ट्रेन के ड्राइवर ने बताई उस दर्दनाक हादसे की कहानी, सुनकर दहल जायेगा दिल

दशहरा के मौके पर अमृतसर में एक बड़ा और दर्दनाक रेल हादसा हुआ. जिसमें 61 लोगों की कट कर मौत हो गई और 51 लोग बुरी तरह से जख्मी हुए है. रावण दहन कार्यक्रम देख रहे लोगों के ऊपर से दो ट्रेनें गुजर गईं. चारों तरफ खून ही खून फैला हुआ था. ऐसा मंजर देख वहां मौजूद सभी लोगों का दिल दहल गया. किसी को समझ नहीं आया की एक पल में ये क्या हो गया. हादसे के 2 दिन बाद ट्रेन के ड्राइवर ने इस हादसे को लेकर अपनी सफाई पेश की है.

ड्राइवर ने बताया, कैसे हुआ हादसा ?

train driver told the story of tragedy
फोटो सौजन्य से:- hindustan

हादसे को लेकर ड्राइवर ने कहा कि जिस समय ये हादसा हुआ, उस समय फाटक के पास रावण दहन हो रहा था. जिससे वहां लगभग अंधेरा छा चुका था और आस-पास भी धुआं छा गया था. तेज आतिशबाजी भी होने लगी. घटनास्थल पर रोशनी की भी व्यवस्था नहीं थी, रेल पटरियों पर खड़े होकर लोग रावण दहन देख रहे थे. मुझे कुछ दिखाई ही नहीं दिया.

रेलवे ने भी झाड़ा पल्ला

रेलवे ने भी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए कहा की इस हादसे में उसकी कोई गलती नहीं है, क्योंकि वहां आयोजित हो रहे कार्यक्रम के लिए न तो रेलवे से कोई मंजूरी ली गई थी और न ही रेलवे को इस बारे में कोई सूचना दी गई थी. रेलवे ने अमृतसर प्रशासन पर हादसे की जिम्मेदारी डालते हुए कहा की स्थानीय अधिकारियों को दशहरा कार्यक्रम की जानकारी थी, क्योकि उस कार्यक्रम में नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी ने भी शिरकत की थी.

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खुद रावण भी नहीं बचा पाया अपनी जान

train driver told the story of tragedy
फोटो सौजन्य से:- ndtv

इस भयानक हादसे की चपेट में सिर्फ रावण दहन देख रहे लोग ही नहीं बल्कि खुद रावण का किरदार निभा रहे दलबीर सिंह भी इसकी चपेट में आ गए. रेलवे ट्रैक पर खड़े लोगों की जान बचाते-बचाते दलबीर सिंह खुद भी अपनी जान गवां बैठे. वो रामलीला खत्म कर अपने घर 8 महीने के बेटे से मिलने निकल चुके थे. पर पटरी तक पहुंचते ही उनको सामने से आ रही ट्रेन दिखी, जिसके बाद वो वहां मौजूद लोगों को हटाने लगे. जिसमें वो अपने आपको भी नहीं बचा पाएं. दलबीर सिंह की मां का कहना है कि उनके बेटे दलबीर ने बहुत बहादुरी वाला काम किया है. साथ ही परिवार की मांग है कि दलबीर की पत्नी को सरकारी नौकरी मिले और हादसे के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा दी जाए.

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