बाहुबली नेता शहाबुद्दीन का कोरोना से निधन, तिहाड़ जेल प्रशासन ने की पुष्टि

बिहार के सिवान से पूर्व सांसद और राजद के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन का कोरोना से निधन हो गया है. तिहाड़ जेल प्रशासन ने इसकी पुष्टि कर दी है. शहाबुद्दीन कोरोना संक्रमित हो गए थे, दिल्ली में उनका इलाज चल रहा था.

तिहाड़ के DG ने किया कन्फर्म

तिहाड़ के DG द्वारा मीडिया को भेजे गए संदेश में कहा गया है कि दिल्ली के DDU अस्पताल में भर्ती कैदी मोहम्मद शहाबुद्दीन का कोरोना से निधन हुआ है. शहाबुद्दीन हत्या के मामले में तिहाड़ जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे थे. फिलहाल उनका अस्पताल में इलाज चल रहा था. बिहार में पिछले 24 घंटे के अंदर बिहार सरकार के सबसे बड़े अधिकारी मुख्‍य सचिव अरुण कुमार सिंह, भाजपा के एमएलसी हरि नारायण चौधरी, बिहार में डाक विभाग के सबसे बड़े अधिकारी मुख्‍य डाकपाल अनिल कुमार और वरिष्‍ठ पत्रकार सुकांत नागार्जुन का निधन हो चुका है.

RJD प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा

शहाबुद्दीन की मौत के बाद RJD प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन अब हमलोगों के बीच नहीं रहे. कोरोना संक्रमण की वजह से उनकी मौत हो गई है. ये RJD परिवार के दुखद खबर है. पूरा RJD परिवार मर्माहत है. मो.शहाबुद्दीन अपने क्षेत्र में काफी लोकप्रिय थे. वे हमेशा जनता के लिए काफी काम करते थे. सिर्फ अपने क्षेत्र में ही नहीं हर जगह उनको चाहने वाले कई लोग थे. शहाबुद्दीन एक कर्मठ सांसद के रूप में जाने जाते थे.

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दिल्ली से गिरफ्तार हुआ था शहाबुद्दीन

मामला अगस्त 2004 का है. उस समय सीवान में दो दुकानों के मालिक चंदा बाबू को दो लाख रुपए की रंगदारी के लिए फोन आ रहे थे. मगर उन्होंने फोन कॉल्स को इग्नोर कर दिया था. एक दिन किसी काम से वो पटना चले गए. 16 अगस्त 2004 को चंदा बाबू के किराने की दुकान पर चंदा बाबू का बेटा सतीश था. उसी दौरान रंगादारी मांगने वाले बदमाश हथियारों के साथ आ धमके.

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दुकान पर बैठे सतीश ने कहा कि खर्चे के लिए 30-40 हजार रुपए दे सकता है, दो लाख रुपए उसके पास नहीं है. तभी बदमाशों ने सतीश की पिटाई की और गल्ले में रखे ढाई लाख रुपए निकाल लिए. छोटे भाई राजीव ने जब सतीश को गुंडों के हाथों मार खाते देखा, तो अपने भाई को बचाने के लिए उसने बाथरूम साफ करने वाले एसिड को बदमाशों की ओर फेंका.

इसके बाद बदमाशों ने राजीव को एक खंभे में बांध दिया और उसके सामने दो भाई सतीश और गिरीश को तेजाब से नहला दिया. इस घटना में चंदा बाबू के दो बेटों की मौके पर दर्दनाक मौत हो गई. और राजीव को बदमाश अपने साथ ले गए. लेकिन राजीव अपराधियों के पास से भागने में सफल हो गया. वो इस मामले में एकलौता गवाह था. लेकिन इस कांड के चश्मदीद गवाह राजीव रौशन की भी 16 जून 2014 को डीएवी मोड़ पर गोली मारकर जान ले ली गई थी. तीनों बेटे की मां व व्यवसायी चन्दकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू की पत्नी कलावती देवी ने मुफस्सिल थाने में एफआइआर दर्ज कराई थी.

सनसनीखेज हत्याकांड में शहाबुद्दीन के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया था पर गिरफ्तारी नहीं हुई थी, लेकिन 2005 में जब नीतीश कुमार की सरकार आ गई, तब शहाबुद्दीन पर शिकंजा कसा गया. और उसी साल शहाबुद्दीन को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था. 2009 में सीवान के तत्कालीन एसपी अमित कुमार जैन के निर्देश पर केस के आइओ ने शहाबुद्दीन, असलम, आरिफ व राज कुमार साह को अप्राथमिकी अभियुक्त बनाया था. और आखिरकार चंदा बाबू अपने तीन बेटों को खोने के बाद शहाबुद्दीन को जेल भेजने में कामयाब हो गए थे. हालांकि, चंदा बाबू का निधन दिसंबर 2020 में हो गया था. लेकिन शहाबुद्दीन के निधन के बाद लोगों के जेहन में अचानक चंदा बाबू जिंदा हो गए हैं.

शहाबुद्दीन RJD प्रमुख लालू यादव का बेहद करीबी माना जाता था. 90 के दशक में विधायक और सांसद रह चुका शहाबुद्दीन बिहार में बाहुबली के तौर पर जाना जाता था. पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड में भी शहाबुद्दीन का नाम सामने आया था. फिर कोर्ट के निर्देश पर शाहबुद्दीन को तिहाड़ जेल भेजा गया था. शहाबुद्दीन की छवि ऐसी थी कि लोग सरेराह उसका नाम लेना भी मुनासिब नहीं समझते थे. शहाबुद्दीन के समर्थक उसे साहेब के नाम से बुलाते थे.