सपा-बसपा ने पास कराया PM मोदी का ‘तीन तलाक बिल’

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों ने मिलकर तीन तलाक बिल पास करा दिया. बिल्कुल सही सुन रहे हैं आप. आप सारे लोग कहेंगे कि तीन तलाक बिल तो मोदी जी का प्रोजेक्ट था. सपा-बसपा विरोध कर रहे थे तो फिर अखिलेश और मायावती ने ती तलाक बिल को कैसे पास कराया ?

triple talaq bill passed in rajya sabha samajwadi party and bsp
triple talaq bill passed in rajya sabha samajwadi party and bsp

तो चलिए आज हम आपको तीन तलाक बिल पर हुए राजनीतिक खेल के बारे में समझाते हैं. तीन बार तलाक तलाक तलाक कहकर अपनी बेगम को छोड़ देना अब से अपराध माना जाएगा. लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी तीन तलाक बिल पास हो गया है.

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सपा-बसपा मुस्लिम मौलानाओं को दिखाती रही कि वो तीन तलाक के विरोध में डटकर खड़ी हैं. लेकिन जब वोटिंग की बारी आई तो भाग खड़े हुए. मतलब जब तीन तलाक बिल पर वोटिंग हो रही थी तो सदन से बाहर चले गए. वॉकआउट कर गए. मायावती के दाहिने हाथ सतीश चंद्र मिश्रा दिखाने के लिए बिल का खूब विरोध करते रहे लेकिन जब वोटिंग की बारी आई, मौलानाओं का साथ देने की आई, शरिया का साथ देने की आई तो भाग खड़े हुए.

जो मुस्लिम इनको बीजेपी से लोहा लेने वाला नेता समझते थे. इन्होंने ना बिल के खिलाफ वोट किया ना ही बिल के समर्थन में. मैदान छोड़ देना दुश्मन के आगे हथियार डाल देने के बराबर ही है. राम गोपाल यादव ने भी तीन तलाक बिल का आखिर तक विरोध किया लेकिन जब मौका बिल के खिलाफ वोट देने की आई तो चुपके से खिसक लिए.

मतलब ना तो वोटिंग में इन्होंने तीन तलाक का साथ दिया ना ही तीन तलाक का विरोध किया बल्कि निर्णायक घड़ी में सदन से ही गायब हो गए. यानी तीन तलाक पर मौन होकर बीजेपी के साथ खड़े हो गए. ये भी उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों के नंबर एक और नंबर दो के मसीहा हैं..इनके पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुलायम के नाम से मशहूर हो गए थे लेकिन तीन तलाक बिल पर ये मौलानाओं के साथ खड़े नहीं हो पाए.

राज्य सभा में बीजेपी का बहुमत नहीं है..बीजेपी के पास इतने वोट नहीं थे कि राज्य सभा में तीन तलाक बिल पास करा सके लेकिन वोटिंग में तीन तलाक बिल के समर्थन में पड़े 99 वोट और विरोध में पड़े 84 वोट. समाजवादी पार्टी के राज्यसभा में 12 सांसद हैं..मायावती के पास 4 राज्यसभा सांसद हैं.. 12 और 4 को तलाक के विरोध में पड़े 84 वोट में जोड़ दिया जाए तो हो जाते हैं 100 वोट यानी अगर सपा और बसपा सच में तीन तलाक बिल का विरोध करते तो तीन तलाक बिल राज्यसभा से पास नहीं होता.

तीन तलाक बिल को राज्यसभा में पास कराने में विपक्ष की भी बड़ी भूमिका रही, अगर ऐसा कहा जाए तो इसमें कुछ भी गलत नहीं होगा. कुल विपक्ष के 20 सांसद वोटिंग के दौरान राज्यसभा से गायब रहे. इस वजह से बहुमत का आंकड़ा 121 से कम हो गया. और ये बिल पास हो गया. बिल पास होने के बाद अब विपक्षी दल अपने ऐसे सांसदों से कारण बताने को कह रहे हैं. कांग्रेस ने अपने राज्यसभा सदस्यों से पूछा है कि आखिर पार्टी द्वारा व्हिप जारी करने के बाद भी सदस्य सदन में उपस्थित क्यों नहीं रहे.

खैर खुशी की बात ये है कि मोदी सरकार ने मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक, यानी जिसे आप तीन तलाक कह रहे हैं. उसे राज्यसभा में 84 के मुकाबले 99 मतों से पारित करा लिया है.