UP: डॉक्टरों को 10 साल नौकरी करना जरूरी, बीच में छोड़ी तो देना होगा एक करोड़ हर्जाना, पढ़ें नई गाइडलाइन

कोरोना महामारी को देखते हुए उत्तर प्रदेश के डॉक्टरों को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा फैसला किया है. मेडिकल की नई गाइडलाइन जारी कर दी है.

UP Government Released New Guideline for medical
UP Government Released New Guideline for medical

नई गाइडलाइन के तहत पीजी करने के बाद डॉक्टरों को कम से कम 10 साल तक सरकारी अस्पतालों में सेवा देनी होगी. अगर कोई बीच में नौकरी छोड़ना चाहता है तो उसे एक करोड़ रुपए की धनराशि जुर्माने के तौर पर यूपी सरकार को भुगतान करना होगा. मतलब की अब पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर को तत्काल नौकरी ज्वाइन करनी होगी.

इसी के साथ पीजी के बाद सरकारी डॉक्टरों को सीनियर रेजिडेंसी में रुकने पर भी रोक लगा दी गई है. नए नियम में कहा गया है कि विभाग की ओर से इस संबंध में अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं जारी किया जाएगा. अगर कोई डॉक्टर बीच में ही पीजी छोड़ देता है तो उसे तीन सालों के लिए डिबार कर दिया जाएगा. इन तीन सालों में वो दोबारा एडमिशन नहीं ले सकते हैं.

बतादें कि यूपी के गांव-गांव में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुले हैं. ये केंद्र डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं. कई स्वास्थ्य केंद्र फार्मासिस्ट तो कई अन्य कर्मचारियों के भरोसे चल रहे हैं. इसके अलावा जिला मुख्यालयों पर बने अस्पतालों में भी डॉक्टर्स की कमी है. अब सरकार के इस फैसले से प्रदेश में डॉक्टरों की कमी की समस्या का समाधान होगा.

स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव की तरफ से नौ दिसंबर को आदेश जारी कर दिया गया. सभी अस्पतालों में आदेश पहुंच गया है. सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों को करीब 15 हजार से ज्यादा पद सृजित हैं। करीब 11 हजार डॉक्टर तैनात हैं. बतादें कि ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में एक साल नौकरी करने वाले एमबीबीएस डॉक्टर को नीट पीजी प्रवेश परीक्षा में 10 अंकों की छूट दी जाती है. दो साल सेवा देने वाले डॉक्टरों को 20 और तीन साल वालों को 30 नम्बर तक की छूट दी जाती है.

फिर ये डॉक्टर पीजी के साथ डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के दाखिला ले सकते हैं. हर साल सरकारी अस्पतालों में तैनात सैकड़ों एमबीबीएस डॉक्टर पीजी में दाखिला लेते हैं.

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