कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files Movie ) अधकचारे ज्ञान वाली डॉक्यूमेंट्री.. :संपादकीय व्यंग्य

PRAGYA KA PANNA
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कश्मीर फाइल्स..(The Kashmir Files Movie ) कश्मीरी पंडितों पर बनी एक ऐसी फिल्म..नहीं मैं इसे फिल्म कहूंगी को दर्शकों के साथ धोखा होगा..कश्मीर फाइल्स असल में एक डॉक्यूमेंट्री है जिसको हर आदमी अपने चश्मे से देख रहा है..कोई कहता है फिल्म में बहुत ज्यादा ओवर दिखाया गया है कोई कहता है कांग्रेस की सरकारों ने कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार होने दिए .

कोई कहता है 90 से लेकर अब तक 5 बार बीजेपी की सरकार रही अगर कश्मीर पंडित कश्मीर (The Kashmir Files Movie ) से भगाए गए तो बसाए क्यों नहीं गए..मैं अभी कुछ दिन पहले कश्मीर घूमकर आई हूं..मेरे अनुभवों से कश्मीर फाइल्स कितनी मिलती जुलती है..कितनी सच्ची है कितनी झूठी..और इसमें कितना प्रोपोगेंडा छिपा है…आज इसी पर बात करेंगे

पिक्चर किसने बनाई..जिसने बनाई उसको इस पिक्चर के बदले क्या क्या मिला..ये सब बताकर टाइम वेस्ट नहीं करूंगी..डायरेक्ट फिल्म पर आती हूं..फिल्म में दिखाया गया है कि कश्मीर के लोग भारत के लोगों को या आईएएस अफसरों को या मिलेट्री को इंडियन कहते हैं..तो ये बात सौ प्रतिशत सच है..कश्मीर के लोग भारत के हर नागरिक को इंडियन ही कहते हैं..और खुद को कश्मीरी कहते हैं .(The Kashmir Files Movie )

यहां तक के कश्मीरियों .(The Kashmir Files Movie ) के ज्यादातर बच्चे दिल्ली में पढ़ते हैं..जब उनसे मैंने पूछा कि आपके बच्चे कहां पढ़ते हैं तो उन्होंने कहा इंडिया में..ऐसा इसलिए है क्योंकि धारा 370 हटने के पहले तक..कश्मीर का अलग झंडा था..कश्मीर का अलग संविधान अलग न्याय व्यवस्था थी..जिसके कारण कश्मीरी खुद को भारत से अलग एक देश मानते थे..कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था..है और रहेगा इसमें किसी को कोई शक नहीं होना चाहिए..ये बात उनके लिए भी है जो अब भी ये सोच रहे हैं

कि वो पाकिस्तान या चीन में से जो अलगाववादियों का ज्यादा मदद करेगा उनके साथ चले जाएंगे..कश्मीर भारत का मस्तक है (The Kashmir Files Movie ) मैं कश्मीर में 6 दिन रही..ये बात मैं अपने उस 6 दिन के प्रवास के दौरान लोगों से बात करने के अनुभव के आधार पर कह रही हूं..

फिल्म में उस समय की मीडिया को..सच छिपाने वाला बताया गया है..मीडिया को गाली देकर कश्मीर फाइल्स .(The Kashmir Files Movie ) फिल्म में डारेक्टर साहब खुद राजा हरिश्चंद बने घूमते हुए दिखाई दिए..मारे गए कश्मीरी पंडितों का आकड़ा बढ़ाचढ़ाकर दिखाया..उसके पीछे का तर्क दिया कि तब ये आंकड़े छिपा लिए गए थे..जो वो बता रहे हैं वही सही है..फिल्म में 4 हजार कश्मीरी पंडितों का आतंकियों के हाथों मारा जाना दिखाया गया है..इसको साबित करने के लिए बस इतना कहा कि असली आंकड़ा यही है..सच छिपा लिया गया था.

अब जो फिल्म में बताया जा रहा है वही सही है..फिल्म 4 हजार के कश्मीरी पंडितों का मारा जाना बताती है .(The Kashmir Files Movie ) ..सरकार 2 सौ 19 तक भी मुश्किल से पहुंच पाती है..आरएसएस पब्लिकेशन 6 सौ तक पहुंच पाता है..कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति 650 तक पहुंच पाती है..कश्मीर फाइल्स वाले विवेक अग्निहोत्री 4 हजार तक पहुंच जाते हैं..ये आंकड़ा कहां से लाए..इसका जवाब है..अनुमान से..इसीलिए इस फिल्म को लोग प्रोपोगेंडा बता रहे हैं..एक भी कश्मीर पंडित भाई की हत्या भारत के किसी भी नागरिक को बर्दाश्त नहीं है लेकिन जब 1990 में कश्मीरी पंडितों को आतंकियों ने मारा कश्मीर से भगाया..उनका धर्म कन्वर्ट किया..

तब भारत देश में बीजेपी समर्थित वीपी सिंह की ही सरकार थी..उसके बाद 3 बार अटल विहारी और 2 बार नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री रहे..धारा 370 हटाई..लेकिन कश्मीरी पंडितों के लिए क्या किया कुछ नहीं..धारा 370 हट गई लेकिन आजतक कोई भारतीय कश्मीर .(The Kashmir Files Movie ) में जमीन नहीं खरीद पाया..कोई प्लाट नहीं ले पाया..कोई कश्मीर से ब्याह नहीं कर पाया..

कश्मीर फाइल्स फिल्म .(The Kashmir Files Movie ) कम अधकचरे ज्ञान की डॉक्यूमेंट्री ज्यादा लगती है..फिल्म में बीजेपी सपोर्टिंग एंगल बहुत चालाकी से घुसाए गए हैं..फिल्म में जितने बड़े विलेन आतंकी बताए जाते हैं..उसी तरह की खलनायक तब की भारत सराकर को भी बताया गया है.जिसने कश्मीर को लावरिस छोड़ दिया है..

एक बात और अगर आप फिल्म देखने के मूड से थियेटर जा रहे हैं..तो कश्मीर फाइल्स .(The Kashmir Files Movie ) में आपको पहले ही सीन से निराशा हाथ लगेगी..फिल्म की सुस्त चाल से आप भरपूर बोर होंगे..फिल्म का हीरो कौन है..अनुपम खेर..उनके दोस्त या फिर अनुपम खेर के बेटे का बेटा समझ में ही नहीं आता है..हर पिक्चर की तरह अगर ये गलत फहमी पालकर बैठेंगे कि हीरो कुछ करेगा तो आप बैठे ही रहेंगे.क्रूरता की जो इम्तेहा दिखाई गई है फिल्म में वही जानदार सीन हैं..

अगर आप इंटरटेनमेंट के मूड से किसी फिल्म का टिकट खरीदने की सोच रहे हैं तो कश्मीर फाइल्स .(The Kashmir Files Movie ) आपके लिए नहीं है..ऐसा नहीं है कि कश्मीर फाइल्स खराब डॉक्यूमेंट्री है..अच्छी है..जो बातें फिल्म में हैं वो कश्मीर जाते ही पहले ही दिन आपको देखने को मिलेंगी..फिल्म रिसर्च के नाम पर जीरो है..जो दिखाया गया है वो सब अखबारों और किताबों में मौजूद है..कश्मीरी खुद को कश्मीरी और भारत के लोगों को इंडियन कहते दिखाए गए हैं..कश्मीर में आज भी भारत के दूसरे हिस्से के लोगों को कश्मीरी इंडियन ही कहते हैं..खैर फिल्म में किसी को हीरो प्रोजेक्ट किया गया होता..तो और अच्छा हो सकता था..पूरी फिल्म में सेना का रोल कहीं नहीं दिखाया गया है..जो 808 परिवार कश्मीर से कभी नहीं गए उनके बारे में कुछ नहीं दिखाया..

फिल्म में सब्जी वाला अनुपम खेर को जिन्ना वाली नोट देता है..अनुपम खेर गांधी वाली नोट मांगते हैं..ये फिल्म 80 से 90 के बीच की कहानी है..1996 से पहले तक अशोक स्तंभ वाली नोट भारत में चलती थी..अनुपम खेर गांधी वाली नोट क्यों मांग रहे थे..फिल्म में अनुपमखेर के दोस्त नीले रंग की मारुती बलीनो में आते हैं..क्या तब मारुति ने बलीनो लॉन्च कर दी थी..खैर फिल्म निराश इसलिए करती है..क्योंकि डॉक्यूमेंट्री फॉर्म में बनाई गई है .(The Kashmir Files Movie )

इससे दर्शक ये आशा करते हैं जो दिखाया जा रहा है वो सच दिखाया जा रहा है..लेकिन जब उसमें आंकड़ों से हेरफेर दिखाई देता है.तो निराशा हाथ लगती है..ये फिल्म गहरी रिसर्च की मांग कर रही थी..जो नहीं की गई..जब आप पूरी फिल्म देखेंगे तो पाएंगे कि इस फिल्म से माइंडसेट तैयार करने की कोशिश की गई..हमारी सरकारों से अपील है..कि कश्मीरी पंडितों के साथ इतनी निर्दयिता से कश्मीर में जुल्म हुए तो..एक एक कश्मीरी पंडित को कश्मीर .(The Kashmir Files Movie ) में बसाया जाए..उनको उनका हक दिलाया जाए..अगर सरकार को अब तक कश्मीरी पंडितों का दर्द नहीं मालूम था..तो विवेक अग्निहोत्री की कश्मीर फाइल्स देखकर कश्मीरी पंडितों के हक में कदम उठाएं

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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