देश भर में आज और कल श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम, एक झलक देखने को बेताब हैं भक्त

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियों को लेकर बृहस्पतिवार से ही घरों, मंदिरों से लेकर बाजारों तक में रौनक है. वहीं इस बार अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र की चर्चा के बीच कान्हा आज शुक्रवार और शनिवार दोनों दिन जन्मेंगे.

sri krishna janmashtami mahotsav will starts today
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान, द्वारिकाधीश, गोकुल, वृंदावन के इस्कान, चंद्रोदय, राधारमण मंदिर, बिहारीजी मंदिर, नंदभवन, नंदगांव और प्राचीन केशवदेव मल्लपुरा मंदिर सहित कई मंदिरों में देश के हर कोने से और हर मिजाज के लोगों का आगमन शुरू हो चुका है. मथुरा में पहली बार सरकारी स्तर पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को खास बनाया जा रहा है. इसके लिए भगवान कृष्ण की जन्म और लीला भूमि मथुरा को खास तरीके से सजाया गया है. यहां तीन दिवसीय आयोजन होंगे.

वहीं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर वृंदावन में आने वाले भक्तजन हेलीकॉप्टर से भी नगर की परिक्रमा कर सकेंगे. प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्य के पुत्र योगेश मौर्य ने एक निजी हेलीकॉप्टर कंपनी द्वारा छटीकरा मार्ग स्थित एक ओमैक्स सिटी में हवाई परिक्रमा सेवा का शुभारंभ किया है. पंचकोसीयपरिक्रमा चार सीटर हेलीकॉप्टर से मात्र 10 मिनट में पूरी हो जाएगी. इसका किराया प्रति व्यक्ति 4 हजार रुपये लिया जाएगा.

महोत्सव को लेकर तैयारियां अंतिम दौर में चल रही हैं. ज्योतिषियों के मुताबिक, गृहस्थों के लिए व्रत पूजन जन्माष्टमी शुक्रवार को और वैष्णवजनों के लिए शनिवार को मनाना अच्छा और शुभ रहेगा.

लखनऊ में भी तैयारियां जोरों पर हैं, पुलिस लाइन, खाटू श्याम धाम, ठाकुरद्वारों झांकियों की सजावट बृहस्पतिवार रात तक अंतिम चरण में रहीं और बाजारों में लोग कान्हा के सजावटी वस्त्र, झूले, लड्डू गोपाल खरीदने को बाजारों में जुटे रहे. डालीगंज मानस मंदिर में शुक्रवार को उत्सव मनाया जायेगा. माधव मंदिर में तीन दिवसीय उत्सव की शुरुआत हो चुकी है. खाटूश्याम धाम, इस्कान शहीद पथ मंदिर में शनिवार दोपहर 12 बजे से दो दिवसीय जन्माष्टमी उत्सव की शुरुआत होगी. वहीं गणेशगंज में डिजिटल झांकी 24 से दिखाई जाएँगी.

पूजन विधि-

जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि में शंख ध्वनि के साथ श्रीकृष्ण प्रतिमा की पूजा करनी चाहिए. नंद गोपाल या लड्डू गोपाल को पंचगव्य (दूध, दही, घी, जल और मधु) से स्नान कराने के बाद उन्हें पालने में विराजें. नए कपड़े और आभूषणों से शृंगार कर पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन और पंचजीरी नैवैद्य का भोग लगाएं. जन्मोत्सव के समय नाल वाले खीरे को अर्पित कर गोपाल का कीर्तन करें. भगवान श्री कृष्ण के मंत्र जप या स्रोत का पाठ करें, कपूर से आरती करें और जाने अनजाने में हुई गलतियों की क्षमा प्रार्थना करें.

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