मारा गया विकास दुबे, गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर हो गया एनकाउंटर, पढ़ें-

8 पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारने वाला मोस्ट वांटेड क्रिमिनल विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन मंदिर से गिरफ्तार कर लिया गया था. आज सुबह ही उसका पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है.

vikas dubey kanpur encounter Special Task Force
vikas dubey kanpur encounter Special Task Force

यूपी एसटीएफ की टीम उसे उज्जैन से कानपुर ले जा रही थी, लेकिन शहर से 17 किमी पहले बर्रा थाना क्षेत्र में सुबह 6:30 बजे काफिले की एक कार पलट गई. विकास उसी गाड़ी में बैठा था. गाड़ी पलटने के बाद विकास ने पुलिस टीम से पिस्टल छीनकर हमला करने की कोशिश की लेकिन पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वो बुरी तरह जख्मी हो गया. उसे सीने और कमर में दो गोली लगीं. बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया. जहां उसे सुबह 7 बजकर 55 मिनट पर मृत घोषित कर दिया.

मालूम हो की एक हफ्ते में विकास दुबे के पांच गुर्गों का एनकाउंटर हो चुका था. विकास दुबे का भी तय था, लेकिन वो खुद सरेंडर करने उज्जैन आ गया. विकास यूपी, दिल्ली, हरियाणा और मध्य प्रदेश पुलिस को चकमा देकर दर्शन करने मंदिर पहुंचा था. वहां पकड़े जाने के बाद वो चीख चीख कर लोगों को बताने लगा की मैं कानपुर वाला विकास दुबे हूँ मुझे पुलिस ने पकड़ लिया है. जिसके बाद यूपी एसटीएफ देर रात उसे कानपुर ला रही थी.

कानपुर रेंज के आईजी ने विकास के मारे जाने की पुष्टि की. उज्जैन से एसटीएफ टीम के पीछे चल रही मीडिया की गाड़ियों को घटनास्थल से करीब 20 किलोमीटर पहले पुलिस ने रोक दिया था. पुलिस अधिकारी मीडिया के सामने कुछ भी साफ कहने से बच रहे हैं. उनका कहना है कि प्रेसवार्ता के माध्यम से इसकी जानकारी दी जाएगी.

एनकाउंटर की जगह पर फॉरेंसिक टीम पहुंच चुकी है और साक्ष्य को एकत्र करने का काम कर रही है. 10 बजकर 15 मिनट के आसपास तीन पुलिसकर्मियों को अस्पताल लाया गया. पुलिस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विकास दुबे के एनकाउंटर की जानकारी दी है.

बतादें कि एनकाउंटर आमतौर पर दो तरह के होते हैं. पहला, जिसमें कोई अपराधी पुलिस की हिरासत से भागने की कोशिश करता है. दूसरा, जब पुलिस किसी अपराधी को पकड़ने जाती है और वो जवाबी हमला कर देता है. सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में पुलिस एनकाउंटरों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे. इसके मुताबिक हर एनकाउंटर की जांच जरूरी है. जांच खत्म होने तक इसमें शामिल पुलिसकर्मियों को प्रमोशन या वीरता पुरस्कार नहीं मिलता.

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