विवादित भूमि पर बनेगा राम मंदिर, मुस्लिम पक्ष को मिलेगी अलग जमीन, पढ़ें सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

आज शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे बड़े विवादित रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले पर अपना आखिरी फैसला सुना दिया है. और आज बाबर के जमाने से चला आ रहा विवाद ख़त्म हो गया है.

supreme court Final verdict on ayodhya land case
supreme court Final verdict on ayodhya land case

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने आज शनिवार को 10:30 बजे अपना फैसला पढ़ना शुरू किया. जजों ने फैसला शुरू करते ही सबसे पहले शिया वक्फ बोर्ड की याचिका को ख़ारिज कर दिया था. सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि हम 1946 के फैजाबाद कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली शिया वक्फ बोर्ड की सिंगल लीव पिटिशन (SLP) को खारिज करते हैं.

विवादित जमीन राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी जमीन थी. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. बाबरी मस्जिद मीर बाकी ने बनवाई थी. मुख्‍य ढांचा पर कोई इस्लामी संरचना नहीं थी.

इसके बाद निर्मोही अखाड़े के दावे पर फैसला सुनाते हुए शीर्ष अदालत ने पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर भरोसा जताया और अदालत ने निर्मोही अखाड़ा के दावे को खारिज कर दिया. निर्मोही अखाड़ा का दावा केवल प्रबंधन का है. निर्मोही अखाड़ा सेवादार नहीं है.

बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी. एएसआई के मुताबिक मंदिर के ढांचे के ऊपर ही मस्जिद बनाया गया था. बाबरी मस्जिद के नीचे कोई इस्लामिक प्रतिमा नहीं थी. खुदाई में कोई इस्लामिक ढांचा नहीं मिला ASI ने अपनी रिपोर्ट में मस्जिद का कोई जिक्र नहीं किया. ढहाए गए ढांचे के नीचे एक मंदिर था, इस तथ्य की पुष्टि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) कर चुका है.

वहीं अंग्रेजों के आने से पहले राम चबूतरा, सीता रसोई पर हिंदुओं द्वारा ही पूजा की जाती थी. दर्ज सबूतों से पता चलता है कि हिंदुओं का विवादित भूमि के बाहरी हिस्‍से पर कब्‍जा था. अंग्रेजों ने कहा एक रेलिंग बनवाई थी. ताकि हिन्दू पूजा और मुश्लिम नमाज़ पढ़ सकें. मुस्लिम शुक्रवार को विवादित स्‍थल पर नमाज पढ़ते थे. लेकिन पुरातत्व सुबूत हिन्दुओं के पक्ष में हैं.

हिंदुओं की आस्था और उनका विश्वास है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था. हिंदुओं की आस्था और विश्वास है कि भगवान राम का जन्म गुंबद के नीचे हुआ था. ये व्यक्तिगत विश्वास का विषय है.

अदालत ने कहा कि रामजन्मभूमि कोई व्यक्ति नहीं है, जो कानून के दायरे में आता हो. आस्था के आधार पर फैसले नहीं लिए जा सकते हैं. ये विवाद सुलझाने के लिए सांकेतक जरूर हो सकते हैं.

सुन्नी वक्फ बोर्ड अयोध्या विवाद में अपना दावा रखने में विफल हुआ है. मुस्लिम पक्ष ऐसे सबूत पेश करने में विफल रहा है कि विवादित जमीन पर सिर्फ उसका ही अधिकार है. इसलिए मुस्लिमों को मस्जिद बनाने के लिए एक अलग वैकल्‍प‍िक जगह दी जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश देते हुए कहा कि वो तीन से चार महीने के भीतर सेंट्रल गवर्नमेंट ट्रस्ट की स्थापना करें और योजना बनाए फिर विवादित स्थल को मंदिर निर्माण के लिए सौंप दे. साथ ही अयोध्या में पांच एकड़ वैकल्‍प‍िक जमीन सुन्नी वक्‍फ बोर्ड को प्रदान करे.

कोर्ट ने कहा कि 02.77 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के अधीन ही रहेगी. साथ ही निर्मोही अखाड़े को मंदिर के लिए बनाए जाने वाले ट्रस्ट में जगह दी जाएगी.

बतादें कि इससे पहले अयोध्या विवाद पर बड़ा फैसला 30 सितंबर 2010 को आया था. जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीन जजों की पीठ ने 2.77 एकड़ की विवादित भूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांट दिया था. मुस्लिमों, रामलला और निर्मोही अखाड़े के बीच ये जमीन बांटी गई थी. लेकिन पक्षकार इस फैसले से संतुष्ट नहीं हुए और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.

अयोध्या मामले पर फैसला करने वाली पांच सदस्यीय पीठ में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर भी शामिल हैं.

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