साइबेरियन पक्षी कुंभ के तट पर क्यों आते हैं- फोटो गैलरी

 

प्रयागराज में कुंभ मेले में आए साइबेरियन पक्षियों की कहानी

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ये साईबेरियन पक्षी अक्टूबर महीने में संगम में आते हैं और गर्मियां शुरू होते ही साइबेरिया लौट जाते हैं.

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साइबेरिया से आए हैं और दो से तीन महीने के बाद फिर हजारों किमी की उड़ान के बाद अपने अपने वतन साइबेरिया लौट जाएंगे..लेकिन इनमें से ज्यादातर पक्षी भारतीय जमीन पर पैदा हुए हैं.

 

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भारत में प्रवास के दौरान ये परिंदे यहीं अंडे देते हैं और जब अपने वतन लौटते हैं तो इनके परिवार में नए मेहमानों का आगमन हो चुका होता है

 

जिस जगह साइबेरिया से ये पक्षी आते हैं वो भारत से क़रीब चार गुना बड़ा है. साइबेरिया का मौसम और भौगोलिक स्थिति इतनी सख़्त है के वहां केवल 4 करोड़ लोग रहते हैं..

 

 

साइबेरिया के पक्षी भारत इसलिए आते हैं क्योंकि रूस के साइबेरिया की करारी ठंड इनसे बर्दाश्त नहीं होती

 

 

जब साइबेरिया में ठंड का मौसम  होता है तो ये पक्षी हजारों मील का सफर तय करके भारत आ जाते हैं.. इन पक्षियों का शरीर गरम वातावरण से अनुकूलित है और साइबेरिया में ठंड के मौसम जीना नामुमकिन हो जाता है.

 

ये आजतक रहस्य है कि इनको भारत के रास्ते की जानकारी कैसे होती है..कुछ पक्षी तो हर साल एक ही गांव के एक ही पेड़ पर अंडे देते हैं..दूसरी रोचक बात ये है की इनके जो बच्चे गंगा के तटों पर पैदा होते हैं.. वो वापस साइबेरिया आसानी से पहुंच जाते हैं जबकि वो ये रास्ता पहली बार तय कर रहे होते हैं.

 

 

इन नावों पर चढ़कर लोग पक्षियों को खिलाने के लिए चारा फेंकते हैं और पक्षी टूट पड़ते हैं.

 

ये साइबेरियन पक्षी देकने में बहुत खूबसूतर होते हैं.  ये इंसानों से घुल मिल जाते हैं.

 

इन पक्षियों का शिकार कोई भी शिकारी ना कर पाए इसलिए पक्षियों की सुरक्षा के लिए वन विभाग को लगाया गया है.