ममता को बड़ा झटका, 4 दिग्गज नेताओं के इस्तीफे, सुप्रीम कोर्ट ने भी भेजा नोटिस

पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं. राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं. सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुश्किलें दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही हैं.

west bengal 4 trinamool mla left the party
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टीएमसी के कई नेता पार्टी से अपनी नाराजगी जता चुके हैं. सुवेंदु अधिकारी, जितेंद्र तिवारी के बाद अब बैरकपुर सीट से टीएमसी विधायक शीलभद्र दत्त ने भी विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है. शीलभद्र दत्त राजनीतिक रणनीतिकार कहे जाने वाले प्रशांत किशोर से नाराज थे. वे लगातार उनपर सवाल खड़े कर रहे थे. उन्होंने कहा था कि मैं 10 साल की उम्र से राजनीति कर रहा हूं और अब एक मार्केटिंग कंपनी बताएगी कि हम कैसे चुनाव लड़ेंगे. और टीएमसी नेता कबीरुल इस्लाम ने भी पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है.

सुवेंदु अधिकारी, जितेंद्र तिवारी, शीलभद्र दत्त

वहीं ममता सरकार में मंत्री रहे सुवेंदु अधिकारी को पार्टी में अच्छी पकड़ वाला नेता माना जाता रहा है. वे पूर्व में टीएमसी से सांसद रह चुके हैं. तृणमूल से इस्तीफे के एक दिन बाद ही शुभेंदु अधिकारी को केंद्र से Z कैटेगरी की सुरक्षा मिलने का फैसला हो गया है. गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों से चर्चा के बाद शुभेंदु को बंगाल में Z सिक्योरिटी देने का फैसला लिया गया है. उन्हें बुलेटप्रूफ गाड़ी भी मिलेगी. बंगाल के बाहर उन्हें Y+ सिक्योरिटी कवर मिलेगा.

अमित शाह 19 और 20 दिसबंर को बंगाल में रहेंगे. यहां वे एक रैली करेंगे. बताया जा रहा है कि इस दौरान वे मंदिर में दर्शन करेंगे और रोड शो करेंगे. ऐसी भी अटकलें हैं कि अमित शाह के मिदनापुर में रहने के दौरान TMC के बागी शुभेंदु अधिकारी को भाजपा में शामिल किया जा सकता है.

उधर उच्चतम न्यायालय ने भी ममता को झटका दे दिया है. ममता सरकार ने बीजेपी नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. और इस एफआईआर के खिलाफ पश्चिम बंगाल के बीजेपी कार्यकर्ताओं ने याचिका लगाईं थी. दायर याचिका में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने टीएमसी सरकार पर झूठी एफआईआर दर्ज करने का आरोप लगाया था. न्यायमूर्ति संजय किशन कौल के नेतृत्व वाली शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए बंगाल पुलिस को बीजेपी नेताओं कैलाश विजयवर्गीय, अर्जुन सिंह सहित चार बीजेपी नेताओं के खिलाफ किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई न करने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा राजनैतिक वैमनस्य से झूठे केस दर्ज करने वाली याचिका पर ममता सरकार को नोटिस जारी किया गया है.

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