोटेम स्‍पीकर की नियुक्ति राज्यपाल करता है और इसकी नियुक्ति तब तक के लिए होती है जब तक विधानसभा अपना स्‍थायी विधानसभा अध्‍यक्ष यानी स्पीकर नहीं चुन लेती.

प्रोटेम स्पीकर नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलवाता है और शपथ ग्रहण की पूरी प्रक्रिया इन्हीं की देखरेख संपन्न कराई जाती है. सदन में जब तक विधायक शपथ नहीं ले लेते, तब तक उनको सदन का हिस्‍सा नहीं माना जाता. इसलिए सबसे पहले विधायकों को ही शपथ दिलाई जाती है.

जब विधायकों की शपथ हो जाती है तो उसके बाद ये लोग विधानसभा स्पीकर का चुनाव करते हैं. संसदीय परंपरा के मुताबिक राज्यपाल सदन में वरिष्‍ठतम सदस्‍यों में से किसी एक को प्रोटेम स्‍पीकर के लिए चुनते हैं. यही व्यवस्था विधानसभा के अलावा लोकसभा के लिए होती है.

महाराष्ट्र में जिस पार्टी का प्रोटेम स्पीकर बनेगा उस पार्टी के लिए पक्षपात करेगा. ये कभी कहा नहीं जाता. आप ये नहीं कह सकते कि स्पीकर जिसका काम उसका लेकिन ऐसा अंडर स्टुड है हमेशा से जिसकी लाठी उसकी भैंस समझे…

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