लखनऊ: स्टेट बैंक में हुआ किसान क्रेडिट कार्ड लोन में 6.60 करोड़ का घोटाला, ब्रांच मैनेजर समेत पांच पर केस दर्ज

बैंक घोटालों की लिस्ट में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का नाम एक बार फिर जुड़ गया है. मामला लखनऊ के काकोरी शाखा का है. जहाँ किसान क्रेडिट कार्ड लोन के नाम पर 6.60 करोड़ का घोटाला सामने आया है.

sbi kakori branch 6.60 crore farmer credit loan scam
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इस घोटाले की शिकायत स्टेट बैंक के रीजनल मैनेजर मुनीष उप्पल ने सीबीआइ से की थी. उन्होंने बताया था कि बैंक की जांच में सामने आया था कि वर्ष 2014 से 2017 के बीच स्टेट बैंक की काकोरी शाखा में फर्जी खतौनी और अन्य दस्तावेजों के जरिए 96 किसान क्रेडिट कार्ड लोन पास किए गए थे और लोन की रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर हड़प ली गई थी. फिर उन खातों में किसान क्रेडिट कार्ड रोक दिए गए, और बाद में उन्हें एनपीए घोषित कर दिया गया.

उप्पल के इस बयान के बाद सीबीआइ लखनऊ की एंटी करप्शन शाखा ने स्टेट बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत पांच आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और षड्यंत्र समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है. जिसमें तत्कालीन ब्रांच मैनेजर कमल कुमार श्रीवास्तव, अंशुल मेंदीरत्ता और अवधेश कुमार श्रीवास्तव, बैंक के वकील प्रकाश चंद्र विद्यार्थी और निजी व्यक्ति गोले द्विवेदी को नामजद किया है.

सीबीआई के मुताबिक काकोरी की SBI ब्रांच से किसान क्रेडिट लोन से जुड़ी शिकायतें आने के बाद दिए गए लोन की जांच करवाई गई थी. जिसमें पता चला कि फर्जी दस्तावेज लगाकर 6.60 करोड़ की रकम निकाली गई है. इस बड़े घोटाले में बैंक मैनेजर की मिलीभगत सामने आ रही है. वहीं जाँच में पता चला है कि कमल कुमार श्रीवास्तव के कार्यकाल में वर्ष 2015-16 में सबसे ज्यादा 70 फर्जी किसान क्रेडिट कार्ड लोन दिए गए थे. तो वहीं 17 लोन अंशुल मेंदीरत्ता के
कार्यकाल में और सात लोन अवधेश कुमार श्रीवास्तव के कार्यकाल में जारी किए गए थे.

जाँच में ये भी सामने आया है कि इन सभी मामलों में बैंक पैनल के वकील प्रकाश चंद्र विद्यार्थी ने ही फर्जी दस्तावेज पास किए. जिसके बाद लोन की रकम पहले 96 लोगों के खाते में गई और वहां से उसे गोले द्विवेदी के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया. और पूरा का पूरा पैसा सब मिलकर डकार गए.

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