यूपी में कोरोना के 332 मरीज, किसानों को मिली बड़ी राहत, इस दिन होगा ‘लॉकडाउन’ पर फैसला

उत्तर प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए योगी सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है. सरकार ने 1 हज़ार आइसोलेशन बेड की व्यवस्था कर ली है. इतना नहीं अगर जरूरत पड़ी तो अस्पातल के पास की बिल्डिंग को भी स्वास्थ्य विभाग आइसोलेशन के लिए इस्तेमाल कर सकता है.

up yogi government fight against coronavirus lockdown
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सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश में इसे हर स्तर पर रोकने के लिए भारत सरकार की मदद से प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं. प्रदेश में आज 10 टेस्टिंग लैब सफलतापूर्वक कार्य कर रही हैं. प्रदेश में लॉकडाउन हटाने या जारी रखने का निर्णय केंद्र सरकार से विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा. 11-12 अप्रैल तक ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.

उन्होंने कहा कि तब्लीगी जमात के कारण अचानक कुछ परिस्थितियां बदली हैं. अब तक प्रदेश में जितने केस मिले हैैं उनमें आधे से अधिक जमातियों के हैं. जमातियों ने चिंता बढ़ा दी है. इसके बाद भी स्थिति हमारे कंट्रोल में है. कोरोना एक संक्रामक बीमारी है, जो पथ, मत, संप्रदाय, धर्म और मजहब नहीं देखती. बतादें कि यूपी में अबतक 332 केस हो गए हैं जिसमें 308 केस एक्टिव हैं. इसमें सबसे ज्यादा 176 जमाती हैं और नोएडा के 58 मरीज शामिल हैं. 21 मरीज ठीक हुए हैं और 3 लोगों की मौत हो चुकी है.

सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए निर्णय और उपायों की बदौलत ही इस पर अब तक कंट्रोल बनाया जा सका है और देश में कोरोना सेकेंड स्टेज पर रुक गया है. कोरोना से लड़ाई में शासन-प्रशासन और आमजन की सहभागिता के साथ ही मीडिया का रोल बहुत अहम है. जागरूकता पैदा करने में मीडिया की बड़ी भूमिका है.

अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने बताय कि यूपी में 6073 सैंपल टेस्ट में ये 5595 निगेटिव आए हैं. 1551 तब्लीगी जमात को लोग चिन्हित किए गए हैं. 259 के पासपोर्ट जब्त हो चुके हैं और 10803 एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. सरकार ने अब तक 17000 वाहन जब्त किए हैं. और अब तक 11728 कैदी छोड़े गए हैं.

वहीं कोरोना वायरस के इस संकट में योगी सरकार ने किसानों के लिए भी बड़ी राहत दी है. लघु और सीमांत किसानों को राहत देने के लिए ट्रैक्टरों से मुफ्त में खेतों की जोताई और बोआई कराने का फैसला लिया गया है. योजना के प्रथम चरण में लखनऊ, वाराणसी व गोरखपुर समेत 16 जिलों का चयन किया गया है. साथ ही सरकार तिलहन और दलहन के किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए सरसों, चना और मसूर की सरकारी खरीद भी कराई जाएगी.

इन जिलों के पात्र किसान अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारियों से मिलकर योजना का लाभ उठा सकते हैं. दूसरे चरण में बहराइच, बलरामपुर, देवरिया, कुशीनगर, श्रावस्ती, चंदौली, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर, मेरठ, चित्रकूट और बस्ती जिलों के छोटे किसानों को सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. बतादें कि जिन जिलों में कम से कम 75 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में सरसों, चना और मसूर की बोआई होगी. उनमें ही खरीद कराई जाएगी.

इसके लिए 2,64,225 मीट्रिक टन सरसों, 2,10,300 मीट्रिक टन चना और 1,02,185 मीट्रिक टन मसूर खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. सरकार ने सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4425 रुपये प्रति क्विंटल, चने का 4825 रुपये और मसूर का मूल्य 4800 रुपये निर्धारित किया है.

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