क्या वजह है, जो अखिलेश यादव नहीं खोल रहे चाचा शिवपाल (Shivpal Yadav) के लिए पार्टी के रास्ता

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दोस्तों अखिलेश यादव जब झांसी में थे..तो वहां पर जनता से बात करते हुए..और वहां पर एक सिंचाई परियोजना के बहाने से अपने चाचा शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) का जिक्र करते हुए..बीजेपी सरकार पर हमला बोला..जनता के सामने अखिलेश कहते हैं..कि हमारे चाचा ने जो काम करवाए थे..उन कामों का उद्घाटन सीएम ने पीएम से करवा दिया..अखिलेश के शिवपाल यादव के इस जिक्र से शिवपाल की समाजवादी पार्टी में आने की उम्मीद और बढ़ गई है..

ये उम्मीद जरुर लगाई जा रही है..लेकिन चाचा शिवपाल (Shivpal Yadav) के लिए समाजवादी पार्टी के रास्ते कब खुलेंगें..इसकी तारीख अब तक नहीं बताई गई है..लगता तो ये है कि परिवार की 2016-2017 की टीस एक होने में रुकावट बनी हुई है..

मील रही तारीख पर तारीख नतीजा कोई नहीं

शिवपाल (Shivpal Yadav) की समाजवादी पार्टी में शामिल होना और गठबंधन की बात 2 साल से ज्यादा समय हो गया है..दोस्तों कभी एक समय था जब चाचा शिवपाल गठबंधन के लिए 100 सीटें मांग रहे थे..लेकिन अब चाचा शिवपाल समाजवादी पार्टी में विलय तक को तैयार है..और अखिलेश यादव भी सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि वो छोटी-छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन करेंगें..और अपने चाचा शिवपाल यादव के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेंगें..लेकिन अभी बात इससे आगे नहीं बढ़ पा रही है..

जब शिवपाल (Shivpal Yadav) ने देखा की अखिलेश यादव गठबंधन की बात पर कोई फैसला नहीं ले रहें हैं..तो शिवपाल ने सूरत में अलग राह चुनने, और दूसरे दलों के साथ गठबंधन करने की कई बार बात कह चुके हैं..और तारीखें भी दे चुके हैं..इससे पहले शिवपाल ने अखिलेश को फैसला लेने के लिए 11 अक्टूबर तक का समय दिया था…और उसके बाद उन्होंने मुलायम सिंह के बर्थडे पर एक बार फिर शिवपाल ने अखिलेश को एक हफ्ते का समय दिया..और कहा कि अगर इस बार भी कोई फैसला नहीं लिया गया तो वो लखनऊ में एक बड़ी रैली कर अपनी राह चुन लेंगें..ये दोनों ही तारीखें निकल चुकी हैं..लेकिन ना तो अखिलेश का बुलावा आया है और ना ही शिवपाल अब तक फैसला कर पाए हैं..

गठबंधन के पहले देख रहें हैं धार

दोस्तों सूत्रों की माने तो अखिलेश यादव और शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) की एक साथ आने की राह आसान नहीं होगी..क्योंकि साल 2017 के विधानसभा चुनाव के पहले पार्टी में हुए घमासान के बाद रिश्ते इतने बिखरे और सुर इतना निजी रहा कि अब तक उसके घाव भरे नहीं है..और दूसरी तरफ अखिलेश यादव अपने चाचा शिवपाल यादव के दावों के बीच उनकी धार को परख रहें हैं..शायद इसलिए अखिलेश यादव अगर हां नहीं की है तो ना भी नहीं किया है..
भागीदारी के पहले देख रहे धार!

दोस्तों अब ये बात जितनी लम्बी खिचेंगी..शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) के लिए विकल्प उतने ही सीमित होते जाएंगें..और इस विकल्पहीनता का फायदा शर्तों को सीमित करने में मिलेगा..क्योंकि शिवपाल यादव ये चाहते हैं कि जिन लोगों ने उनके साथ समाजवादी पार्टी छोड़ी थी उनको भी पार्टी में लिया जाए और टिकट भी दिया जाए..लेकिन अखिलेश यादव उन लोगों को पार्टी में शामिल कर अपनी पार्टी में विपक्ष को नहीं तैयार करना चाहते हैं..

चाचा शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) और उनके बेटे आदित्य यादव और कुछ और चेहरों को छोड़कर समाजवादी पार्टी किसी और के साथ सीटें साझा करने में मूड में बिल्कुल नहीं है..वहीं सीमित भागीदारी में शिवपाल यादव को अपना सियासी भविष्य खतरे में दिख रहा है..इस वजह से चाचा शिवपाल ने कांग्रेस के साथ कुछ और दलों के साथ जुड़ने के लिए काम शुरु कर दिया है..

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