रोहित सरदाना जी भी नहीं रहे..2 मई की काउंटिंग रोकिए वर्ना अनर्थ होगा : संपादकीय

भारत में कोरोना से हाहाकार है..हिंदुस्तान के नंबर वन आजतक न्यूज चैनल में..राष्ट्रवादी चेहरे के तौर पर पहचान बनाने वाले पत्रकार रोहित सरदाना जी का उत्तर प्रदेश में कोरोना से निधन हो गया है..लेकिन सरकार को कोई फर्फ नहीं पड़ रहा है..आप लोग कहते हैं जब से कोरोना आया है तब से मैं बीजीपी विरोधी हो गई हूं..दोस्तों मैं विरोधी नहीं हो गई हूं…मैं इन चिकने घड़ों को बता रही थी..चेता रही थी…हर तरीके से आगाह कर रही थी कि सरकारें जागें..लेकिन किसी ने मेरी बात नहीं मानी..बंगाल चुनाव की रैलियों का जितना विरोध भारत की बेटी होने के नाते कर सकती थी मैंने किया..कुंभ के बारे में चेताया..पंचायत चुनाव में कोरोना मौत बांटेगा ये भी मैंने समय रहते यूपी की सरकार को बाताया..बार बार चिल्लाती रही लेकिन किसी ने नहीं सुनी..अब आगे सुनिए वही हो गया जिसकी मुझे आशंका थी बताया जा रहा है कि पंचायत चुनाव की ड्यूटी में लगे..700 से ज्यादा टीचर या कह लीजिए कर्मचारी कोरोना से मर गए हैं..

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ जी आप साक्षात ब्रह्म नहीं हैं..आपके अधिकारी भगवान नहीं है..आपलोगों ने अपने अपने घमंड में चूर रहकर उत्तर प्रदेश को मौत के मुंह में झोंका है..बुरा लग रहा हो तो भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता..अभी भी वक्त है चेत जाईये..पंचायत चुनाव की काउंटिंग कम से कम हजार लोगों की जान लेकर जाएगी..पंचायत चुनाव के बाद गांव में लोग आम की तरह टपक टपककर मर रहे हैं शाम को बुखार आता है और सुबह मौत हो जा रही है..कहिए तो नाम समेत आंकड़े भिजावा दूं..प्लीज आप पंचायत चुनाव की काउंटिंग रोकिए..मैं आप लोगों से कड़े शब्दों में बात कर रही हूं इसका मतलब ये नहीं है कि मैं आपकी विरोधी हूं..आप अच्छा करते हैं मैं तारीफ करती हूं लेकिन आप लोग पिछले 2 महीने से पाप कर रहे हैं..मैं उत्तर प्रदेश की भलाई के लिए कह रही हूं सर..2 मई की काउंटिंग रोकिए वर्ना आप जान बूझकर अनर्थ कर बैठेंगे..

आपको यकीन नहीं हो रहा हो तो मैं आपको याद दिलाती हूं..मैंने बताया था कि यूपी पंचायत चुनाव में जिन लोगों की ड्यूटी लगाई जा रही है उनमें से बहुत लोगों को कोरोना के लक्षण हैं..कोरोना बहुत बुरी तरह फैल सकता है लेकिन आप लोग नहीं माने..700 से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों की कोरोना से मौत नहीं हुई..सिस्टम ने उनकी हत्या की है…ये मैं नहीं कह रही हूं..ये यूपी की प्राथमिक शिक्षक संघ का कहना है..इसलिए अब कर्मचारी काउंटिंग में ड्यूटी के नाम से थर्र थर्र कांप रहे हैं..कर्मचारियों को लग रहा है कि अब काउंटिंग में लगाकर उनको शहीद कर दिया जाएगा..शिक्षक संघ ने चुनाव आयोग से मांग कर दी है कोरोना को देखते हुए काउंटिंग को स्थगित किया जाए..वोटों की गिनती इतनी जरूरी नहीं है कि लाशों पर खड़े होकर वोट गिने जाएं..सर मेरा नाम प्रज्ञा मिश्रा है..इस समय अगर भगवान की भी सरकार होती तो भी मैं इन फैसलों का विरोध करती..चुनाव के लिए देश को श्मसान घाट तो बना ही दिया है..अब जनबूझकर लोगों को कोरोना के मुंह में मत झोकिए..

यूपी के शिक्षक संघ ने 700 लोगों के नाम सूची में लिखकर दिए हैं..मुख्यमंत्री को भी दिए हैं शिक्षा मंत्री को भी दिए हैं..और राज्य चुनाव आयोग को भी भेजे हैं..और अगर अब भी..बंगाल समेत 5 राज्यों के विधानसभा और यूपी में पंचायत चुनावों की काउंटिंग हुई..मेरे प्यारे देशवासियों आप ये समझ लेना कि सरकारों को आपसे आपकी जान से कोई लेना देना नहीं है…उनको लाशों के ढेर पर बैठकर भी चुनाव लड़ने में कोई दिक्कत नहीं है..

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा चुनाव आयोग ने रैली क्यों नहीं रोकी इसलिए चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला चलाया जाना चाहिए…लेकिन चलाएगा कौन भईया..यूपी में पंचायत चुनाव की डूयूटी में लगे 700 कर्मचारियाों की मौत हुई है..यहां किस पर कौन सा मुकदमा होना चाहिए..देश में लगभग 9 हजार आईएएस-आईपीएस, 4 हजार विधायक, 750 लोकसभा-राज्यसभा सांसद और 600 के आसपास मंत्री हैं.. सुप्रीम कोर्ट के 700 जज ब्रह्मा-विष्णु और महेश बनकर बैठे हैं..जो कभी भी कुछ भी करवाने की हिम्मत रखते हैं.. लेकिन सब मुंह में रसगुल्ला दबाए हुए हैं किसी को दिखाई सुनाई नहीं दे रहा है..

किसी को कुछ लेना देना नहीं है..प्रज्ञा मिश्रा के पास देश और प्रदेश को कोरोना से अलर्ट करने का ठेका है..प्रज्ञा मिश्रा को लोगों की जान की चिंता है..और उसके बाद भी देखिए मिलता क्या है ठप्पा..बीजेपी विरोधी होने का..अरे बीजेपी भगवान है क्या..ये इक्कीसवीं सदी का आपतकाल है..सरकारें कुछ नहीं कर रहीं तो आदरणीय कोर्ट महोदय आप लोग कुछ कीजिए..आज हमने अपने बीच का सबसे बड़े साथी एंकर रोहित सरदाना को खोया है..रोहित जी इतने बड़े चैनल में थे..राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में थे..उनके इलाज में तो कोई कमी नहीं होगी..पैसे की भी कोई कमी नहीं होगी फिर भी हम रोहित सरदाना जी को नहीं बचा पाए..आम आदमी को अस्पताल का बेड छोड़ दीजिए..ऑक्सीजन सिलेंडर तक नसीब नहीं..अब देश सड़कों पर गिरी हुई लाशें देखने का इंतजार कर रहा है क्या..

DISCLAMER- लेख में प्रस्तुत तथ्य/विचार लेखक के अपने हैं. किसी तथ्य के लिए ULTA CHASMA UC उत्तरदायी नहीं है. लेखक एक रिपोर्टर हैं. लेख में अपने समाजिक अनुभव से सीखे गए व्यहवार और लोक भाषा का इस्तेमाल किया है. लेखक का मक्सद किसी व्यक्ति समाज धर्म या सरकार की धवि को धूमिल करना नहीं है. लेख के माध्यम से समाज में सुधार और पारदर्शिता लाना है.