सरकारों ने विकास दुबे को पाला है..ये कहा तो मिर्ची लगी | WITH PRAGYA MISHRA

सरकारों ने विकास दुबे को पाला है..ये कहा तो मिर्ची लगी | WITH PRAGYA MISHRA

आतंकवादी विकास दूबे ने 8 पुलिसवालों की हत्या कर दी है..सरकार है बीजेपी की मुख्यमंत्री हैं..योगी आदित्यनाथ जी..विकास दूबे इसने 2001 में एक राज्य मंत्री की थाने में गोली मारकर हत्या कर दी थी..तब भी सरकार बीजेपी की थी..मुख्यमंत्री थे आज के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी..शिवली थाने के भीतर घुसकर श्रम संविदा बोर्ड के चेयरमैन रहे दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री संतोष शुक्ला को मार दिया था लेकिन किसी पुलिसवाले ने विकास दूबे के खिलाफ गवाही नहीं दी..तब विकास दूबे को किसने बचाया पुलिस ने…

दोस्तों तीन थानों की पुलिस विकास दूबे के घर पर दबिश देने निकली रात के साढ़े बारह बजे के वक्त विकास दूबे को चौबेपुर थाने के तिवारी जी ने  ये बता दिया गया कि आपको मारने के लिए तीन थानों की पुलिस आ रही है..घात लगाकर विकास दूबे ने 8 पुलिस वालों को मार दिया..डीएसपी देवेंद्र मिश्रा की टांग काटी पुलिस वालों की लाशों को एक जगह ढेर लगाकर आग लगाने की कोशिश की..इस बार फिर विकास दूबे को किसने बचाया खुद पुलिस ने..लेकिन लेकिन लेकिन..ये सब हुआ क्यों है..इसका कारण क्या है..दूबे तो गुंड़ा था..वो पुलिस की गुदड़ी का लाल कैसे बन  रहा..इसके जानने के लि शुरू से शुरू करते हैं..

दोस्तों आप सोचकर देखिए 71 मुकदमों वाला दुर्दांत आतंकवादी..थाने की टॉप 10 लिस्ट में उसका नाम नहीं था..कानपुर का सबसे बड़ा क्रिमिनल लेकिन कानपुर जिले की अपराधियों की लिस्ट में उसका नाम नहीं था..विकास दूबे अपराधी नहीं देवता थे..दामाद थे..किसके थे वो आप खुद समझ लीजिए..ना गुंडा राज ना भ्रष्टाचार अबकी बार फलानी फलानी सरकार..लोग इस  तरह के नारों में फंस जाते हैं..

 

एक सरकार कांडी होती है..तो दूसरी महाकांडी होती है..हर सरकार कुछ लोगों के धन और सामर्थ्य के सहारे सत्ता तक पहुंचती  है और फिर उन अपने लोगों के हितों की पूर्ति के लिए काम करती है..ये एक राजनीति का सत्य है..पुलिस कैसे फर्जी एनकाउंटर करती है  ये सबको पता है..हर एनकाउंटर की एक ही कहानी होती है..हम पकड़ने गए उन्होंने हम पर फायर किया हमने उनपर फायर किया..उसके पास से एक देसी तमंचा और दो जिंदा कारतूस बरामद हुए..अगली बार अखबार पढ़ना और ये लाइनें लिखी मिलें तो मुझे याद करना..

 

दोस्तों सोचकर देखिए 8 पुलिसवाले मारे गए.. क्यों…क्योंकि एनकाउंटर स्पेशलिस्ट लोग आज की सरकार में दफ्तर में बिठा दिए गए हैं..और चहेते लोग थाने संभाल रहे हैं..दोस्तों सोचिए जिस नवनीत सिकेरा को आपने भौकाल जैसी वेब सीरीज में देखा है जो सिकेरा एनकाउंटर स्पेशलिस्ट है..वो 1090 में बैठकर नारी सुरक्षा वाला कॉल सेंटर संभाल रहे हैं..

 

वुमेन हेल्पलाइन में बैठे हैं..हेलो मैं आपकी किस प्रकार सहायता कर सकता हूं..ये कर रहे हैं..क्यों क्योंकि पुलिस में भी आपको टैलेंट नहीं चापलूसी पसंद है..आपके नाम के आगे क्या लगा है..नाम के आगे सही टाईटिल होगा तो कंधे पर सही सितारे सजेंगे..हमने सुना था वीरों की कोई जाति नहीं होती है..लेकिन यूपी पुलिस में होती है..

 

मैं हैरान हूं कि आतंकी विकास दूबे ने 8 पुलिसवालों की हत्या की है..और शहीद पुलिसवालों के लिए लोगों की मिली जुली संवेदनाएं हैं..लोगों की संशय युक्त संवेदनाएं हैं..कुछ शहीद कहते हैं..कुछ मौत कहते हैं..कुछ हत्या कहते हैं..क्यों..जब सेना का कोई जवान मरता है तो लोग उसे शहीद कहते हैं रोते हैं..उनकी शहादत पर..पूरा इलाका उमड़ पड़ता है..सब एक बार अपने लाल को देख लेना चाहते हैं..

 

और जब कोई पुलिसवाला मरता है तो पुलिस लाइन के 10-15 लोगों के अलावा किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता..पुलिस चाह ले तो मंदिर के बाहर से चप्पल तक चोरी नहीं हो सकती..लेकिन पुलिस का इतिहास मिलावट का रहा है..उसे चप्पल चोर से भी कमीशन चाहिए और चप्पल मालिक से भी..और चप्पल की इस उदारण वाली दलाली के बीच जीभ कब चलवे चाटने की आदी हो जाती है पता ही नहीं चलता..जिस दिन पुलिस इन सब के जवाब खोज लेगी उस दिन वर्दी पर लगे एक एक घाव पर पूरा देश रोएगा.

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