crossorigin="anonymous"> UP पंचायत चुनाव में निर्दलीयों ने मारी बाजी, BJP को मिलीं सिर्फ 23 प्रतिशत सीटें, देखें- Ulta Chasma Uc

UP पंचायत चुनाव में निर्दलीयों ने मारी बाजी, BJP को मिलीं सिर्फ 23 प्रतिशत सीटें, देखें-

उत्तर प्रदेश के 75 जिलों की 3,050 सीटों पर हुए जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव का फाइनल रिजल्ट आ गया है. पूरी ताकत झोंकने के बाद भी बीजेपी को इस बार जनता ने नकार दिया है. इसमें सपा को खूब फायदा हुआ है.

किस पार्टी को कितनी सीटें

जिला पंचायत चुनाव में बीजेपी को ज्यादातर जिलों में समाजवादी पार्टी (सपा) से कड़ी टक्कर मिली है. कई जगहों पर तो सपा के उम्मीदवार बीजेपी के उम्मीदवारों पर भारी पड़े हैं. यूपी के 75 जिलों में कुल 3050 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी और सपा से ज्यादा निर्दलीयों ने जीत दर्ज की है. 3047 सीटों में सपा 759, भाजपा 768, बसपा 319, कांग्रेस 125, रालोद 69, आप 64 और निर्दलीयों को 944 सीटें मिली हैं.

सबसे ज्यादा निर्दलीयों ने मारी बाजी

एक तरह से बीजेपी को महज 23 फीसदी सीटें ही मिली हैं जबकि उसे 77 फीसदी सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा है. निर्दलीयों को सबसे ज्यादा 944 सीटें मिली हैं इसका सबसे बड़ा कारण ये रहा है कि जीते हुए निर्दलीय प्रत्याशी बीजेपी से टिकट न मिलने से नाराज होकर चुनाव लड़े थे. इसी तरह समाजवादी पार्टी के भी कई सदस्यों को पार्टी का समर्थन न मिलने से नाराज होकर मैदान में उतरे और चुनाव जीत गए हैं.

किसी भी जिले में बीजेपी को बहुमत नहीं

इस बार समाजवादी पार्टी ने बीजेपी को कांटें की टक्कर दी है. सीएम योगी के गृह जनपद गोरखपुर में बराबर की टक्कर रही जबकि डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य के प्रयागराज और डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा के लखनऊ में बीजेपी को सपा ने कड़ी शिकस्त दी है. नतीजा ये रहा की यूपी के किसी भी जिले में बीजेपी को बहुमत नहीं मिल सका.

जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की स्थिति बीजेपी नहीं

पूर्वांचल में सपा ने एकतरफा जीत दर्ज की है और बीजेपी अपना घर भी नहीं बचा सकी. बीजेपी के कई बड़े नेता अपना वर्चस्व बचाने में भी नाकाम साबित हुए. यहाँ तक भी हिंदुत्व का झंडा फहराने वाली बीजेपी को अयोध्या, काशी, मथुरा, गोरखपुर जैसे धार्मिक स्थल वाले जिलों में भी करारी हार मिली है. किसी भी जिले में बीजेपी अपने दम पर जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की स्थिति में नहीं है. उत्तर प्रदेश के जिला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव में निर्दलीयों की भूमिका सबसे अहम रहेगी जो कि तय करेंगे कि अगला जिला पंचायत अध्यक्ष कौन चुना जाएगा?

इस पंचायत चुनाव के नतीजे ने बीजेपी को सोचने पर मजबूर कर दिया है. सत्ता में रहते हुए और बड़े बड़े दिग्गजों के चुनाव प्रचार करने के बाद भी 25 प्रतिशत सीटें न निकाल पाना अपने आप में एक बहुत शर्मनाक बात है वो भी उस समय जब अगले साल UP में विधानसभा चुनाव होने हैं.

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