आपराधिक उम्‍मीदवारों का पूरा रिकॉर्ड जनता को बताएं पार्टियां, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जानें- क्या कहता है कानून ?

देश की राजनीति में कितने नेता सही और कितने नेता अपराधी हैं इसका किसी को पता नहीं चल पता था. लेकिन अब आपको हर नेता के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी. आज उच्चतम न्यायालय ने राजनीतिक दलों को एक सख्त निर्देश दे दिया है.

supreme court directs political parties upload candidates criminal records
supreme court directs political parties upload candidates criminal records

राजनीतिक क्षेत्र में बढ़ते अपराधीकरण को रोकने का प्रयास काफी पहले से किया जा रहा है. लेकिन पिछले चार राष्ट्रीय चुनावों में राजनीति के अपराधीकरण में काफी ज्यादा वृद्धि देखने को मिली है. इसपर कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए तमाम राजनीतिक पार्टियों को निर्देश दिया कि आपराधिक बैकग्राउंड वाले उम्‍मीदवारों का चयन करने के 48 घंटों के भीतर उनकी पूरी प्रोफाइल पार्टी की वेबसाइट पर अपलोड करें.

साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी इस बात की अनुमति दी है कि इन निर्देशों का पालन नहीं किए जाने पर मामले को कोर्ट के संज्ञान में लाया जाए. मतलब कि अगर पार्टियों ने कोर्ट के निर्देश का पालन नहीं किया तो चुनाव आयोग इस मामले को कोर्ट तक ले आएगी.

कोर्ट ने राजनीतिक दलों को अखबारों, सोशल मीडिया और अपनी वेबसाइट पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के चयन का कारण बताते हुए वेबसाइट पर उनका परिचय पत्र, उपलब्धियां और उनके अपराध का विवरण प्रकाशित करने का भी निर्देश दिया है. वहीं कोर्ट ने आगे कहा कि उम्मीदवारों का चयन योग्यता के आधार पर होना चाहिए, न कि जीतने के आधार पर. जीतने की काबिलियत तर्कसंगत नहीं हो सकता.

एक बात और कि अगर पार्टी किसी दागी नेता को टिकट देती है तो उसका विवरण तो देना ही होगा लेकिन ये भी बताना होगा कि किसी बेदाग को टिकट क्यों नहीं दिया गया.

अब समझिये क्या कहता है कानून-

जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-आठ(1) और (2) के अंतर्गत प्रावधान है कि अगर कोई विधायिका सदस्य (सांसद या विधायक) हत्या, दुष्कर्म, अस्पृश्यता, विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम के उल्लंघन, धर्म, भाषा या क्षेत्र के आधार पर शत्रुता पैदा करना, भारतीय संविधान का अपमान करना, प्रतिबंधित वस्तुओं का आयात या निर्यात करना, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होना जैसे अपराधों में लिप्त होता है, तो उसे इस धारा के अंतर्गत अयोग्य माना जाएगा और 6 साल के लिये अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा.

धारा आठ(3) में प्रावधान है कि उपर्युक्त अपराधों के अलावा किसी भी अन्य अपराध के लिये दोषी ठहराए जाने वाले किसी भी विधायिका सदस्य को अगर दो वर्ष से ज्यादा के कारावास की सजा सुनाई जाती है तो उसे दोषी ठहराए जाने की तिथि से अयोग्य माना जाएगा. ऐसे व्यक्ति सजा पूरी किए जाने की तारीख से 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे.

धारा आठ(4) के अनुसार अगर दोषी सदस्य निचली अदालत के इस आदेश के खिलाफ तीन महीने के भीतर हाईकोर्ट में अपील दायर कर देता है तो वो अपनी सीट पर बना रह सकता है.

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