वीवीएस लक्ष्णमण ने सौर्य ऊर्जा वाली दादी से लिए भुट्टा..और बोले..

दोस्तों भारतीय क्रिकेट में रहकर देश का नाम रोशन करने वाले वीवीएस लक्ष्मण ने एक दादी की तस्वीर ट्टिवट की है जिसमें एक दादी सोलर ऊर्जा का इस्तेमाल करके ठेले पर भट्टा भून रही हैं. दोस्तों चौंकिए मत..ये तस्वीर साउठ इंडिया में पड़ने वाले शहर बैंगलौर की है. तस्वीर में दिखाई दे रहा है कि एक ठेला है जिस पर कुछ कच्चे और पक्के भुट्टे रखे हुए हैं. एक सोलर लगा हुआ है जससे पंखा जुड़ा हुआ है. सोलर से लाइट बनती है जिससे बिजली बनती है. फिर पंखा चलता है और कोयले पर हवा मारता है. कोयला धधकता है और दादी आराम से भुट्ठा भून लेती हैं.

दादी ने सबका ध्यान खींचा

टेक्नॉलिजी के हिसाब से बैंगलौर देश के किसी भी हिस्से से बहुत आगे है.  हुआ ये वीवीएस लक्ष्मण किसी काम से जा रहे थे. अचानक उन्होंने अपनी गाड़ी रुकवाई और दादी के ठेले की तरफ बढ़ गए. ठेले पर सौर्य ऊर्ज की तकनीक देखकर वो हैरान रह गए . दादी से कुछ देर बात करके और फोटो लेकर वो वहां से चले गए.  वीवीएस लक्ष्मण ने दादी की तस्वीर ट्विट करते हुए लिखा....

"बेंगलुरू में भुट्टे को ग्रिल करने के लिए 75 साल के सेल्वम्मा ने हाई टेक सोलर पावर फैन का इस्तेमाल किया। बैट्री से एलईडी और पंखा दोनों चलते हैं.. प्रौद्योगिकी और नई तकनीक को अच्छे से अपनाकर हम बहुत कुछ कर सकते हैं.देखकर बहुत अच्छा लगा "

सौर्य ऊर्जा क्या है ?

रती पर पड़ने वाली सूरज की रौशनी और उसमे मौजूद गर्मी ही सौर ऊर्जा कहलाती है। धरती पर सौर ऊर्जा ही एकमात्र ऐसा ऊर्जा स्रोत है जो अन्य ऊर्जा स्रोतों की तुलना में अत्यधिक मात्रा में उपलब्ध है.. सूर्य से पृथ्वी पर अधिक मात्रा में ऊर्जा पहुँचती है तथा पृथ्वी पर इसका इस्तेमाल विद्युत् उत्पन्न करने में भी किया जाता है.. विज्ञान एवं तकनीक में होने वाले विकास की मदद से मनुष्य ने ऐसी तकनीक ईजाद कर ली है जिससे धरती पर पड़ने वाली सूरज की किरणों को विज्ञान एवं तकनीक की मदद से विद्युत् में परिवर्तित किया जाता है..

हर साल सूर्य से पृथ्वी पर पहुंचने वाली ऊर्जा की मात्रा धरती पर पाए जाने वाले समस्त कोयले, तेल, गैस आदि की मात्रा से 130 गुना अधिक है। पृथ्वी पर पड़ने वाली यह सूरज की किरणें बहुत सालों से यहाँ उपलब्ध हैं तथा वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले 500-600 करोड़ सालों तक सूरज की किरणें धरती पर उपलब्ध रहेंगी तथा इसी प्रकार हम सौर ऊर्जा से विद्युत् उत्पन्न कर अपनी ज़रूरतों को पूरा कर सकेंगे।

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