सत्य की जीत..जुबैर को जमानत..जज बोले शक्ति का प्रयोग संयम से कीजिए..

PRAGYA KA PANNA
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ब्रह्ममांड में मौजूद सरकारी..गैर सरकार..अर्ध सरकारी..प्रोपेगेंडा धारी जैसी सारी शक्तियों के झूठ पकड़ने वाले..फैक्ट चेक करने वाले पत्रकार जुबैर को सभी केसेज में (Zubair Gets Bail) जमानत मिल गई है…यूपी के 5 जिलों में एक जैसी 6 FIR करके जुबैर को एक के बाद दूसरे जिले दूसरे के बाद तीसरे जिले में टहलाया जा रहा था..और इन्हीं FIR के बल पर जुबैर को जेल में रखा जा रहा था..

हर आदमी जबरन इस्तेमाल किए जा रहे इस कनूनी फंदे को जानता था..लेकिन बोले कौन भईया..जब कोई नहीं बोला तो आज सुप्रीम कोर्ट ने ही बोल दिया कि गिरफ्तारी (Zubair Gets Bail) की शक्ति का प्रयोग संयम से किया जाना चाहिए. जुबैर को अंतहीन समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता..कोर्ट खेल सब समझता है जानता सब है..लेकिन वही बात है कि कानून अंधा है..उसे जो दिखाओगे वही देखेगा..

सुप्रीम कोर्ट में यूपी पुलिस ने जुबैर की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मि लॉर्ड जुबैर की जमानत पर ये शर्त लगाई जाए कि..जमानत पर जब जुबैर बाहर जाएंगे तो ट्विटर पर कुछ नहीं लिखेंगे..इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने रहा..ये कैसे हो सकता है ये तो वही बात हो गई कि हम कह दें कि वकील बहस नहीं करेगा..सुप्रीम कोर्ट (Zubair Gets Bail) ने साफ कहा कि हम किसी पत्रकार को कैसे कह सकते हैं कि वो नहीं लिखेगा.. सुप्रीम कोर्ट ने कहा हम नहीं कह सकते कि वो फिर ट्वीट नहीं करेंगे…

इस पर यूपी सरकार की तरफ अडिशनल एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद ने कहा कि ये शर्त लगाई जाए कि जुबैर सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेंगे..इस पर भी जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सबूत तो पब्लिक डोमेन में हैं..उसको कोई क्या छेड़ेगा..कुल मिलाकर यूपी पुलिस ने जमानत ना देने के सभी पैंतरे आजमा लिए लेकिन सुप्रीम कोर्ट (Zubair Gets Bail) में कोई पैतरा काम नहीं आया.. सुप्रीम कोर्ट से जुबैर को जमानत मिली और सारे केस एक में क्लब कर दिए गए..और सारे केस दिल्ली ट्रांसफर कर दिए..सभी FIR अभी रद्द नहीं हुई हैं..सुप्रीम कोर्ट ने FIR रद्द करवाने के लिए हाई कोर्ट जाने के लिए कहा..

दोस्तों FIR क्लब होने का मतलब है कि सभी मामले अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ चलेंगे.. इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने जुबैर के ट्वीट्स की जांच के लिए यूपी सरकार की तरफ से बनाई गई एसआईटी (Zubair Gets Bail) को भी भंग कर दिया है..कोर्ट ने कहा कि FIR ट्रांसफर करने का आदेश न सिर्फ मौजूदा सभी FIR पर लागू होगा बल्कि इस मुद्दे को लेकर भविष्य में दर्ज होने वाले FIR पर भी लागू होगा..अब ऐसा नहीं चलेगा की कल जुबैर अपने दफ्तर में बैठे हों और बांदा के अतर्रा में एक और FIR दर्ज हो जाए और पुलिस उनको टांग ले जाए..कि चलो जांच करते हैं..ये नहीं चलेगा..

दोस्तों जुबैर के खिलाफ उत्तर प्रदेश के 5 जिलों में 6 एफआईआर दर्ज हैं..जिनमें हाथरस में 2..गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, सीतापुर, लखीमपुर खीरी में 1-1 FIR दर्ज है..ये सभी मामले अब एक साथ चलेंगे..यूपी सरकार ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि जुबैर को भड़काऊ (Zubair Gets Bail) ट्वीट के बदले पैसे मिलते थे…

पोस्ट या ट्वीट जितना भड़काऊ होता था, पैसे भी उतने ही ज्यादा मिलते थे…यूपी पुलिस को सूचित करने के बजाय वो उन वीडियो और भाषणों का लाभ उठाते हैं जो सांप्रदायिक विभाजन पैदा कर सकते हैं.सरकार ने ये भी कहा कि जुबैर (Zubair Gets Bail) को हर महीने 12 लाख रुपये मिलते हैं..यूपी सरकार की तरफ से कहा गया कि “ट्वीट के लिए खुद जुबैर ने माना है कि उन्हें 2 करोड़ रुपये मिले.”

कोर्ट में जुबैर (Zubair Gets Bail) की तरफ से कहा गया कि उसके ट्वीट की भाषा उकसावे की दहलीज पार नहीं करती. पुलिस ने उसके खिलाफ जो FIR दर्ज की है, उसमें कहा गया है कि मैंने वैश्विक स्तर पर मुसलमानों को उकसाया है..जबकि मैंने पुलिस को एक नागरिक के रूप में कार्रवाई करने के लिए टैग किया था..तो दोस्तों सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं हो सकता..झूठ का फैक्ट चेक करने वाले जुबैर को 20 हजार के मुचलके पर जमानत मिल गई है..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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