विकास दूबे को BJP के ये गुरूजी पावर बूस्टर देते थे | VIKAS DUBEY KANPUR

क्या आपको मालूम है कि जब साल 2001 में विकास दूबे ने थाने के भीतर बीजेपी के राज्य मंत्री को गोली मारी थी तो किसी पुलिसवाले ने गावाही क्यों नहीं दी थी..हम बताएंगे..विकास दूबे का बीजेपी कनेक्शन क्या है वो भी बताएंगे..आज आपको विकास दुबे के गुरू से मिलवाएंगे और बीजेपी ने उसे कैसे पालपोसकर बड़ा किया वो भी बताएंगे..चलिए शुरू से शुरू करते हैं..

 

71 से ज्यादा केस लेकिन एसटीएफ की टॉप 25 की लिस्ट में उसकी जगह नहीं थी..71 से ज्यादा केस लेकिन थाने की लिस्ट में उसका नाम नहीं..71 से ज्यादा केस लेकिन कानपुर जिले की अपराधियों वाली टॉप लिस्ट में उसका नाम नहीं था..पुलिस उसके किले पर हाजिरी लगाती थी..नेताओं के लिए वो इच्छा पूरी करने वाली जिन था..जिस नेता को जो जमीन पसंद आती..विकास दिला देता.. 8 पुलिस वालों को मारने वाले विकास दूबे की कहानी 1990 से शुरू होती है..

जब वो बीजेपी के बड़े नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरिकिशन श्रीवास्तव के सम्पर्क में आया..हरिकिशन श्रीवास्तव ने पहली ही नजर में भांप लिया था कि लड़का गरम खून का है..राजनीतिक इच्छापूर्तियों के लिए वो बहुत काम आएगा विकास दूबे ने भी बीजेपी नेता और विधानसभा अध्यक्ष हरिकिशन श्रीवास्तव को अपना गुरू मान लिया..कहानी ये थी कि हरिकिशन श्रीवास्तव चौबेपुर से चुनाव लड़ते थे..

विकास दूबे उनके लिए ब्राम्हण वोटों की व्यवस्था करने लगा..हरिकिशन श्रीवास्तव का सिर पर हाथ था पैसा था..पुलिस विकास की जेब में थी इसलिए विकास ने छोटे मोटे अपराधियों को साथ में लेकर एक गैंग बना लिया….चौबेपुर, शिवली और बिल्हौर में विकास की तूती बोलने लगी..90 के दशक के अंत मे विकास ने झगड़ा होने पर कानपुर के एक डीएसपी अब्दुल समद को कमरे में बंद करके पीटा था..इससे उसका रसूख और भी कायम हो गया..

जितनी बार बीजेपी की सरकार आई उतनी बार विकास को पावर बूस्टर मिलता रहा..साल 2001 में राजनाथ सरकार में राज्य मंत्री की थाने में घुसकर हत्या की लेकिन किसी पुलिस वाले ने गवाही नहीं दी..क्योंकि पुलिस विकास के रहमोकरम पर पल रही थी..विकास पुलिस का मालिक था..

विकास दूबे का अपराध की दुनिया में एडमिशन बीजेपी के संरक्षण में हुआ..फिर अपराध की उच्च शिक्षा के लिए उसने बीएसपी में भी एडमीशन लिया..बसपा के राजाराम पाल और भगवती सागर को भी उसने कुछ समय तक अपना हेडमास्टर माना..लेकिन चुनाव लड़ा समाजवादी पार्टी का सहारा लेकर… जिला पंचायत सदस्य रहा पत्नी रिचा को जिला पंचायत चुनाव लड़ाया..

2005 में इस मर्डर केस से बरी कर दिया गया। बरी करने वाले जज एच एम अंसारी अगले ही दिन सेवानिवृत्त हो गए थे..तब बसपा सरकार कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट तक नहीं गई थी..कहते तो यहां तक हैं एक बीएसपी नेता ने विकास दुबे की चार्जशीट मंच से फाड़ दी थी..और तरह से विकास दूबे छात्र से अपाराधी और अपराधी से आतंकी बनने की राह पर कब निकल पड़ा उसे भी पता नहीं चला..

उसे अपनी ताकत पर इतना घमंड हो गया था कि पुलिस को वो मच्छर समझने लगा था..इस समय भी विकास दूबे पर काई नेताओं का हाथ था..हाथ ही नहीं था कई नेताओं की सिफारिश पर हथियारों के लाइसेंस भी मिले थे..क्या लाइसेंस देने वाले डीएम को नहीं पता था कि वो किसको हथियार का लाइसेंस दे रहा है..

क्या वेरिफिकेशन करने जाने वाली पुलिस को नहीं मालूम था विकास दूबे कौन है सबको सबकुछ पता था..8 पुलिसवालों की मौत की जिम्मेदार सत्ता और बगैर सत्ता वाले नेता हैं…गोलियां विकास दूबे ने चलवाई हैं लेकिन 8 पुलिसवालों को कानपुर की पुलिस ने मरवाया है..इस सच्ची कहानी में इतना ही.अगली सच्ची दास्तान में बाताएंगे कि उस रात साढे 12 बजे से 1 बजे के बीच की कहानी..

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