आतंकी विकास दुबे की पूरी HISTORY यहां पढ़िए, ब्राह्मण वोटों का सौदागर था दुर्दांत दुबे –

8 पुलिसकर्मियों के हत्यारे विकास दूबे के अपराधों का सिलसिला साल 1990 से शुरू हुआ था. कानपुर के बिकरु गांव में रहने वाले एक किसान का बेटा था विकास दुबे.

Read the complete HISTORY of terrorist Vikas Dubey
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विकास के खिलाफ 1990 में शिवली थाने में पहला मामला दर्ज हुआ था. कानपुर के शिवली के विकास को ब्राह्मणों का ब्रांड माना जाता था, ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र में पिछड़ों की हनक को कम करने और वोटों को बटोरने के लिए विकास को राजनीतिक संरक्षण मिलता था. विकास को संरक्षण देने में सबसे कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक नेकचंद्र पांडे का हाथ था, जिसे कांग्रेस ने अनुशासन हीनता के चलते पार्टी से बेदखल किया था. विकास बसपा, भाजपा, सपा उस दौर की सभी पार्टियों की गुदड़ी का लाल था.

विकास दुबे क्षेत्र में दबंगई और मारपीट के लिए जाना जाता था, कई बार विकास पर केस भी दर्ज हुए लेकिन जैसे ही विकास थाने पहुंचा नेताओं के फोन आने शुरू हो जाते और पुलिस की गाड़ी उसे घर तक छोड़ने निकल जाती… कुछ दिनों बाद पुलिस ने भी विकास पर नजर टेढ़ी करनी छोड़ दी थी, और दबाव के कारण क्षेत्र में सकुशल रहने के लिए विकास की शरण ले ली थी. पुलिस से लेकर मंत्री तक के ज़मीन और पैसों का सारा काला काम विकास ही करवाता था इसलिए पुलिस और तमाम राजनीतिक लोग विकास को कानून की नज़र से छिपा रखे थे.

साल 2000 में विकास ने अपना पहला मर्डर किया था, उसने इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडे की गोली मारकर हत्या की थी, फिर 2001 में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला को शिवली थाने के भीतर घुसकर गोली मारकर मौत के घाट उतारा था, इसके बाद से ही क्षेत्र में विकास के नाम की तूती बोलने लगी. विकास के ऊपर शुरुआत से ही राजनीतिक और शासन का मजबूत हांथ था इसलिए हत्याएं उसके लिए बेहद आम थी.

कहते है बिकरु और शिवली के आसपास के तमाम क्षेत्रों में विकास की दहशत कुछ इस कदर थी कि उसके एक इशारे पर चुनाव में वोट गिरने शुरू हो जाते थे.

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