लखीमपुर खीरी का सच: संपादकीय व्यंग्य

PRAGYA KA PANNA
PRAGYA KA PANNA

देखिए दोस्तों उत्तर प्रदेश टोटल दिखावटी लिखावटी और छपावटी कानून व्यवस्था से चल रहा है..यहां कोई सवाल पूछने वाला नहीं है..सब पूछ हिलाने वाले हैं..इसीलिए नेता लाखों (Truth Of Lakhimpur Kheri) लोगों के सामने सीना ठोककर झूठ बोलते हैं..अगर कोई पूछने वाला होता तो अमित शाह..अजय मिश्रा टेनी को अपने मंच पर खड़ा करके ये झूठ बोलने की हिम्मत कभी नहीं करते कि यूपी में रात के 12 बजे भी लड़कियां गहने लादकर आ जा सकती हैं..

जब पत्रकार पूछ हिलाने वाले और समाज धर्म के नशे में होता है..तो झूठ का बोलबाला होता है और सच का मुंह काला होता है..जैसे लखीमपुर खीरी में हुआ…दो दो बच्चियों (Truth Of Lakhimpur Kheri) का रेप करके मारकर लटका दिया गया..मां कहती है..मेरी बेटियों को जबरन उठा ले गए..पुलिस कहती है..नहीं जबरन तो नहीं लेकर गए..दोस्त थे..बहला ले गए..रेप किया..रेप करने के बाद बच्चियों ने शादी की जिद की तो दरिंदों ने दो और को बुलाया..और मारकर टांग दिया..लड़कियों को उठाकर बिल्कुल नहीं ले गए..पुलिस ये बताकर प्रफुल्लित है कि नहीं जी उठाकर तो बिल्कुल नहीं ले गए..

सुनिए मिस्टर डीजीपी और उठाकर ले गए..बहलाकर ले गए…या गाड़ी पर बिठाकर ले गए..विषय ये नहीं है…विषय ये है कि दो बच्चियों का रेप हुआ है..और उनको आपके होते हुए भी..आपकी (Truth Of Lakhimpur Kheri) पुलिस के होते हुए भी..थाना दारोगा सिपाही होते हुए भी..तीन लड़कों की हिम्मत कैसे हो सकती है..लड़कियों का रेप करके मार देने की..ये कानून व्यवस्था है..ये पुलिसिंग है..पुलिस केवल मिट्टी से लदे ट्रकों से पैसे लेने के लिए रह गई है क्या..पुलिस केवल प्लॉटिंग की जमीनों से वसूली करने के लिए रह गई है क्या…

पुलिस केवल थानों में समझौतों से आने वाला माल पार करने के लिए रह गई है क्या..लोगों को घरों पर बुलडोजर चला चलाकर अपराधियों के मन में ये भय का माहौल बना पाए हैं आप लोग..आपने तो सुहेल, जुनैद, हफीजुल्लाह, करीमुद्दीन, आरिफ जैसों की चूड़ी टाइट कर दी थी..फिर कैसे किसी की हिम्मत हो सकती है जो दो दो (Truth Of Lakhimpur Kheri) बच्चियों को बेखौफ पेड़ से लटका दिया जा रहा है..और यूपी के मुख्यमंत्री से लेकर देश के गृह मंत्री तक सब कानून व्यवस्था का बखान करते नहीं थकते..ये है कानून अगर ये कानून है तो माफ करिएगा..जंगल राज ज्यादा इज बेटर देन राम राज..

बुधवार की शाम लखीमपुर खीरी (Truth Of Lakhimpur Kheri) के निघासन में शाम के 5 बजे..दो सगी बहनों के साथ अनर्थ होता है..एक ही घंटे के बाद..वो पेड़ में लटकी मिलती हैं..घर वाले न्याय के लिए सड़क पर बैठते हैं..और जिले के एसपी घर वालों को धमकाते हैं..ताकि जल्दी मामला सुलट जाए..

पुलिस पीड़ितों का मुंह जिसती तेजी से बंद कराती है..उतनी ही तेज तर्रात होती तो उत्तर प्रदेश की बदनामी होने से बच जाती..बच्चियां जान से ना जातीं.. अगर इतनी ही धमकियां अपराधियों (Truth Of Lakhimpur Kheri) को दी होती तो दो बहनें की जान ना जाती..एक बात और कि जो बेशर्म लोग ये बताते हैं कि पुलिस कहां कहां पहुंचेगी..तो उनको अभी बताए देती हूं..पुलिस को क्राइम होने के बाद लाशों का पोस्टमॉर्टम कराने के लिए तन्ख्वाह नहीं मिलती..पुलिस का काम पंचनामा कराना नहीं है..

पुलिस का काम जिंदा लोगों को सुरक्षा देना है..लाशों की सिक्योरिटी के लिए पुलिस को तन्ख्वाह नहीं मिलती..ये यूपी के मुख्यमंत्री की हेडक है..डीजीपी की हेडक है कि पुलिस क्राइम (Truth Of Lakhimpur Kheri) होने से कैसे रोके..हम सुरक्षित समाज चाहते हैं..इसीलिए हम अपनी कमाई से टैक्स देते हैं..इसीलिए हम वोट देने जाते हैं..इसीलिए हम सरकारें बदलते हैं..

घर वाले कुछ भी बताएं…लेकिन पुलिस का बताया हुआ ही आखिरी सत्य होता है..तो पुलिस का कहना है कि दुष्कर्म के बाद दोनों बहनों की हत्या की गई थी..वारदात में कुल छह लोग शामिल हैं..नामजद छोटू (Truth Of Lakhimpur Kheri) समेत छह आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं..आरोपियों में छोटू, सुहेल, जुनैद, हफीजुल्लाह, करीमुद्दीन, आरिफ शामिल हैं..

मेन साजिश कर्ता पड़ोस में रहने वाले छोटू है..उसी ने दोनों लड़कियों से सुहैल (Truth Of Lakhimpur Kheri) और जुनैद की दोस्ती कराई थी..रेप के बाद इसके बाद सबूत मिटाने के लिए दो आरोपियों कलीमुद्दीन और आरिफ को भी मौके पर बुलाया गया..जिन्होंने लड़कियों को फंदे पर लटकाने में मदद की..ताकि ये आत्महत्या का मामला लगे..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *