राममंदिर विवाद: फैसले से पहले आठ जोन और 31 सेक्टरों में बटा शहर, ज़ारी हुआ सख़्त आदेश, देखें-

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने में अब गिनती के 4-5 दिन ही बचे हैं. लेकिन इससे पहले ही अयोध्या में पुलिस-प्रशासन सभी तैयारियों को पूरा करने में जुटा है.

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पूरे अयोध्या जिले को आठ जोन और 31 सेक्टरों में बांटा गया है. निर्णय वाले दिन के लिए रैपिड एक्शन फोर्स, आरआरएफ और पीएसी की दस कंपनी मांगी गई हैं. 106 संवेदनशील स्थानों पर पीएसी और आरएएफ द्वारा मार्च निकाला जा रहा है. 12 नवंबर को मखदूमपुर और गढ़ गंगा मेले से तीन हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी ड्यूटी से लौट आएंगे. जिसके बाद जिले के सभी संवेदनशील स्थानों पर पुलिस, आरएएफ, आरआरएफ और पीएसी को तैनात कर दिया जाएगा. और बिना अनुमति के सभी धरना प्रदर्शनों पर भी रोक लगा दी गई है.

भाजपा ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रवक्ताओं से राम मंदिर मामले में भावनात्मक और भड़काऊ बयान देने से बचने को कहा है. इसके साथ ही भाजपा की सोशल मीडिया इकाई के प्रमुख अमित मालवीय ने भी पार्टी की सोशल मीडिया टीमों को इस बारे में जानकारी दी कि इस तरह के मंचों पर विवादास्पद बयान देने से कैसे बचें. जिला मजिस्ट्रेट अनुज कुमार झा ने सोशल मीडिया पर देवताओं का ‘अपमान’ करने या कोई मूर्ति स्थापित करने और राम जन्मभूमि के संबंध में जुलूस निकालने पर रोक का आदेश दिया है.

आदेश में कहा गया है कि कोई व्यक्ति तेजाब, पत्थर, कंकड़, कांच के टुकड़े, खाली बोतलें या अन्य कोई विस्फोटक सामग्री लेकर नहीं निकलेगा. सार्वजनिक स्थानों पर मांसाहार के बचे अवशेष फेंकने पर पाबंदी होगी. कार्तिक पूर्णिमा, चौहद कोसी और पंचकोसी परिक्रमा मेला के स्थानों पर इस अवधि में मांस, मछली और अंडों की बिक्री नहीं होगी.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी कुछ दिन पहले अपने प्रचारकों को इसी तरह का परामर्श जारी किया था. संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हाल ही में प्रचारकों की बैठक में कहा था कि राम मंदिर फैसला पक्ष में आने पर विजय उत्सव नहीं मनाया जाए या जुलूस नहीं निकाले जाएं.

उत्तर प्रदेश सरकार ने चार पन्नों का एक आदेश जारी किया है. जिसमें अयोध्या जिले में रहने वाले लोगों से कहा गया है कि वे सोशल मीडिया जैसे कि वाट्सऐप, ट्विटर, टेलिग्राम और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर भगवान को लेकर दो महीने तक किसी भी तरह की अपमानजनक टिप्पणी न करें. आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया जाएगा.

सरकारी अधिकारियों को छोड़कर सभी व्यक्तियों के लाइसेंसी हथियार ले जाने पर रोक लगाई हुई है. अगर किसी को हथियार लेकर चलना है तो उसे जिला प्रशासन से इसकी इजाजत लेनी होगी. फैसला अगर 10 नवंबर से पहले आया तो पुलिस के लिए चुनौती काफी बढ़ जाएगी. क्युकी 10 नवंबर को बारावफात का त्यौहार है, जिसे मोहम्मद साहब के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है.

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