crossorigin="anonymous"> ट्विट डिलीट कराकर कुशल शासक कहलाएंगे - Ulta Chasma Uc

ट्विट डिलीट कराकर कुशल शासक कहलाएंगे

आम आदमी की कहीं कोई सुनने वाला नहीं है..कहीं कोई सुनवाई नहीं है..और जो लोग सोशल मीडिया पर कोरोना महामारी में दवा..टेस्ट..अस्पताल..और खराब व्यवस्थाओं से जुड़े ट्विट कर सरकार को आईना दिखा रहे हैं..सरकार को सचेत कर रहे हैं..सिस्टम की शिकायत सरकार से कर रहे हैं.. सरकार ने उनके ट्विट डिलीट करा दिए हैं..इसका मतलब तो यही हुआ कि सरकार नहीं चाहती कि इतिहास में कोई सरकार को इस नाकामी और इस त्रासदी के लिए याद करे..इतिहास नरेंद्र मोदी को कोरोना महामारी की चुनौती के समय नाकाम शासक के तौर पर याद करे..हो सकता है मेरी समझ छोटी हो..अगर मैं गलत हूं तो मुझे कमेंट में बताईये कि कोरोना महामारी से जुड़े भारत की खराब व्यवस्थाओं से जुड़ी चीजें सोशल मीडिया से हटाकर सरकार क्या साबित करना चाहती होगी..ये भी हो सकता है कि सरकार की इमेज की चिंता रखने वाले दूरदर्शी लोग चाहते हों कि आने वाली पीढ़ियां कोरोना को तो जानें लेकिन सरकार कोरोना में पूरी तरह से फेल हो गई थी ये ना जान पाए..हो सकता है कि इससे इतिहास में श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी कुशल शासक घोषित करने में कोई अड़चन ना आए..कोरोना आपदा में..इस आपातकाल जैसी स्थिति में कोरोना की नाकामियों के सबूत मिटाने से कुछ नहीं होगा..मेरी मेरी अपनी चुनी हुई भारत सरकार से अपील है कि ये समय लोगों को कोरोना से बचाने का है..देश का हर व्यक्ति आशंकित है..वो बच पाएगा या नहीं इस सवाल से डरा हुआ है..उसका नंबर कब आएगा इस सवाल से घिरा हुआ है..जो खराब व्यवस्था की तस्वीर आपको बता रहे हैं..आपतक पहुंचा रहे हैं..उनके ट्विट डिलीट कराने अवाला अगर समस्या को डिलीट करने पर फोकस करेंगे तो आपको किसी की छवि बनाने की जरूत नहीं पड़ेगी..अपनेआप जयघोष होने लगेंगे..अगर बाबार ने भारत के इतिहास को कुचलने की कोशिश में किताबें जलवाईं थीं..तो इतिहास बहुत क्रूर होता है..वो अगर किताबें जलाना भी दर्ज कर सकता है..तो कुछ भी दर्ज कर सकता है..इंटरनेशनल मीडिया को आप रिपोर्टिंग से रोक नहीं पा रहे हैं..विदेशों के अखबार और बेबसाईटें भारत की कोरोना के आगे लाचारी दिखा ही रहे हैं..शुतुर्मुर्ग के रेत में गर्दन डाल देने से खतरा कम खत्म नहीं हो जाता..रेत से गर्दन बाहर निकालिए..बहादुरों की तरह स्थितियों का सामना कीजिए..आपकी जय भी होगी..और कोरोना पर हमारी विजय भी होगी..

आज मेरा सवाल मेरे यूट्यूबर भाई बहनों से भी है..बहुत छोटा सा सवाल है..कि क्या जब कभी आप टेंशन में होते हैं..या आपके घर में संकट आया हो..अफरातफरी मची हो..तो क्या आप लोगों को ब्लॉग बनाने का..या वीडियो बनाने का..या कैमरा फेस करने का समय मिलता है या फिर आपका मन करता है..कि चलो कैमरे पर ज्ञान दिया जाए..घर वाले तो मरते ही रहते हैं..नहीं करता होगा..इंसानी प्रवृत्ति होती है..जब वो परेशान होता है..तो उसके रूटीन काम बाधित हो ही जाते हैं..आपके लिए आपकी ऑडियंस आपका परिवार है..देश के मुखिया के लिए देश उसका परिवार है..हमारे देश के मुखिया ने देश के मरते लोगों के लिए रैलियों वाला अपना शो बंद किया था..जवाब है नहीं..क्या हमारे देश के मुखिया ने श्मशान में जलती लाशों और चीखपुकार के बीच भी अवार्ड समारोह बंद किया जवाब है नहीं..सब छोड़ दीजिए क्या हमारे देश के मुखिया ने अपने ऑक्सीजन से तड़पते लोगों की आवाजों के बीच मन की बात का शो बाधित होने दिया..कि नहीं यार देश कठिन दौर से गुजर रहा है मैं नहीं करूंगा रिकॉरिडिंग फिकार्डिंग बहुत काम है मुझे..बहुत राज्यों के मुख्यमंत्रियों से जवाब तलब करने हैं..जवाब है..नहीं..यानी सिस्टम को किसी चीज की कोई टेंशन नहीं है..सिस्टम मौज में है..वो मजे ले रहा है..

ये वाला कोरोना पिछले वाले कोरोना से डबल खतरनाक है..कई राज्यों में लॉकडाउन है..लोगों की शादियां कैंसिल हैं..बर्थडे मुंडन तिलक गोदभराई..लोगों ने सब कैंसिल कर दिया है लेकिन देश के मुखिया अवार्ड समारोह तक कैंसिल नहीं कर पाए.. पंचायत शसक्तिकरण अवार्ड देना बहुत जरूरी थी..प्रधानमंत्री जी अवार्ड नहीं देते तो गांवों के मुखिया टाइप के लोगों की आत्मा कोरोना आपातकाल जैसी स्थिति में तड़पती रहती…आप देख रहे हैं कितना फर्जी का समय है देश के प्रधानमंत्री जी के पास..देश के प्रधानमंत्री जिनको पूरा देश संभालना है..जिन पर सवा सौ करोड़ देश के लोगों की जिम्मेदारी है..आंतराष्ट्रीय जिम्मेदारियां हैं..देश में हाहाकार की स्थितयों के बीच उनके पास पर्याप्त से ज्यादा समय है..मन की बात में कोई काम की बात नहीं हुई है..झूठ नहीं बता रहे हैं..मेरा वीडियो सुनने के बाद मन की बात सुन लीजिएगा..आपदा में घिरे किसी देश का बुद्धिमान राष्ट्रअध्यक्ष ऐसी मन की बातों में अपना समय व्यर्थ नहीं करता..असली बात तो तब होती कि अस्पताल में बेड ना मिलें तो किससे शिकायत की जाए ये बताते..3 हजार का ऑक्सीजन सिलेंडर 48 हजार का मिले तो कहां सिर पटका जाए ये बताते..जो हेल्थ कार्ड दिया गया था उसे दिखाकर कहां इलाज कराया जाए ये बताते..सरकारी सूची में लिस्टेड अस्पताल में बेड देने के नाम पर जब 1 लाख एडवांस रखवा लिए जाएं तो..किससे कहा जाए ये बताते..अस्पतालों में ऑक्सीजन ना हो तो कहां सिर पटक दिया जाए..रेमिडेसिविर के लिए किसके आगे गिड़गिड़ाया जाए..कोरोना इलाज के लिए फिक्स रेटकार्ड बताते.. मन की बात में कुछ नहीं बताया..अपने मन का गीत गाकर चले गए..अपने डॉक्टरों का प्रवचन सुनाकर चले गए..अगली रिकॉर्डिंग के लिए..मैं प्रधानमंत्री जी को जिम्मेदार नहीं ठहराती लेकिन मन की बात के प्रोड्यूसर ध्यान दें..देश राष्ट्रीय आपदा में घिरा है..अगली बार जब आब मन की बात डिजाइन करें तो होली दिवाली और आपदा वाले मन की बात में अंतर रखें..नेतिक शिक्षा की किताब बांचना ही मन की बात नहीं होता..प्रसार भारती वालों मेहनत करो..देश के प्रधानमंत्री से एंकरिंग कराते हो ध्यान रखो..

-----

-----

डिस्क्लेमर- संपादकीय व्यंग्य लेख/कविता में लेखक के अपने निजी विचार हैं..इस लेख का मक्सद किसी की भावनाओं को आहत करने का नहीं है..लेख में बातें सरल भाषा में बताई गई हैं..जो सत्य के करीब हैं..