क्या होता है ‘डिटेंशन सेंटर’, इसमें किसको रखा जाता है ?, कहाँ-कहाँ बनाये गए हैं ? देखें- हर सवाल का जवाब

जब से CAA आया है तब से आप डिटेंशन सेंटर नाम की एक जगह के बारे में सुन रहे होंगे और इसको लेकर आरोप-प्रत्यारोप भी खूब लगाए जा रहे हैं. कुछ नेताओं ने डिटेंशन सेंटर को अपना राजनीतिक मुद्दा बना लिया है. लेकिन क्या आज जानते हैं कि आख़िर क्या होता है डिटेंशन सेंटर ?

What is Detention Center who is kept inside it
What is Detention Center who is kept inside it

राहुल गांधी ने एक वीडियो ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने एक डिटेंशन सेंटर को दिखाया है. और कह रहे हैं की RSS का प्रधानमंत्री भारत माता से झूठ बोलता हैं. दरअसल हालही में प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक रैली में कहा था कि देश में डिटेंशन सेंटर को लेकर फैलाई जा रही अफवाहें सरासर झूठ हैं.

क्या है अफ़वाह ?

अफवाह ये है की सरकार ने डिटेंशन सेंटर बनवाये हैं और जो CAA-NRC से बाहर होंगे उनको वहीँ पर भेज दिया जायेगा. ख़ास कर मुस्लिमों को ये कह कर डराया जा रहा है कि सभी मुस्लिमों को ऐसे ही डिटेंशन सेंटर में भेज दिया जायेगा. लेकिन आप अफवाहों पर बिलकुल भी ध्यान न दें.

क्या होता है डिटेंशन सेंटर ?

डिटेंशन सेंटर एक ऐसी जगह होती है जहां पर अवैध विदेशी नागरिकों को रखा जाता है. विदेशी नागरिकों को वापस भेजने की प्रक्रिया के दौरान उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा जाता है.

केंद्र सरकार को है पावर-

दरअसल फॉरेनर्स एक्ट 1946 के तहत केंद्र सरकार किसी भी विदेशी नागरिक की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा सकती है और उसे किसी एक खास स्थान पर रखा जा सकता है. पासपोर्ट एक्ट, 1920 के तहत केंद्र सरकार किसी भी ऐसे व्यक्ति को जिसके पास वैध पासपोर्ट वीजा या ट्रैवल दस्तावेज नहीं है उसे भारत से निकाल कर बाहर कर सकती है.

भारत में हर साल हजारों ऐसे मामले आते हैं, जिसमें विदेशी नागरिक या तो वीजा शर्तों के उल्लंघन के दोषी पाए जाते हैं. या फिर वीजा की अवधि से ज्यादा समय तक भारत में ही रुके रहते हैं. ऐसे में इन विदेशियों को वापस भेजना सरकार की जिम्मेदारी बनती है. इसी प्रक्रिया में उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा जाना अनिवार्य होता है.

सुप्रीम कोर्ट का है निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आधार पर ही देश के अलग-अलग हिस्सों में डिटेंशन सेंटर स्थापित किए गए थे. दिल्ली, मुंबई और बंगलुरू जैसे राज्यों में डिटेंशन सेंटर खोले गए हैं, क्योंकि अधिकांश विदेशी नागरिक भारत में इन्हीं जगहों पर आते हैं.

राज्य सरकार करती है इसे लागू

फॉरेनर्स और पासपोर्ट एक्ट के तहत केंद्र सरकार को अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को वापस भेजने की पावर तो है लेकिन केंद्र के पास डिटेंशन सेंटर खोलने और उन्हें संचालित करने वाली कोई एजेंसी नहीं है. संविधान के अनुच्छेद 258 (1) के तहत केंद्र सरकार फारेनर्स और पासपोर्ट एक्ट से मिली शक्तियों को राज्य सरकारों को सौंप देता है.

मतलब साफ़ है कि डिटेंशन सेंटर को लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है. राज्य सरकार ही डिटेंशन सेंटर बनाती है और उसे संचालित भी करती हैं. इसके साथ ही पासपोर्ट और वीजा एक्ट का उल्लंघन करने वाले विदेशी नागरिकों को पकड़ने और उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखने की जिम्मेदारी भी राज्य सरकारों की ही होती है.

गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि ऐसे डिटेंशन सेंटर पिछले कई दशकों से कई राज्यों में चल रहे हैं लेकिन उनका एनआरसी और CAA से कोई संबंध नहीं है.

कांग्रेस की सरकार में ही बने थे डिटेंशन सेंटर

कांग्रेस ने डिटेंशन सेंटर को लेकर खूब बवाल मचा रखा है लेकिन हक़ीकत ये है कि गृह मंत्रालय ने 2009 में ही राज्य सरकारों को अपने यहां डिटेंशन सेंटर बनने ने निर्देश दे दिए थे. जिसका मकसद था कि अवैध विदेशियों की पहचान कर उन्हें किसी भी वक्त तुरंत स्वदेश रवाना किया जा सके. तब देश में कांग्रेस की ही सरकार थी.

कहाँ बने हैं डिटेंशन सेंटर-

असम (गोलपारा, कोकराझार, तेजपुर, जोरहाट, डिब्रूगढ़ और सिलचर की जिला जेलों में)
एनसीआर दिल्ली (सेवा सदन – लामपुर व महिला सदन – महिलाओं के लिए, बांग्लादेशियों के लिए शहजादबाग)
पंजाब (केंद्रीय जेल, अमृतसर में)
राजस्थान (अलवर में जेल परिसर में)
पश्चिम बंगाल (सुधार गृह)
गुजरात (भुज)
तमिलनाडु में हैं.

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