राजद्रोह (Sedition) कानून से सरकारों को मोहब्बत क्यों ? : संपादकीय व्यंग्य

Pragya Ka Panna Editorial
Pragya Ka Panna Editorial

अंग्रेज़ों ने भारत के लोगों पर अत्याचार करने के लिए एक कानून बनाया था..राजद्रोह कानून (Sedition Law)..अंग्रेजों ने अपने देश से इस कानून को खत्म कर दिया लेकिन भारत अभी तक आंग्रेजों के इस कानून को पाल पोस रहा है..सुप्रीम कोर्ट कहता है कि जब किसी दल को दूसरे दल की या व्यक्ति की बात पसंद नहीं आती राज द्रोह (Sedition) लगा दिया जाता है..राजद्रोह (Sedition) मतलब धारा 124 A..क्या आज की तारीख में राजद्रोह कानून (Sedition Law) की जरूरत है..क्या सरकार के खिलाफ बोलना राजद्रोह (Sedition) है..जो अंग्रेजों के खिलाफ बोलता था..अंग्रेज उसे राजद्रोही करार दे देते थे..उनको अपने खिलाफ उठ रही आवाजों को सुनने की आदत नहीं थी..जो अंग्रेजों की चापलूसी करते थे वो राजभक्त थे जो अपने देश के लिए आवाज उठाते थे वो राजद्रोही..अब देश में ना तो अंग्रेजों का शासन है ना ही देश गुलाम है..ना ही क्रांतिकारी देश को आजाद कराने की लड़ाई लड़ रहे हैं…तो फिर आज की तारीख में ये कानून क्यों है..दोस्तों आज इसी पर बात करेंगे..

राजद्रोह कानून (Sedition Law) की बात बहुत तेजी से इंडिया में चल रही है तो राजद्रोह कानून (Sedition Law) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती किसने और क्यों दी इससे वीडियो की शुरुआत करेंगे..

दोस्तों राजद्रोह कानून (Sedition Law) को सुप्रीम कोर्ट में इसिलए चुनौती दी गई है क्योंकि 2014 से लेकर अब 559 लोगों को गिरफ्तार किया गया लेकिन केवल 10 ही राजद्रोही साबित हुए..सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने चुनौती दी..कहा राजद्रोह कानून (Sedition Law) की आजाद भारत में कोई जरूरत नहीं है..इससे एक कदम और आगे बढ़ेत हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमना ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि अगर कोई पार्टी दूसरे पक्ष की राय नहीं सुनना चाहती तो उनके खिलाफ आसानी से राजद्रोह कानून (Sedition Law) का इस्तेमाल करती है..और इसकी कोई जवाबदेही नहीं है..यानी पहले अंग्रेज अपने खिलाफ उठ रही आवाजों दबाने के लिए राजद्रोह कनून लगाते थे..क्रांतिकारियों को जेल में सड़ाते थे.वैसे ही उस कानून का इस्तेमाल अब पार्टियां करती हैं..जो पार्टी सत्ता में होती है..वो नापंद आवाजों को राजद्रोह कानून (Sedition Law) से खामोश करती हैं..

क्या आज के नए भारत में अंग्रेजों के राजद्रोह कानून (Sedition Law) की जरूरत है उसको भी समझिए..

दोस्तों इतना ही नहीं..चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने सरकार के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से कहा कि आपकी सरकार यानी बीजेपी सरकार ने कई पुराने कानूनों को निरस्त कर दिया है..मुझे नहीं पता कि आपकी सरकार आईपीसी की धारा 124 ए को निरस्त करने पर विचार क्यों नहीं कर रही है..इस पर केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने राजद्रोह कानून (Sedition Law) को निरस्त करने का विरोध किया..

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चीफ जस्टिस एनवी रमना ने पूछा कि आजादी के 75 साल बाद भी इस कानून जरूरी है क्या ? इसका इस्तेमाल तो ब्रिटिश हुक्मरानों ने क्रांतिकारियों के खिलाफ किया था..महात्मा गांधी और बाल गंगाधर तिलक जैसे लोगों पर राजद्रोह कानून (Sedition Law) लगाया गया था..सरकारी पक्ष का कहना है कि राजद्रोह कानून (Sedition Law) खत्म यानी रद्द नहीं किया जाना चाहिए, उसकी अहमियत देश की एकता अखंडता के लिए जरूरी है..इसके उपयोग के लिए गाइडलाइन बना दी जाए..जिससे इसकी कानूनी उपयोगिता और उद्देश्य बना रहे.

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राजद्रोह कानून बना कैसे कहां बना वो भी जान लीजिए..

राजद्रोह कानून (Sedition Law) 18वीं शताब्दी में इंग्लैंड में मैकाले ने बनाया था..अंग्रेजों का मानना था कि सरकार के लिए अच्छी राय रखने वाले लोग होने चाहिए..सरकार का विरोध करने वाले सरकार की छवि खराब करते हैं..सरकार की छवि बनी रहे..इसलिए सरकार के खिलाफ लिखने पढ़ने बोलने और सरकार विरोधी काम करने वालों को राजद्रोही कहा जाता था..1860 में ही इसे भारत में लागू किया गया..

राजद्रोह कानून (Sedition Law) में सजा कितनी हो सकती है..अगर किसी पर राजद्रोह कानून लगा दिया गया तो उसकी जमानत होगी या नहीं ये भी जान लीजिए..

भारतीय दंड संहिता की धारा 124A के मुताबिक राजद्रोह (Sedition) एक प्रकार का अपराध है..सरकार के प्रति मौखिक, लिखित , संकेतों या वीडियो के रूप में घृणा या अवमानना या उत्तेजना पैदा करने की कोशिश अपराध है..राजद्रोह गैर-जमानती अपराध है..राजद्रोह (Sedition) के अपराध में तीन साल से लेकर उम्रकैद तक की सज़ा हो सकती है और इसके साथ ज़ुर्माना भी लगाया जा सकता है..

सरकार राजद्रोह कानून (Sedition Law) को सही क्यों कहती है वो भी आपको जानना चाहिए..

सरकार कहती है कि राष्ट्र विरोधी, अलगाववादी और आतंकवादी तत्त्वों से निपटने में ये कानून मदद करता है..
ये धारा हिंसा करके या अवैध तरीकों से सरकार को उखाड़ फेंकने के प्रयासों से बचाती है..
अगर कोर्ट अपनी अवमानना पर दंड दे सकता है तो सरकार को भी अपनी अवमानना ​​करने वालों को सजा देने का अधिकार होना चाहिए

दोस्तों इस लेख में इतना ही चलते हैं राम राम दुआ सलाम जय हिंद..मुझे ट्विटर पर @PRAGYALIVE नाम से खोजकर फॉलो जरूर कीजिए..

डिस्क्लेमर- लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. भाषा में व्यंग्य है. लेखक का मक्सद किसी पार्टी किसी व्यक्ति किसी सरकार किसी धर्म जाति किसी मानव किसी जीव या फिर किसी संवैधानिक पद का अपमान करना या उनके सम्मान को छति पहुंचाने का नहीं है.. इसलिए व्य्ग्य को व्यंग्य की तरह लें..लेख में सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. भाषा में स्थानीय या यूपी की रीजनल भाषा को सरल करके प्रस्तुत किया गया है. समझाने के लिए बात घुमाकर कही गई है.

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