राजा जी रैलियों (Rally) के राजा हैं कोरोना जी रात के राजा हैं : संपादकीय व्यंग्य

 

PRAGYA KA PANNA
PRAGYA KA PANN

हां वो आ गया है लेकिन वो सिर्फ रातों का राजा है..हां वो आ तो गया है लेकिन सरकार ने उसे सिर्फ रात में निकलने का वीजा दिया है..हां वो आ तो गया है लेकिन उसे केवल बारातों में जाने की छूट दी गई है..हां वो आ तो गया है..लेकिन वो रैलियों (Rally) में प्रतिबंधित है..हां वो आ तो गया है लेकिन वो प्रधानमंत्री का भाषण नहीं सुन सकता..हां वो आ तो गया है..वो अमित शाह के रोड शो में नहीं जा सकता..हां वो आ तो गया है लेकिन विपक्ष की रैलियों के रास्ते भी उसके लिए बंद हैं..हां वो आ तो गया है लेकिन दिन के देवताओं ने उसके लिए सीमा रेखा खींच दी है..

हां वो आ तो गया है लेकिन उससे लिखित में समझौता हो चुका है..सन्धि हो चुकी है कि वो रात में 11 से सुबह 5 बजे के बीच ही निकल सकता है..बारातों में जा सकता है..क्लबों डिस्को में नाच सकता है..लेकिन रैलियों में नहीं जा सकता..रैलियों में नमक तेल सिलेंडर पाए लोगों को भरकर ही लाया जाएगा..अगर कोरोना परिवहन निगम की बसों में भरकर आने को तैयार हो जाए..एक कुर्सी भरने के लिए तैयार हो जाए तो उसे रैलियों में बुलाने पर विचार हो सकता है लेकिन..कोरोना भीड़ कम कर देता है भीड़ बढ़ा सकता तो रैलियों में बुलाने पर विचार किया जा सकता था..

बारातों में भीड़ पर प्रतिबंध और रैलियों में उसी भीड़ को बुलाने का अनुबंध है…अनुबंध किस लेवल का है आप इस रिकॉर्डिग से समझिए..सरकारी अधिकारी भीड़ कॉनट्रैक्टर बन चुके हैं..कॉनट्रैक्टर मतलब भीड़ ढोने के ठेकेदार..पहली बार उत्तर प्रदेश की आबादी का किसी पार्टी ने सही इस्तेमाल किया है..बेरोजगारी के दौर में निठल्ले बैठे लोग रैली में ना जाने के लिए बिजी होने का बहाना भी नहीं बना सकते..एक एसडीएम लेवल का आदमी ग्राम प्रधान को धमका रहा है कि अगर ग्राम प्रधान ने मोदी जी की रैली में अपने गांव के लोगों को सुपुर्देखाक नहीं करता है तो उसे सरकारी प्रकोप झेलना पड़ेगा..

सुना आपने घरवालों ने मिठाई बांठी होगी कि लड़का एसडीएम बन गया है लेकिन लड़का एसडीएम बनकर भाड़े की भीड़ ढोएगा..आदमी इकट्ठा करने का आम करेगा नौकरी लगते समय ये पता लग जाता..तो घर वाले पीसीएस की पढ़ाई में पैसा फूकने की जगह मदारी बना देते सपेरा बना देते..सरकस में भर्ती करा देते भीड़ बुलाने का टैलेंट वहां भी काम आ ही जाता..रात में डंडा मारकर भगाया जाएगा..दिन की रैलियों में कोरोना के डर से घरों में छिपे लोगों को खींचखींचकर निकाला जाएगा..इसी को पुराणों में अंधेर नगरी कहा गया है..

रात में कोरोना को घूमने के लिए प्रॉपर स्पेस चाहिए होगा इसलिए उसकी खिदमत में उसे रात पेश की गई है..कड़कड़ाती रातों में कोरोना कर्फ्यू क्यों लगाया गया है ये बताने को कोई तैयार नहीं है..राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला हो सकता है शायद इसीलिए रात और दिन की कोरोना डील सार्वजनिक नहीं की जा सकती है..क्या नाईट कर्फ्यू ट्रेनों में सफर कर रहे यात्रियों पर लागू होगा..क्या नाईट कर्फयू के दौरान फ्लाइट्स उड़ान नहीं भरेंगी..क्या रात के समय अंतरराज्यीय बसें नहीं चलेंगी..तो ऐसा नहीं है..चलेगा सब लेकिन रात में 11 से सुबह 5 बजे तक कर्फ्यू रहेगा..ये ऐलान राजाजी ने किया है..और राजाजी जो करते हैं सोच समझकर करते हैं उस पर सवाल उठाने का मतलब है देश विरोधी हो जाना है..और इस देश में कोई देशद्रोही नहीं होना चाहता..मैं पहले से सच्ची देशभक्त हूं..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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