हिंदू पक्ष को ज्ञानवापी मस्जिद में दिखा शिवलिंग..शिवलिंग वाली जगह सील..वजू पर पाबंदी लगी 20 लोग ही पढ़ सकते हैं नमाज..जानिए ज्ञान वापी मस्जिद का पूरा इतिहास

वाराणसी : वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में सर्वे का काम 16 मई 2022 को पूरा हो गया । कल 17 मई 2022 को कोर्ट में रिपोर्ट सौंपी जाएगी। मस्जिद से निकलने के बाद हिंदू पक्ष के वकीलों की ओर से शिवलिंग मिलने का दावा किया जा रहा है… तो वहीं सबसे पहले हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने दावा किया कि हमें कुएं में शिवलिंग मिला है. इसके थोड़ी देर बाद हिंदू पक्ष के वकील मदन मोहन यादव ने कहा कि वजुखाने में 12 फीट 8 इंच का शिवलिंग मिला है…
उत्तर प्रदेश की अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद के उस तालाब को बंद करने का आदेश दिया है, जहां पर “शिवलिंग” पाया गया है. जानकारी के अनुसार ज्ञानवापी मस्जिद के ऊपरी हिस्से में जहां नमाज पढ़ी जाती है, उसके पास वजू करने की एक जगह है. वहां एक छोटा – सा तालाब है. इस तालाब में एक शिवलिंग मिलने की बात कही जा रही है. शिवलिंग मिलने के बाद हिंदू पक्ष जिला अदालत पहुंचा था, जहां इसको संरक्षित करने की बात कही गई. बनारस कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा है कि जिस जगह शिवलिंग मिला है, उस स्थान को सील किया हैं कोर्ट ने शिवलिंग मिलने वाली जगह पर किसी के भी आने जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है.

पूरा विवाद जान लीजिए
ज्ञानवापी विवाद को लेकर हिन्दू पक्ष का दावा है कि इसके नीचे 100 फीट ऊंचा  स्वयंभू विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का अंश है।  काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करीब 2050 साल पहले महाराजा विक्रमादित्य ने करवाया था, लेकिन मुगल सम्राट औरंगजेब ने साल 1664 में मंदिर को तुड़वा दिया गया था। कि मस्जिद का निर्माण मंदिर को तोड़कर उसकी भूमि पर किया गया है जो अब ज्ञानवापी मस्जिद के रूप में जाना जाता है।

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि ज्ञानवापी परिसर से संबंधी सर्वेक्षण कर.. ये पता लगाया जाए कि जमीन के अंदर का भाग मंदिर का अवशेष है या नहीं। साथ ही विवादित ढांचे का फर्श तोड़कर ये भी पता लगाया जाए कि 100 फीट ऊंचा ज्योतिर्लिंग स्वयंभू विश्वेश्वरनाथ भी वहां मौजूद हैं या नहीं। मस्जिद की दीवारों की भी जांच कर पता लगाया जाए कि ये मंदिर की हैं या नहीं।
इन्हीं दावों पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करते हुए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की एक टीम बनाई हैं । इस टीम को ज्ञानवापी परिसर का सर्वे करने के लिए कहा गया था। सोमवार (16 मई 2022 ) को सर्वे का काम पूरा हो गया।

इस विवाद को लेकर अब तक क्या-क्या हुआ ?

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी केस में 1991 में वाराणसी कोर्ट में पहला मुकदमा दाखिल हुआ था। याचिका में ज्ञानवापी परिसर में पूजा की अनुमति मांगी गई।

मुकदमा दाखिल होने के कुछ महीने बाद सितंबर 1991 में केंद्र सरकार ने पूजा स्थल कानून बना दिया। ये कानून कहता है कि 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता।

2018 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था, कि किसी भी मामले में स्टे ऑर्डर की वैधता केवल छह महीने के लिए ही होगी। उसके बाद ऑर्डर प्रभावी नहीं रहेगा।

6 मई को पहले दिन का ही सर्वे हो पाया था, लेकिन 7 मई को मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया। मामला कोर्ट पहुंचा।

12 मई को मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने कमिश्नर को बदलने की मांग खारिज कर दी और 17 मई तक सर्वे का काम पूरा करवाकर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।

14 मई को सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिका में ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

16 मई को सर्वे का काम पूरा हुआ। हिंदू पक्ष ने दावा किया कि कुएं से बाबा मिल गए हैं। इसके अलावा हिंदू स्थल होने के कई साक्ष्य मिले। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने कहा कि सर्वे के दौरान कुछ नहीं मिला। अब इस मामले में 17 मई को सुनवाई होगी।

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