हनुमान के दलित होने के फायदे

  • तो क्या एक दलित ने लंका में रहने वाले ब्राह्मण का घर जला दिया था ?
  • क्या दलित होने की वजह से हनुमान जी राम के आगे हाथ जोड़े खड़े रहते थे ?
  • तो क्या दलितों ने पसीना बहाकर लंका जाने के लिए समुद्र पर पुल बांधा था ?
  • तो क्या दलित उस वक्त भी केवल आज्ञाओं का पालन करते थे ?
  • क्या हनुमान राम के सबसे बड़े भक्त नहीं गुलाम थे ?
  • तो क्या दलित हनुमान ठाकुरों की चाकरी करते थे ?
योगी के प्रमाण पत्र के हिसाब से हनुमान दलित हैं
योगी के प्रमाण पत्र के हिसाब से हनुमान दलित हैं

ये आखिर वाली लाइन  में दो शब्द हैं ठाकुर यानी क्षत्रिय यानी राम और दलित यानी हनुमान, ये आज की राजनीति का जातिगत फार्मूला है. और यही फार्मूला योगी जी इस चुनाव में फिट करना चाहते थे. वर्ना भगवान हनुमान को दलित बताने का कोई मतलब ही नहीं था. आज की तारीख यूपी के चक्रवर्ती सम्राट महाराज योगी जी के हनुमान को जाति सर्टिफिकेट देने के साथ ही सवर्ण, दलित और पिछड़ों के अपने-्अपने राष्ट्रीय स्तर के भगवान मिल गए हैं.

  • कृष्ण ओबीसी के भगवान हो गए
  • राम सवर्णों के ईष्ट हो गए
  • हनुमान दलितों के खाते में चले गए
  • शंकर और ब्रह्मा जी के जाति प्रमाण पत्र पेंडिंग हैं

33 करोड़ देवी देवताओं में सारी जातियों ने अपने अपने लोकल देवी देवता रख रखे हैं. लेकिन जातियों को राष्ट्रीय स्तर पर भगवानों का नेतृत्व मिल चुका है. कहते हैं योगी आदित्यनाथ पर ईश्वर की कृपा है. इसी कृपा की बदौलत वो उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ चुके हैं. योगी के अलावा किसी और ने भारत की आधी से ज्यादा आबादी के ईष्ट भगवान बजरंग बली को जाति प्रमाण पत्र दिया होता तो बवाल हो गया होता लेकिन योगी आदित्यनाथ यूपी के सम्राट हैं. इसलिए खाता ना बही जो सम्राट साहब कहें वही सही.

हनुमान को जाति प्रमाण पत्र देने के फायदे

हनुमान को दलित कहने के बाद देश भर के दलित हनुमान मंदिरों पर कब्जा कर रहे हैं. दलित पहले से मौजूद पुजारियों को हटाकर खुद हनुमान मंदिर के पुजारी बन रहे हैं. इसका फायदा ये हुआ है कि जो दलित समाज खुद को बौद्ध मानने लग गया था. जो दलित समाज हिंदू-देवी देवताों की पूजा आराधना से अलग होने लगा था. जो बाबा साहब को ही सब कुछ मानने लगा था वो मंदिरों की तरफ लौटने लगा है.

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जो अपने आप को A ग्रेट का राजनीतिक पंडित मानते हैं. हनुमान का जाति प्रमाण पत्र जारी होने के बाद दलितों में हनुमान के लिए पैदा हुआ प्रेम देखकर खुश हैं. देश में 90 फीसदी राजनीतिक पंडित राम के पक्ष से आते हैं. उनको इस बात का ऐताराज हो ना हो कि भगवानों को जातिगत चश्मे से देखना गलत है या नहीं लेकिन उनको इस बात  की खुशी है  कि दलित मंदिर की तरफ लौट रहे हैं.

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वीडियो सौजन्य- the quint

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